Mobile Only Menu
  • Home
  • शिक्षा
  • बिहार परीक्षा टेंडर विवाद: 200 केंद्र बंद, 5000 बेरोजगार और BSSC चेयरमैन का इस्तीफा—क्या है पूरा सच?
Image

बिहार परीक्षा टेंडर विवाद: 200 केंद्र बंद, 5000 बेरोजगार और BSSC चेयरमैन का इस्तीफा—क्या है पूरा सच?

बिहार में सरकारी नौकरियों की परीक्षा प्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। पटना में 11 जनवरी 2026 को ‘बिहार ऑनलाइन एग्जामिनेशन सेंटर एसोसिएशन’ की बैठक में जो खुलासे हुए, उन्होंने न केवल प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य को भी अधर में लटका दिया है। यह विवाद केवल एक टेंडर का नहीं है, बल्कि यह कहानी है उन 5,000 कर्मचारियों की जिनकी रोजी-रोटी रातों-रात छिन गई और उस सिस्टम की, जहाँ पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के बीच की जंग सड़कों पर आ गई है।

बिहार परीक्षा टेंडर विवाद

मुख्य मुद्दा: बिहार के 200 स्थानीय परीक्षा केंद्रों को नजरअंदाज कर बाहरी कंपनी को टेंडर देना।

प्रभावित लोग: 5,000 से अधिक तकनीकी कर्मचारी, ऑपरेटर और सुरक्षा गार्ड बेरोजगार।

विवादित कंपनी: ‘इनोवेटिव व्यू’ (Innovative View), जिसे झारखंड में ब्लैकलिस्टेड बताया जा रहा है।

प्रशासनिक हलचल: BSSC अध्यक्ष आलोक राज का पद संभालने के मात्र 6 दिन बाद इस्तीफा।


सिस्टम और सिंडिकेट आमने-सामने आए

पटना ग्रामीण क्षेत्र में आयोजित एसोसिएशन की बैठक में संचालकों का दर्द और गुस्सा साफ दिखाई दिया। एसोसिएशन का आरोप है कि बिहार में 200 से अधिक सक्षम और आधुनिक ऑनलाइन परीक्षा केंद्र होने के बावजूद, बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) और SSC ने स्थानीय उद्यमियों को दरकिनार कर दिया। बिना किसी पूर्व सूचना या कारण के इन केंद्रों को बंद कर दिया गया, जिससे राज्य भर में फैले डिजिटल बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचा है।

5,000 परिवारों पर रोजी-रोटी का संकट

एसोसिएशन के अनुसार, ये 200 परीक्षा केंद्र केवल इमारतें नहीं थीं, बल्कि हजारों युवाओं के रोजगार का जरिया थीं। इनमें काम करने वाले आईटी एक्सपर्ट्स, डेटा एंट्री ऑपरेटर और सुरक्षा कर्मियों समेत लगभग 5,000 लोग अचानक सड़क पर आ गए हैं। स्थानीय संचालकों का कहना है कि उन्होंने इन केंद्रों को खड़ा करने के लिए लाखों का निवेश किया था, लेकिन सरकार ने एक झटके में बाहरी कंपनी को तरजीह देकर उनके निवेश को मिट्टी में मिला दिया।

‘इनोवेटिव व्यू’ और झारखंड कनेक्शन: क्या है सच?

विवाद की सबसे बड़ी कड़ी है ‘इनोवेटिव व्यू’ (Innovatiview) कंपनी। एसोसिएशन ने गंभीर आरोप लगाया कि जिस कंपनी को बिहार की महत्वपूर्ण परीक्षाओं का जिम्मा सौंपा गया है, उसे झारखंड में अनियमितताओं के कारण ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है। कंपनी के प्रमोटर आशीष मित्तल का नाम पहले भी कई विवादों में उछला है। संचालकों का सवाल सीधा है—जब राज्य के पास अपना बुनियादी ढांचा मौजूद है, तो एक दागदार ट्रैक रिकॉर्ड वाली कंपनी को करोड़ों का टेंडर क्यों दिया गया?

आलोक राज का इस्तीफा: ईमानदारी पर भारी पड़ा ‘सिंडिकेट’?

