अगर आप पटना में हैं और हस्तशिल्प, पारंपरिक कला और लजीज व्यंजनों के शौकीन हैं, तो इन दिनों पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान आपके लिए सबसे बेहतरीन जगह है। यहाँ ‘बिहार सरस मेला 2025’ अपनी पूरी चमक-धमक के साथ चल रहा है। इस बार का मेला न केवल बिहार की संस्कृति बल्कि देश के 26 राज्यों की कला का संगम बना हुआ है।

सरस मेला 2025: कब से कब तक?
बिहार सरस मेला आधिकारिक तौर पर 12 दिसंबर 2025 को शुरू हुआ था। शुरुआत में इसकी अंतिम तिथि 28 दिसंबर तय की गई थी। हालांकि, नए साल की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने एक बड़ा फैसला लिया है। ताजा अपडेट के अनुसार, अब यह मेला 4 जनवरी 2026 तक चलेगा । ध्यान रहे कि नए साल के दिन यानी 1 जनवरी को मेला स्थगित (बंद) रहेगा ।
- स्थान: गांधी मैदान, पटना
- समय: सुबह 10:00 बजे से रात 8:00 बजे तक
- प्रवेश शुल्क: सभी के लिए प्रवेश बिल्कुल मुफ्त है।
मेले की थीम और मुख्य आकर्षण
इस वर्ष मेले की थीम ‘हुनरमंद हाथों से सजता बिहार’ रखी गई है। ग्रामीण विकास विभाग और जीविका (BRLPS) द्वारा आयोजित इस मेले में 500 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं।
1. 26 राज्यों की कला का संगम: मेले में केवल बिहार ही नहीं, बल्कि गुजरात, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, आंध्र प्रदेश और उत्तराखंड जैसे 26 राज्यों के स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाएं हिस्सा ले रही हैं। यहाँ आपको टसर सिल्क, मधुबनी पेंटिंग, टिकुली आर्ट, सिक्की और बैम्बू आर्ट के बेहतरीन नमूने देखने को मिलेंगे ।
2. दीदी की रसोई (Didi Ki Rasoi): अगर आप खाने के शौकीन हैं, तो मेले का ‘फूड जोन’ आपके लिए जन्नत है। यहाँ ‘दीदी की रसोई’ में आपको शुद्ध, पौष्टिक और पारंपरिक व्यंजन मिलेंगे। इस बार गया के बोधगया की जीविका दीदी द्वारा बनाए गए नीरा के लड्डू, पेड़ा और तिलकुट लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं, क्योंकि ये पूरी तरह से शुगर-फ्री हैं। इसके अलावा किशनगंज की ऑर्गेनिक चाय की खुशबू भी मेला परिसर में महक रही है।
3. बच्चों और परिवारों के लिए खास: मेले में परिवारों की सुविधा के लिए ‘पालना घर’ (Crèche), फन जोन और सेल्फी जोन बनाए गए हैं। शाम के समय यहाँ प्रतिदिन सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकगीत, लोक नृत्य और सामाजिक जागरूकता फैलाने वाले नुक्कड़ नाटक आयोजित किए जा रहे हैं।
क्या है खास इस बार?
- कैशलेस पेमेंट: मेले के सभी स्टॉलों पर डिजिटल पेमेंट की सुविधा दी गई है। इसके अलावा नकदी की निकासी और जमा के लिए जीविका दीदियों द्वारा ग्राहक सेवा केंद्र (CSP) भी चलाए जा रहे हैं।
- शिल्पग्राम और मधुग्राम: हस्तशिल्प के लिए विशेष ‘शिल्पग्राम’ और शुद्ध शहद के लिए ‘मधुग्राम’ स्टॉल इस बार काफी लोकप्रिय हो रहे हैं।
- सतत जीविकोपार्जन योजना: अति गरीब परिवारों द्वारा बनाई गई अनूठी वस्तुएं भी इस मेले का हिस्सा हैं।
बिहार सरस मेला 2025 ग्रामीण महिला उद्यमियों की सफलता की एक अद्भुत कहानी है। यह मेला न केवल उन्हें बाजार मुहैया करा रहा है, बल्कि शहरी ग्राहकों को शुद्ध और हस्तनिर्मित उत्पादों से जोड़ रहा है । अगर आपने अभी तक यहाँ का चक्कर नहीं लगाया है, तो 4 जनवरी से पहले जरूर जाएं और ग्रामीण भारत के हुनर को करीब से देखें।

















