मुजफ्फरपुर को उत्तर बिहार की ‘आर्थिक राजधानी’ कहा जाता है, लेकिन पिछले चार दशकों से यहाँ के लोगों के लिए हवाई सफर एक अधूरा सपना बना हुआ था। साल 1982 के बाद से बंद पड़े पताही एयरपोर्ट (Patahi Airport) के रनवे पर अब एक बार फिर विमानों की गड़गड़ाहट सुनाई देने वाली है। केंद्र की ‘उड़ान’ (UDAN) योजना के तहत इस हवाई अड्डे का कायाकल्प शुरू हो चुका है, जो न केवल तिरहुत प्रमंडल के 2 करोड़ लोगों की यात्रा आसान करेगा, बल्कि यहाँ के किसानों और व्यापारियों की किस्मत भी बदल देगा।

इंदिरा गांधी के दौर से 2026 तक
पताही एयरपोर्ट का इतिहास काफी पुराना है। इसे मूल रूप से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आगमन की सुविधा के लिए विकसित किया गया था। साल 1967 से 1982 के बीच यहाँ से पटना के लिए नियमित उड़ानें संचालित होती थीं। लेकिन उसके बाद यह मैदान चुनावी रैलियों और सभाओं का केंद्र बनकर रह गया। अब, 40 साल से भी अधिक समय के बाद, इस हवाई अड्डे को फिर से जीवंत किया जा रहा है।
निर्माण कार्य और बजट: मुजफ्फरपुर पताही एयरपोर्ट
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने मुजफ्फरपुर एयरपोर्ट के विकास के लिए ₹28.58 करोड़ का टेंडर जारी किया है। इस प्रोजेक्ट की सबसे खास बात इसकी निर्माण तकनीक है:
- प्री-फैब्रिकेटेड ढांचा: यहाँ एक आधुनिक टर्मिनल बिल्डिंग बनाई जाएगी, जिसका क्षेत्रफल 1,250 वर्ग मीटर होगा। इसे स्टील के प्री-फैब्रिकेटेड स्ट्रक्चर से तैयार किया जाएगा ताकि निर्माण कार्य तेजी से पूरा हो सके।
- समय सीमा: टेंडर की शर्तों के अनुसार, निर्माण एजेंसी को 11 महीने (करीब 330 दिन) के भीतर काम पूरा करना होगा।
- बुनियादी ढांचा: प्रोजेक्ट में एक प्री-इंजीनियर्ड एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) टावर, फायर स्टेशन और दो पार्किंग बे वाले नए एप्रन का निर्माण शामिल है।
- कोड-2B विमान: शुरुआत में इसे 19-सीटर (Code-2B) विमानों के संचालन के लिए तैयार किया जा रहा है, जिसके लिए मौजूदा 99.4 एकड़ भूमि पर्याप्त है और किसी अतिरिक्त भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं है।
लीची व्यापार और आर्थिक क्रांति
मुजफ्फरपुर की पहचान यहाँ की ‘शाही लीची’ (GI Tag) से है। इसकी मिठास दुनिया भर में मशहूर है, लेकिन कम शेल्फ-लाइफ के कारण यह फल दूर के बाजारों तक नहीं पहुँच पाता था।
- कार्गो सुविधा: पताही एयरपोर्ट के शुरू होने से ‘कृषि उड़ान’ योजना के तहत लीची को सीधे दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे महानगरों में भेजा जा सकेगा।
- दरभंगा का उदाहरण: साल 2025 में दरभंगा एयरपोर्ट से रिकॉर्ड 250 टन लीची का निर्यात हुआ। मुजफ्फरपुर एयरपोर्ट के शुरू होने से यह क्षमता और बढ़ेगी, जिससे किसानों को उनकी फसल का दोगुना दाम मिल सकेगा।
मुजफ्फरपुर पताही एयरपोर्ट की उड़ानों का रूट और एयरलाइंस का प्लान
‘स्पिरिट एयर’ (Spirit Air) ने बिहार के लिए अपने ऑपरेशनल प्लान में मुजफ्फरपुर को प्रमुख स्थान दिया है। उड़ानों की योजना दो चरणों में है:
- पहला चरण: मुजफ्फरपुर को वाराणसी और बेंगलुरु जैसे शहरों से जोड़ा जाएगा। वाराणसी के जरिए यात्री दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट्स ले सकेंगे।
- दूसरा चरण: भविष्य में मुजफ्फरपुर से नेपाल के काठमांडू और जनकपुर के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करने की भी योजना है।
यहाँ संचालन के लिए विशेष रूप से ‘Islander BN2T-4S-STOL’ और ‘King Air 250’ जैसे विमानों का उपयोग किया जाएगा, जो छोटे रनवे पर उतरने में सक्षम हैं।
शिक्षा और प्रशिक्षण का नया केंद्र
पताही एयरपोर्ट सिर्फ एक ट्रांसपोर्ट हब नहीं, बल्कि शिक्षा का केंद्र भी बनेगा। बिहार सरकार ने यहाँ ‘बिहार फ्लाइंग इंस्टीट्यूट’ (BFI) का सैटेलाइट कैंपस खोलने की योजना बनाई है। इससे उत्तर बिहार के युवाओं के लिए पायलट ट्रेनिंग और विमानन इंजीनियरिंग (Aeronautical Engineering) के क्षेत्र में करियर बनाने के नए रास्ते खुलेंगे। पास ही स्थित मुजफ्फरपुर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के छात्रों के लिए भी यह एक बड़ा अवसर होगा।
मुजफ्फरपुर पताही एयरपोर्ट की चुनौतियां और भविष्य की राह
हालाँकि 19-सीटर विमानों के लिए जमीन की समस्या नहीं है, लेकिन भविष्य में अगर 70-सीटर (ATR-72) विमान चलाने हैं, तो करीब 228 से 318 एकड़ अतिरिक्त भूमि की आवश्यकता होगी। इसके लिए भूमि अधिग्रहण एक बड़ी चुनौती हो सकती है। वर्तमान में प्रशासन का पूरा ध्यान रनवे के नवीनीकरण और बुनियादी सुरक्षा मानकों (OLS Survey) को पूरा करने पर है।
मुजफ्फरपुर एयरपोर्ट का विकास सिर्फ ईंट और कंक्रीट का निर्माण नहीं है, बल्कि यह उत्तर बिहार के आत्म-सम्मान और विकास की नई उड़ान है। जब यहाँ से पहला विमान उड़ेगा, तो वह अपने साथ मुजफ्फरपुर की लीची की खुशबू और यहाँ के लोगों की उम्मीदों को भी आसमान तक ले जाएगा।
















