बिहार की राजधानी पटना इन दिनों अपनी जड़ों और संस्कृति के रंग में डूबी हुई है। पटना के गर्दनीबाग स्थित बापू टावर में आयोजित दो दिवसीय ‘मगही महोत्सव 2.0’ का समापन बेहद रोमांचक रहा। इस महोत्सव के सबसे मुख्य आकर्षण ‘मगही शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल’ में फिल्म ‘दोस्ती’ को प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया है।
‘मगही कनेक्शन’ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम ने न केवल भाषा को सम्मान दिया, बल्कि क्षेत्रीय सिनेमा की बढ़ती ताकत को भी दुनिया के सामने रखा। आइए जानते हैं इस फेस्टिवल की हर छोटी-बड़ी जानकारी।

‘दोस्ती’ ने क्यों जीता दिल?
फेस्टिवल के दूसरे दिन मगही लघु फिल्म प्रतियोगिता के परिणामों की घोषणा की गई। कुल 48 फिल्मों की प्रविष्टियों में से ‘दोस्ती’ को सर्वश्रेष्ठ चुना गया। इस फिल्म की कहानी ग्रामीण इलाकों में लड़कियों की शिक्षा और उनके संघर्ष पर आधारित है। फिल्म ने अपनी सादगी और मजबूत संदेश के जरिए दर्शकों और निर्णायक मंडल (ज्यूरी) दोनों को प्रभावित किया।
निर्णायक मंडल में बॉलीवुड के जाने-माने पटकथा लेखक शैबाल, ‘स्वाहा’ फिल्म के निर्देशक अभिलाष शर्मा और अभिनेता बुल्लू कुमार शामिल थे। उनकी पारखी नजरों ने ‘दोस्ती’ को मगही समाज का आईना माना।
विजेताओं की पूरी सूची (Magahi Film Festival Winners List)
फेस्टिवल में सामाजिक मुद्दों और रिश्तों पर आधारित कई शानदार फिल्में दिखाई गईं। विजेताओं की सूची इस प्रकार है:
| स्थान | फिल्म का नाम | विषय / थीम |
| प्रथम पुरस्कार | दोस्ती | ग्रामीण क्षेत्रों में बालिका शिक्षा |
| द्वितीय पुरस्कार | एक कप चाह | महिलाओं के जीवन और रिश्तों पर केंद्रित |
| तृतीय पुरस्कार | आशायें | भाई-बहन के भावनात्मक रिश्ते पर आधारित |
| प्रशंसा पुरस्कार | लॉस्ट, शहर से निमन गांव, बनकहि | सामाजिक और ग्रामीण परिवेश |
दिग्गज हस्तियों की मौजूदगी
महोत्सव का उद्घाटन बिहार विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने किया। उन्होंने इसे महज एक उत्सव नहीं बल्कि एक ‘सांस्कृतिक आंदोलन’ बताया। कार्यक्रम में पटना की मेयर सीता साहू और भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि (IAS) भी शामिल हुए। दिलचस्प बात यह रही कि आईएएस कुमार रवि ने अपना पूरा संबोधन मगही भाषा में दिया, जो नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक रहा।
बॉलीवुड अभिनेता अली खान ने भी शिरकत की और युवाओं को मगही सिनेमा से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि मगही भाषा की मिठास को बड़े पर्दे पर और अधिक लाने की जरूरत है।
मगही सिनेमा: 1900 से अब तक का सफर
फेस्टिवल के दौरान मगही फिल्मों के गौरवशाली इतिहास पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम का संचालन कर रहे निराला और फिल्म इतिहासकार प्रो. रविकांत ने बताया कि मगही में फिल्म निर्माण की जड़ें साल 1900 के आसपास से जुड़ी हैं।
- पहली मगही फिल्म: आधिकारिक तौर पर पहली मगही फिल्म ‘भैया’ साल 1961 में बनी थी।
- आधुनिक दौर: इसके बाद ‘देवन मिसिर’ और हालिया दौर की अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त फिल्म ‘स्वाहा’ ने इस भाषा को नई पहचान दी।
- डिजिटल भविष्य: प्रो. रविकांत ने जोर दिया कि एआई (AI) और डिजिटल युग में मगही कंटेंट को वैश्विक स्तर पर ले जाना अब आसान और जरूरी हो गया है।
संगीत और संस्कृति का संगम
महोत्सव की शुरुआत गया घराने की शास्त्रीय गायकी से हुई। पंडित सतीश शर्मा ने राग भैरवी और चैती गीतों से समां बांध दिया। वहीं प्रसिद्ध गायक राजन सिजुआर ने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया कि बिहार के हर प्रमंडल में ‘संगीत गुरुकुल’ खुलने चाहिए ताकि हमारी पारंपरिक गायकी जीवित रहे। उन्होंने हारमोनियम वादन की शैली विकसित करने वाले ‘सोनी जी’ के योगदान को भी याद किया।


