इस पूरे विवाद के बीच, 6 जनवरी 2026 को BSSC के अध्यक्ष और पूर्व डीजीपी आलोक राज का अचानक इस्तीफा देना सबसे बड़ी गुत्थी बन गया है। 1989 बैच के ईमानदार अधिकारी आलोक राज ने 1 जनवरी को ही कार्यभार संभाला था। छात्र नेताओं और दिलीप कुमार जैसे एक्टिविस्ट्स का दावा है कि आयोग के भीतर एक ‘पावरफुल सिंडिकेट’ काम कर रहा है। आरोप है कि आलोक राज पर एक खास ब्लैकलिस्टेड एजेंसी के जरिए ऑनलाइन परीक्षा कराने का दबाव बनाया जा रहा था, जिसके आगे झुकने के बजाय उन्होंने इस्तीफा देना बेहतर समझा।

सुरक्षा और पेपर लीक का डर

बिहार में हाल ही में हुए पूर्णिया डिजिटल परीक्षा केंद्र कांड और CHO भर्ती परीक्षा के पेपर लीक ने पहले ही छात्रों का भरोसा डिगा दिया है। पूर्णिया में तो जालसाजों ने बगल की बिल्डिंग से फर्जी केबल बिछाकर पूरा सिस्टम ही हैक कर लिया था। ऐसे में, जब स्थानीय केंद्रों के बजाय किसी ऐसी बाहरी कंपनी को ठेका मिलता है जिसकी विश्वसनीयता संदिग्ध हो, तो आगामी ‘इंटर-स्तरीय’ और ‘CGL-4’ जैसी बड़ी परीक्षाओं की शुचिता पर सवाल उठना लाजिमी है।

नया कानून और विरोधाभास

एक तरफ बिहार सरकार ने जनवरी 2026 में ही ‘बिहार सार्वजनिक परीक्षा विधेयक 2024’ पारित किया है, जिसमें पेपर लीक करने वाली एजेंसियों पर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना और संपत्ति कुर्की जैसे कड़े प्रावधान हैं। लेकिन दूसरी तरफ, स्थानीय सेंटर्स को बंद कर विवादित कंपनियों को काम सौंपना इस कानून की मंशा पर विरोधाभास पैदा करता है।

बिहार के युवाओं के लिए एक अदद नौकरी केवल करियर नहीं, बल्कि पूरे परिवार की उम्मीद होती है। ‘बिहार ऑनलाइन एग्जामिनेशन सेंटर एसोसिएशन’ की मांग है कि टेंडर प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच हो और स्थानीय केंद्रों को दोबारा मौका दिया जाए। यदि सरकार ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह मामला केवल प्रशासनिक विवाद न रहकर एक बड़ा जन-आंदोलन बन सकता है।

Releated Posts

BPSC TRE 4.0 Notification 2026: बिहार में 32,388 पदों पर बंपर शिक्षक भर्ती, यहाँ देखें आवेदन प्रक्रिया और महत्वपूर्ण तिथियां

बिहार में सरकारी शिक्षक बनने का सपना देख रहे लाखों युवाओं के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। बिहार…

ByByManvinder Mishra Aug 19, 2026

Bihar Polytechnic (DCECE) 2026: ऑनलाइन आवेदन शुरू, 21 अप्रैल तक है मौका; यहाँ जानें पूरी प्रक्रिया

अगर आप बिहार के सरकारी या प्राइवेट संस्थानों से पॉलिटेक्निक इंजीनियरिंग या पैरामेडिकल कोर्स करना चाहते हैं, तो…

ByByPrachi Singh Mar 21, 2026

UPSC Social Media Advisory 2026: सिविल सेवा उम्मीदवारों के लिए नई गाइडलाइंस और सख्त नियम

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने मार्च 2026 में सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2025 के सफल उम्मीदवारों के…

ByByPrachi Singh Mar 18, 2026

बिहार में लाखों छात्रों को क्यों नहीं मिल रहे ‘आपार कार्ड’? जानिए इसकी वजह और समाधान

बिहार में शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल बनाने के लिए केंद्र सरकार की ‘वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी’ (APAAR)…

ByByManvinder Mishra Mar 17, 2026

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top