समस्तीपुर जिले के मोहनपुर प्रखंड के लोगों के लिए गंगा नदी केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि एक ऐसी चुनौती रही है जिसने उन्हें दशकों तक विकास की मुख्यधारा से अलग रखा। आजादी के करीब 78 वर्षों के बाद भी, हरदासपुर दियारा के हजारों निवासी छोटी नावों के सहारे अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार करते आए हैं । लेकिन अब यह इंतजार खत्म होने वाला है। रसलपुर गंगा घाट से हरदासपुर के बीच बन रहा नया पीपा पुल इस क्षेत्र की ‘लाइफलाइन’ बनने जा रहा है ।
आस्था और उम्मीद का नया सेतु :समस्तीपुर रसलपुर हरदासपुर पीपा पुल
समस्तीपुर के मोहनपुर प्रखंड के अंतर्गत हरदासपुर, सरसावा और जहिंगरा जैसे गाँव घनी आबादी वाले हैं, लेकिन गंगा के तटीय (दियारा) क्षेत्र में होने के कारण ये मुख्य भूमि से कटे हुए थे । ग्रामीणों को शिक्षा, इलाज या व्यापार के लिए नाव का घंटों इंतजार करना पड़ता था। स्थानीय निवासियों के चेहरे पर अब एक अलग ही चमक है, क्योंकि रसलपुर गंगा घाट पर पीपा पुल के निर्माण का काम तेजी से शुरू हो गया है । लोगों का मानना है कि यह केवल लोहे के पीपों का ढांचा नहीं, बल्कि उनकी आने वाली पीढ़ियों के सुनहरे भविष्य का रास्ता है।
परियोजना का तकनीकी और आर्थिक ढांचा
बिहार राज्य पुल निर्माण निगम लिमिटेड (BRPNNL) द्वारा इस महत्वपूर्ण परियोजना का निर्माण किया जा रहा है । तकनीकी दृष्टि से यह पुल काफी विशाल है:
- कुल लागत: इस परियोजना पर करीब 35.72 करोड़ से 40 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं ।
- लंबाई और चौड़ाई: पुल की कुल लंबाई लगभग 793 मीटर से 1,000 मीटर के बीच है और इसकी चौड़ाई 8.23 मीटर रखी गई है ।
- तकनीकी बनावट: गंगा की लहरों पर स्थिरता बनाए रखने के लिए इसमें कुल 65 पीपा सेट्स (पोंटून) का इस्तेमाल किया जा रहा है ।
- रखरखाव: सरकार ने अगले पांच वर्षों के लिए इसके रखरखाव और बरसात के बाद दोबारा जोड़ने (Re-setting) के लिए ₹34.09 करोड़ का प्रावधान किया है ।
पटना की दूरी होगी कम, समय की होगी बचत
इस पुल के बनने से सबसे बड़ा चमत्कार यातायात के क्षेत्र में होगा। वर्तमान में मोहनपुर प्रखंड से पटना के बख्तियारपुर जाने के लिए लोगों को लगभग 90 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाना पड़ता है । इस पुल के चालू होने के बाद यह दूरी घटकर मात्र 15 किलोमीटर रह जाएगी ।
75 किलोमीटर की यह बचत न केवल पेट्रोल और डीजल के पैसे बचाएगी, बल्कि उन मरीजों के लिए भी वरदान साबित होगी जिन्हें आपातकालीन स्थिति में पटना के अस्पतालों में ले जाना पड़ता है ।
किसानों और छात्रों के लिए नई सुबह
दियारा क्षेत्र की उपजाऊ मिट्टी सब्जी उत्पादन के लिए जानी जाती है। अब तक परिवहन के साधन न होने के कारण किसानों की फसलें खेत में ही खराब हो जाती थीं या उन्हें कौड़ियों के दाम पर बिचौलियों को बेचना पड़ता था । पुल बनने से किसान अपनी ताजी सब्जियां सीधे पटना और समस्तीपुर की मंडियों में ले जा सकेंगे । वहीं, क्षेत्र के छात्र अब उच्च शिक्षा के लिए बिना किसी डर के शहर जा सकेंगे। गंगा के कटाव के कारण अपनी जमीन छोड़ चुके हजारों विस्थापित परिवारों में भी अब अपनी जड़ों की ओर लौटने की उम्मीद जगी है ।
प्रशासनिक सक्रियता और भविष्य की योजना
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी ‘प्रगति यात्रा’ के दौरान इस क्षेत्र के विकास का जो वादा किया था, यह पुल उसी का हिस्सा है । केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय और स्थानीय विधायक राजेश कुमार सिंह के प्रयासों से इस परियोजना ने धरातल पर रूप लेना शुरू किया है। अधिकारियों के अनुसार, निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है और अप्रैल 2026 तक इस पुल पर वाहनों का परिचालन शुरू होने की पूरी संभावना है ।
चुनौतियां और सावधानी
चूंकि यह एक पीपा पुल है, इसलिए इसकी कुछ सीमाएं भी हैं। मानसून के दौरान जब गंगा का जलस्तर बढ़ता है, तो सुरक्षा के लिहाज से इसे खोल दिया जाता है । हालांकि, प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया है कि बारिश का मौसम खत्म होते ही इसे तुरंत फिर से स्थापित किया जाए ताकि लोगों को लंबे समय तक परेशानी न हो ।
समस्तीपुर रसलपुर हरदासपुर पीपा पुल
रसलपुर-हरदासपुर पीपा पुल महज एक निर्माण कार्य नहीं है, बल्कि यह उस भरोसे का प्रतीक है कि विकास की किरण नदी के आखिरी छोर पर बसे व्यक्ति तक भी पहुँच सकती है। जब 2026 की गर्मियों में पहली बार गाड़ियाँ इस पुल पर दौड़ेंगी, तो वह समस्तीपुर के इतिहास में एक नए युग की शुरुआत होगी ।


















