मार्च 2026 की एक शाम मुंबई के प्रतिष्ठित ताज महल पैलेस होटल में बिहार के लिए एक ऐतिहासिक पल लेकर आई। देश के सबसे प्रतिष्ठित खेल पुरस्कारों में से एक, ‘Sportstar Aces Awards 2026’ के आठवें संस्करण में बिहार को ‘बेस्ट स्टेट फॉर प्रमोशन ऑफ स्पोर्ट्स’ (खेलों को बढ़ावा देने के लिए सर्वश्रेष्ठ राज्य) के सम्मान से नवाजा गया।
क्रिकेट के दिग्गज सुनील गावस्कर की अध्यक्षता वाली जूरी, जिसमें अभिनव बिंद्रा और विश्वनाथन आनंद जैसी महान हस्तियां शामिल थीं, ने बिहार के पिछले तीन वर्षों के बदलाव को सराहा। यह पुरस्कार बिहार की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह और बिहार राज्य खेल प्राधिकरण (BSSA) के महानिदेशक रविंद्रन संकरण ने प्राप्त किया।

क्यों चुना गया बिहार को ‘बेस्ट स्टेट’?
कुछ साल पहले तक बिहार को खेलों के मामले में पिछड़ा माना जाता था, लेकिन 2023 के बाद राज्य ने अपनी नीतियों और बुनियादी ढांचे में जो बदलाव किए, उसने सबको चौंका दिया। जूरी ने बिहार को चुनने के पीछे कई मुख्य कारण बताए:
1. इन्फ्रास्ट्रक्चर: राजगीर बना खेल का नया हब
बिहार की इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा हाथ राजगीर स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का है। इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों पर बनाया गया है, जिसमें एक भव्य हॉकी स्टेडियम, क्रिकेट स्टेडियम और मल्टी-पर्पज इंडोर हॉल शामिल हैं। इसके अलावा, पटना के पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का आधुनिकीकरण और राज्य के हर जिले में ‘खेल भवन’ का निर्माण बिहार की गंभीर सोच को दर्शाता है।
2. ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना
खिलाड़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए बिहार सरकार की यह योजना गेम-चेंजर साबित हुई है। इस नीति के तहत, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को सीधे ‘ग्रुप ए’ और ‘ग्रुप बी’ की सरकारी नौकरियां दी जा रही हैं। साल 2024 में ही 71 खिलाड़ियों को विभिन्न सरकारी विभागों में सीधे नियुक्ति दी गई, जिससे एथलीटों का पलायन रुका है।
3. छात्रवृत्ति और वित्तीय सहायता
खिलाड़ियों की ट्रेनिंग और डाइट का खर्च उठाने के लिए सरकार ने तीन मुख्य योजनाएं शुरू की हैं:
- उड़ान योजना: अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के लिए ₹20 लाख तक की सालाना मदद।
- सक्षम योजना: राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के लिए ₹5 लाख तक की सहायता।
- प्रेरणा योजना: उभरती प्रतिभाओं के लिए ₹3 लाख तक की स्कॉलरशिप।
जमीनी स्तर पर प्रतिभा की खोज: ‘मशाल’ और ‘महासंग्राम’
बिहार ने सिर्फ शहरों तक खेलों को सीमित नहीं रखा। ‘मशाल’ (Mashaal) नामक प्रतिभा खोज अभियान के जरिए राज्य के सरकारी स्कूलों के लगभग 60 लाख छात्रों तक पहुँचने का लक्ष्य रखा गया। इसके साथ ही ‘बिहार स्पोर्ट्स महासंग्राम 2026’ के माध्यम से 10 से 16 साल के बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए एक बड़ा मंच दिया गया।
बड़े आयोजनों की सफल मेजबानी
बिहार की बढ़ती साख का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2025 में राज्य ने कई बड़े अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय टूर्नामेंट्स की सफल मेजबानी की:
- पुरुष हॉकी एशिया कप 2025: राजगीर में आयोजित इस टूर्नामेंट ने बिहार को वैश्विक हॉकी मानचित्र पर ला खड़ा किया।
- सेपक टकरा वर्ल्ड कप: पटना में आयोजित इस प्रतियोगिता में भारतीय टीम (जिसमें बिहार के कई खिलाड़ी थे) ने स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा।
- खेलो इंडिया यूथ गेम्स: बिहार ने इन खेलों के सातवें संस्करण की मेजबानी कर अपनी प्रबंधकीय क्षमता का लोहा मनवाया।
बजट और भविष्य का रोडमैप: मिशन 2030
बिहार सरकार ने 2025 के बजट में खेलों के लिए ₹600 करोड़ का भारी-भरकम प्रावधान किया। यह निवेश सिर्फ स्टेडियम बनाने के लिए नहीं, बल्कि स्पोर्ट्स साइंस, डेटा एनालिटिक्स और अत्याधुनिक कोचिंग के लिए भी है। राज्य सरकार का लक्ष्य ‘मिशन 2030’ के तहत बिहार को देश के टॉप-5 खेल राज्यों में शामिल करना है।
खेल मंत्री श्रेयसी सिंह, जो खुद एक कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडलिस्ट हैं, ने इस पुरस्कार को राज्य के हर उस खिलाड़ी को समर्पित किया जो अभावों के बावजूद मैदान में पसीना बहा रहा है।














