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A wide, high-quality 4-lane national highway in Bihar, India (NH-22) with lush green fruit-bearing trees on both sides. A scenic 'Dada Ka Dalan' traditional rest stop with modern amenities. Clear blue sky, high-speed cars moving smoothly, and local farmers tending to roadside plantations. Professional architectural photography style, daylight, vibrant greenery."

पटना-गया-डोभी NH-22: बिहार का पहला ‘लश ग्रीन कॉरिडोर’ – सफर भी और कमाई भी!

बिहार की सड़कों की सूरत अब तेजी से बदल रही है। राजधानी पटना से गया होते हुए डोभी तक जाने वाला पटना-गया-डोभी ग्रीन कॉरिडोर (NH-22) इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। यह सिर्फ एक सड़क नहीं है, बल्कि इंजीनियरिंग और प्रकृति के मेल का एक ऐसा मॉडल है जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय लोगों की कमाई का जरिया भी बन रहा है। 127.2 किलोमीटर लंबा यह नेशनल हाईवे अब बिहार के विकास की नई पहचान बन चुका है ।

A wide, high-quality 4-lane national highway in Bihar, India (NH-22) with lush green fruit-bearing trees on both sides. A scenic 'Dada Ka Dalan' traditional rest stop with modern amenities. Clear blue sky, high-speed cars moving smoothly, and local farmers tending to roadside plantations. Professional architectural photography style, daylight, vibrant greenery."
AI Image

सफर का समय हुआ आधा

पहले पटना से गया जाने में लगभग 3.5 घंटे से अधिक का समय लगता था, लेकिन इस फोरलेन सड़क के पूरी तरह तैयार होने के बाद अब यह दूरी महज 1.5 से 2 घंटे में तय की जा रही है । यह हाईवे न केवल पटना को दक्षिण बिहार से जोड़ता है, बल्कि यह बौद्ध सर्किट का मुख्य हिस्सा भी है, जो बोधगया और नालंदा जैसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थलों को सीधा रास्ता देता है । 30 मई 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्घाटन किया था, जो बिहार की कनेक्टिविटी के लिए एक ऐतिहासिक पल था

50,000 फलदार वृक्षों की हरियाली

इस कॉरिडोर की सबसे खास बात इसकी ‘हरियाली’ है। बिहार सरकार ने इसे एक ‘पायलट प्रोजेक्ट’ के रूप में चुना है, जहाँ सड़क के दोनों किनारों पर 50,000 से अधिक पेड़ लगाए गए हैं । यहाँ एक खास पैटर्न अपनाया गया है: हर 5 किलोमीटर पर एक ही किस्म के फलदार पेड़ लगाए गए हैं

इन पेड़ों में शामिल हैं:

  • आम, अमरूद और जामुन
  • लीची, कटहल और आँवला
  • बेल, नींबू और सहजन (ड्रूमस्टिक)
  • पर्यावरण संतुलन के लिए नीम, बरगद और पीपल

‘कम्युनिटी फार्मिंग’ से किसानों की आय में वृद्धि

यह प्रोजेक्ट केवल सरकार का नहीं, बल्कि यहाँ के किसानों का भी है। इसे ‘कम्युनिटी फार्मिंग’ मॉडल पर विकसित किया गया है, जहाँ पेड़ों की देखभाल की जिम्मेदारी स्थानीय किसानों और ग्राम पंचायतों को सौंपी गई है । इन पेड़ों से होने वाली फलों की पैदावार पर स्थानीय समुदाय का हक होगा। सड़क किनारे ही फल मिलने से किसानों की लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और वे सीधे बाजार तक अपनी उपज पहुँचा पाएंगे । इसके अलावा, सहजन के पेड़ों के माध्यम से शहद उत्पादन (मधुमक्खी पालन) को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिलेगी

‘दादा का दलान’ और पर्यटन सुविधाएं

लंबी यात्रा के दौरान यात्रियों के आराम के लिए हर 10 किलोमीटर पर ‘दादा का दलान’ नाम से रेस्ट स्टॉप बनाए गए हैं । इन केंद्रों पर यात्रियों को न केवल स्थानीय बिहार के व्यंजन और चाय-कॉफी मिलेगी, बल्कि यहाँ से उन्हें आसपास के पर्यटन स्थलों की जानकारी भी प्राप्त होगी । पर्यटकों के लिए खास ‘सेल्फी पॉइंट्स’ और पार्किंग की व्यवस्था भी की गई है ताकि वे अपनी यात्रा की खूबसूरत यादें संजो सकें

अत्याधुनिक बुनियादी ढाँचा

इस 127 किलोमीटर लंबे सफर को बाधा मुक्त बनाने के लिए भारी निवेश किया गया है। शुरुआत में इस प्रोजेक्ट की लागत लगभग 2,015 करोड़ रुपये थी, जो समय के साथ बढ़कर 5,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गई । पूरे रूट पर यातायात को सुगम बनाने के लिए निम्नलिखित संरचनाएं बनाई गई हैं:

  • 8 बाईपास: जहानाबाद, गया, मखदुमपुर, बेला और चाकंद जैसे घने इलाकों से बचने के लिए ।
  • 4 फ्लाईओवर और 5 रेलवे ओवरब्रिज (ROBs): ताकि बिना किसी रुकावट के 100 किमी/घंटा की रफ्तार से गाड़ियाँ चल सकें 。
  • 20 अंडरपास: स्थानीय लोगों और मवेशियों की सुरक्षा के लिए 。

बिहार विजन 2027

जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी (JICA) के सहयोग से बना यह हाईवे बिहार के ‘विजन 2027’ का अहम हिस्सा है । इसका उद्देश्य यह है कि राज्य के किसी भी हिस्से से पटना 5 घंटे के भीतर पहुँचा जा सके। इस कॉरिडोर के किनारे अब बड़े औद्योगिक निवेश भी आ रहे हैं, जैसे कि गया-डोभी रोड पर प्रस्तावित 6,000 करोड़ रुपये का स्टील प्लांट ।

पटना-गया-डोभी ग्रीन कॉरिडोर यह साबित करता है कि विकास और पर्यावरण एक साथ चल सकते हैं। जहाँ एक तरफ यह यात्रियों के समय और ईंधन की बचत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ 50,000 पेड़ों की यह श्रृंखला कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद कर रही है । यदि आप गया या बोधगया जाने की योजना बना रहे हैं, तो यह ग्रीन कॉरिडोर आपकी यात्रा को यादगार बना देगा।

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