उत्तर बिहार के सीमांचल और मिथिलांचल के लोगों के लिए रेल की सीटी सिर्फ एक आवाज नहीं, बल्कि तरक्की की धड़कन है। दशकों के लंबे इंतजार और कई पीढ़ियों के सपनों के बाद, अब वह समय करीब आ गया है जब देश की सबसे प्रीमियम ट्रेन ‘राजधानी एक्सप्रेस’ इस क्षेत्र की पटरियों पर दौड़ती नजर आएगी। सिलीगुड़ी, फारबिसगंज और दरभंगा के रास्ते राजधानी एक्सप्रेस चलाने की योजना न केवल यातायात को सुगम बनाएगी, बल्कि इस पिछड़े इलाके की किस्मत भी बदल देगी।

आजादी के 78 साल बाद का ऐतिहासिक पल
सीमांचल के लोगों के लिए 15 सितंबर 2025 का दिन किसी उत्सव से कम नहीं था। इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अररिया-गलगलिया (ठाकुरगंज) के बीच नवनिर्मित 110.75 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का उद्घाटन किया। आजादी के 78 साल बाद इस क्षेत्र को सीधे राष्ट्रीय ग्रिड से जोड़ना एक ऐसी उपलब्धि है, जिसने स्थानीय लोगों की आंखों में खुशी के आंसू ला दिए। यह नया रेलखंड न केवल दिल्ली की दूरी कम करेगा, बल्कि सामरिक रूप से संवेदनशील ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर के लिए एक मजबूत विकल्प भी प्रदान करेगा ।
2026: कोसी और सीमांचल को राजधानी की सौगात
साल 2026 इस क्षेत्र के लिए खुशियों की नई सौगात लेकर आ सकता है। सांसद दिलेश्वर कामत के अनुसार, यदि सब कुछ तय योजना के अनुसार रहा, तो गुवाहाटी से नई दिल्ली के बीच चलने वाली राजधानी एक्सप्रेस सरायगढ़ जंक्शन के रास्ते चलाई जाएगी। इसके लिए ललितग्राम बाईपास और बैजनाथपुर-झाझा बाईपास का निर्माण कार्य अपने अंतिम चरण में है, जो 2026 तक पूरा होने की पूरी संभावना है।
जैसे ही ये बाईपास चालू होंगे, राजधानी जैसी प्रीमियम ट्रेनों के लिए रास्ता साफ हो जाएगा। अब सहरसा, सुपौल और अररिया के यात्रियों को दिल्ली जाने के लिए पटना या कटिहार जैसे बड़े स्टेशनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। इससे समय और पैसा दोनों बचेगा।
दूरी में कटौती: लक्ष्मीपुर-फारबिसगंज नया रेल लिंक
रेलवे ने इस रूट को और भी बेहतर बनाने के लिए 17.60 किलोमीटर लंबे एक नए रेल लिंक का सर्वे पूरा कर लिया है। यह लिंक लक्ष्मीपुर स्टेशन को सीधे फारबिसगंज से जोड़ेगा। इस छोटे से जुड़ाव से फारबिसगंज और सिलीगुड़ी के बीच की दूरी लगभग 38 किलोमीटर कम हो जाएगी। उत्तर भारत और नेपाल सीमा से आने वाली ट्रेनों को अब अररिया होकर नहीं घूमना पड़ेगा, जिससे परिचालन लागत में भी भारी कमी आएगी।
सुविधाओं का विस्तार और सामाजिक-आर्थिक बदलाव
इस नए रेल कॉरिडोर के तैयार होने से केवल यात्रा आसान नहीं होगी, बल्कि व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव आएंगे।
- स्थानीय व्यापार: फारबिसगंज और अररिया के व्यापारियों के लिए गुवाहाटी और दिल्ली के बाजारों तक पहुंच आसान हो जाएगी।
- छात्रों को राहत: उच्च शिक्षा के लिए बाहर जाने वाले छात्रों को अब सुरक्षित और तेज प्रीमियम सेवा मिलेगी।
- पर्यटन: इस रूट से नेपाल के साथ सीमावर्ती क्षेत्रों में पर्यटन को भी नई संजीवनी मिलेगी ।
वर्तमान में, इस रेलखंड पर कई विशेष ट्रेनें और डीएमयू सेवाएं पहले ही शुरू की जा चुकी हैं, जैसे कटिहार-सिलीगुड़ी डीएमयू और कई ‘पूजा स्पेशल’ ट्रेनें। दरभंगा से फारबिसगंज के बीच चलने वाली ट्रेनों ने मिथिलांचल को सीमांचल के और करीब ला दिया है।
तकनीकी मजबूती और भविष्य की तैयारी
भारतीय रेलवे इस मार्ग पर 100 से 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चलाने के लिए ट्रैक को तैयार कर रहा है। अररिया-ठाकुरगंज सेक्शन में सुचारू बिजली आपूर्ति के लिए 132 kV की ट्रांसमिशन लाइन भी चालू कर दी गई है। इसके अलावा, सकरी-झंझारपुर-फारबिसगंज रेलखंड के दोहरीकरण (Doubling) के लिए सर्वे को भी मंजूरी मिल चुकी है ।
सिलीगुड़ी-फारबिसगंज-दरभंगा राजधानी एक्सप्रेस
सिलीगुड़ी-फारबिसगंज-दरभंगा मार्ग पर राजधानी एक्सप्रेस का सपना अब हकीकत बनने की राह पर है। यह परियोजना केवल पटरियों का बिछना नहीं है, बल्कि उत्तर बिहार के लाखों लोगों के स्वाभिमान और विकास का प्रतीक है। 2026 के अंत तक, जब राजधानी एक्सप्रेस सरायगढ़ और फारबिसगंज के स्टेशनों से गुजरेगी, तो वह अपने साथ इस क्षेत्र के लिए समृद्धि का एक नया अध्याय भी लेकर आएगी।

















