बिहार की राजधानी पटना में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा जा रहा है। वर्षों से बिहार के लोगों के लिए उम्मीद का केंद्र रहा पटना मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (PMCH) अब एक नई पहचान के साथ दुनिया के नक्शे पर उभर रहा है। ₹5,540 करोड़ से अधिक की लागत से बन रहा यह प्रोजेक्ट न केवल बिहार बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व की बात है, क्योंकि पूरा होने के बाद यह बेड क्षमता के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल बन जाएगा।
एक सदी पुराना गौरव और नया संकल्प
PMCH की नींव 1925 में ‘प्रिंस ऑफ वेल्स मेडिकल कॉलेज’ के रूप में रखी गई थी। साल 2025 में इस महान संस्थान ने अपनी सेवा के 100 वर्ष पूरे किए हैं। इस शताब्दी समारोह के अवसर पर अस्पताल परिसर में एक 22 फीट ऊंचा शताब्दी स्मारक भी स्थापित किया गया है, जो इसके गौरवशाली इतिहास का प्रतीक है। आज, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में इस पुराने संस्थान को एक अत्याधुनिक ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ में बदला जा रहा है।
पटना PMCH :विशाल क्षमता और वैश्विक रैंकिंग
इस पुनर्विकास परियोजना का मुख्य लक्ष्य PMCH की बेड क्षमता को वर्तमान से बढ़ाकर 5,462 बेड करना है। वर्तमान में चीन का झेंग्झौ विश्वविद्यालय अस्पताल (Zhengzhou University Hospital) दुनिया का सबसे बड़ा अस्पताल माना जाता है, और उसके बाद पटना का PMCH दूसरे स्थान पर होगा। यह विस्तार न केवल बेड की संख्या बढ़ाएगा, बल्कि मरीजों को दिल्ली या मुंबई जैसे बड़े शहरों में जाने की मजबूरी से भी राहत दिलाएगा।
निर्माण के तीन चरण: अब तक की प्रगति
अस्पताल का पुनर्विकास तीन मुख्य चरणों में किया जा रहा है:
| चरण | बेड की संख्या | प्रमुख विशेषताएं |
| प्रथम चरण | 2,250 बेड | ट्विन टावर का निर्माण, 500 इमरजेंसी बेड, और 27 मॉड्यूलर ओटी। |
| द्वितीय चरण | 1,850 बेड | सुपर-स्पेशलिटी विभाग और आधुनिक प्रयोगशालाएं। |
| तृतीय चरण | 1,400 बेड | मेडिकल कॉलेज भवन, रिसर्च लैब्स और हॉस्टल। |
4 मई, 2025 को प्रथम चरण के तहत ‘ट्विन टावर्स’ (Tower 1 & 2) का उद्घाटन किया गया, जिसमें 1,117 आधुनिक बेड और उच्च-स्तरीय डायग्नोस्टिक सुविधाएं शामिल हैं। जनवरी 2026 की ताजा स्थिति के अनुसार, सुपर-स्पेशलिटी ब्लॉक का काम भी तेजी से चल रहा है और इसके फरवरी 2026 तक तैयार होने की उम्मीद है।
अत्याधुनिक सुविधाएं जो बदल देंगी तस्वीर
नया PMCH सिर्फ बेडों की संख्या नहीं, बल्कि सुविधाओं के मामले में भी विश्वस्तरीय होगा:
- एयर एम्बुलेंस सुविधा: अस्पताल के टावरों की छत (10वीं मंजिल) पर हेलीपैड बनाया गया है। इससे दूर-दराज के गंभीर मरीजों को सीधे एयर एम्बुलेंस से आईसीयू (ICU) तक लाया जा सकेगा।
- सुपर-स्पेशलिटी विभाग: यहाँ सुपर-स्पेशलिटी विभागों की संख्या 8 से बढ़ाकर 36 की जा रही है, जिसमें नेफ्रोलॉजी, न्यूरोलॉजी और यूरोलॉजी जैसे विभाग शामिल हैं।
- कनेक्टिविटी का संगम: मरीजों की सुविधा के लिए अस्पताल को सीधे ‘जेनपी गंगा पथ’ (मरीन ड्राइव) और अशोक राजपथ पर बन रहे डबल-डेकर फ्लाईओवर से जोड़ा गया है। इसके अलावा, पटना मेट्रो का एक स्टेशन सीधे कैंपस के अंदर होगा।
पटना PMCH : मरीजों के लिए क्या बदलेगा?
बिहार में लंबे समय से बेडों की कमी और इलाज के लिए दूसरे राज्यों में पलायन एक बड़ी समस्या रही है। PMCH का यह नया स्वरूप इस समस्या का समाधान बनेगा। यहाँ न केवल बिहार, बल्कि झारखंड और नेपाल से आने वाले लाखों मरीजों को भी सस्ता और विश्वस्तरीय इलाज मिल सकेगा। ₹764 करोड़ से अधिक के आधुनिक चिकित्सा उपकरण खरीदे जा रहे हैं, ताकि जाँच और सर्जरी के लिए मरीजों को भटकना न पड़े।
पटना का PMCH अब केवल एक अस्पताल नहीं, बल्कि बिहार के बदलते भविष्य और मजबूत इरादों की कहानी कह रहा है। जब 2027-28 तक यह पूरी तरह बनकर तैयार होगा, तो यह स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक वैश्विक मिसाल होगा। बिहार के आम आदमी के लिए यह उम्मीद की एक ऐसी किरण है, जहाँ उसे अपने घर के पास ही सबसे बेहतर इलाज मिल सकेगा।















