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राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय: अब हर बच्चे की जेब में होगा किताबों का अद्भुत संसार

आज के इस डिजिटल युग में जहाँ हर जानकारी बस एक क्लिक की दूरी पर है, भारत सरकार ने बच्चों और युवाओं के लिए एक बेहद ही खास सौगात पेश की है। इसका नाम है—राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय (Rashtriya e-Pustakalaya)। यह सिर्फ एक डिजिटल लाइब्रेरी नहीं है, बल्कि देश के भविष्य यानी हमारे बच्चों के लिए ज्ञान, कहानियों और कल्पनाओं का एक ऐसा समंदर है, जिसकी कोई सीमा नहीं है।

10 फरवरी 2024 को केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा लॉन्च की गई यह पहल, भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के सपनों को धरातल पर उतारने जैसा है । आइए जानते हैं कि यह डिजिटल लाइब्रेरी कैसे हमारे पढ़ने के अंदाज़ को बदल रही है।

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ज्ञान का विशाल भंडार: 22 भाषाएँ और 6500+ पुस्तकें

राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय की सबसे बड़ी खूबसूरती इसकी भाषाई विविधता है। इस प्लेटफॉर्म पर भारत की 22 आधिकारिक भाषाओं और अंग्रेजी में उच्च गुणवत्ता वाला साहित्य उपलब्ध है । वर्तमान में, यहाँ 200 से अधिक प्रतिष्ठित प्रकाशकों की 6500 से अधिक पुस्तकें शामिल की जा चुकी हैं ।   

चाहे आप उत्तर भारत की हिंदी और पंजाबी पसंद करते हों, या दक्षिण की तमिल, तेलुगु और कन्नड़, या फिर पूर्वोत्तर की असमिया और मणिपुरी—यह लाइब्रेरी हर बच्चे को उसकी मातृभाषा में कहानियों का लुत्फ उठाने का मौका देती है ।

हर उम्र के लिए कुछ खास (NEP 2020 के अनुसार)

इस लाइब्रेरी को बहुत ही सोच-समझकर चार अलग-अलग आयु वर्गों में बांटा गया है, ताकि हर बच्चे को उसकी समझ के हिसाब से सही किताब मिले :   

  1. 3 से 8 वर्ष (बुनियादी चरण): रंग-बिरंगी चित्र कथाएँ और बालगीत।
  2. 8 से 11 वर्ष (प्रारंभिक चरण): जादुई कहानियाँ, लोक कथाएँ और रहस्य।
  3. 11 से 14 वर्ष (मध्य चरण): विज्ञान कथाएँ, महापुरुषों की जीवनियाँ और ऐतिहासिक लेख।
  4. 14 वर्ष से अधिक (माध्यमिक चरण): क्लासिक्स, आत्म-सहायता (Self-help) और गंभीर साहित्य।

खास फीचर्स जो इसे बनाते हैं ‘स्मार्ट लाइब्रेरी’

राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि सीखने का अनुभव देने के लिए बनाया गया है। इसके ऐप में कई ऐसे फीचर्स हैं जो इसे बच्चों का पसंदीदा बनाते हैं :

  • टेक्स्ट-टू-स्पीच (Text-to-Speech): अब किताबें खुद बोलकर सुनाएंगी, जो भाषा सीखने में बहुत मददगार है।
  • ऑफलाइन रीडिंग: एक बार किताब डाउनलोड करें और फिर बिना इंटरनेट के कहीं भी पढ़ें ।   
  • फन रिवार्ड्स और बैज: जैसे-जैसे बच्चा ज्यादा पढ़ता है, उसे मजेदार बैज और पॉइंट्स मिलते हैं, जो उनमें पढ़ने की स्वस्थ आदत विकसित करते हैं ।
  • पर्सनलाइजेशन: आप अपनी पसंद के अनुसार फॉन्ट का साइज़ बदल सकते हैं, नोट्स बना सकते हैं और पसंदीदा अंशों को बुकमार्क कर सकते हैं ।

रजिस्ट्रेशन कैसे करें?

इस लाइब्रेरी का लाभ उठाना बहुत आसान है। आप इसे वेब पोर्टल (ndl.education.gov.in) या इसके एंड्रॉइड और आईओएस ऐप के ज़रिए इस्तेमाल कर सकते हैं :

  1. ऐप डाउनलोड करें: गूगल प्ले स्टोर या ऐप स्टोर से ‘Rashtriya e-Pustakalaya’ सर्च करके इंस्टॉल करें ।
  2. अकाउंट बनाएं: ‘Create Account’ पर क्लिक करें और अपना ईमेल या मोबाइल नंबर डालें। ओटीपी (OTP) से वेरिफिकेशन करें ।   
  3. विवरण भरें: अपना राज्य, जिला और अपने स्कूल का नाम चुनें ।   
  4. पढ़ना शुरू करें: बस! अब आप अपनी पसंदीदा किताब चुनकर उसे डाउनलोड कर सकते हैं और पढ़ना शुरू कर सकते हैं 。   

भविष्य का विजन: 100+ भाषाएँ और 10,000+ पुस्तकें

भारत सरकार का लक्ष्य इस लाइब्रेरी को और भी विशाल बनाना है। आने वाले 2-3 सालों में यहाँ 100 से अधिक भाषाओं में 10,000 से ज्यादा किताबें उपलब्ध कराने की योजना है । इसके अलावा, दिव्यांग छात्रों के लिए भी इसे ‘सुगम्य पुस्तकालय’ और ‘भारती ब्रेल’ जैसी सुविधाओं के माध्यम से पूरी तरह सुलभ बनाया जा रहा है ।

एक भारत, श्रेष्ठ भारत की झलक

यह लाइब्रेरी सरकारी (जैसे NCERT, NBT) और निजी (जैसे अमर चित्र कथा) दोनों क्षेत्रों के प्रकाशकों का एक शानदार संगम है । यहाँ सिर्फ कहानियाँ ही नहीं, बल्कि देशभक्ति, सांस्कृतिक गर्व और सहानुभूति की भावना जगाने वाला साहित्य भी है, जो ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के विचार को पुख्ता करता है ।   

राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय देश के हर बच्चे को समान अवसर प्रदान करने की एक क्रांतिकारी कोशिश है। अब चाहे बच्चा शहर में हो या किसी दूर-दराज के गांव में, अच्छी किताबें उससे बस एक टच की दूरी पर हैं। तो देर किस बात की? आज ही अपने बच्चे के लिए यह ऐप डाउनलोड करें और उन्हें कहानियों की उस दुनिया में ले जाएं, जहाँ ज्ञान का कभी अंत नहीं होता।

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