बिहार ने ऊर्जा के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। कभी बिजली के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर रहने वाला यह राज्य अब ‘क्लीन एनर्जी’ (स्वच्छ ऊर्जा) का हब बन रहा है। लखीसराय जिले के कजरा में बना ‘सोलर-प्लस-बैटरी स्टोरेज प्रोजेक्ट’ न केवल बिहार के लिए, बल्कि पूरे भारत के लिए एक मिसाल है। राज्य सरकार के दावों के अनुसार, यह देश का सबसे बड़ा बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) वाला प्रोजेक्ट है।

क्या है कजरा सोलर-बैटरी प्रोजेक्ट?
लखीसराय के कजरा में करीब 1,232 एकड़ भूमि पर यह विशाल बिजली घर बनाया गया है। इस प्रोजेक्ट की खासियत यह है कि यह सिर्फ दिन में बिजली नहीं बनाता, बल्कि सूरज की रोशनी से बनने वाली अतिरिक्त बिजली को बड़ी-बड़ी बैटरियों में जमा कर लेता है। इसका फायदा यह होता है कि शाम ढलने के बाद, जब बिजली की मांग सबसे ज्यादा होती है, तब इन्ही बैटरियों से बिहार के घरों को रोशन किया जाता है।
दो चरणों में विकास: क्षमता और लागत
इस पूरे प्रोजेक्ट को बिहार स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (BSPGCL) द्वारा दो चरणों (Phases) में विकसित किया जा रहा है:
- पहला चरण (Phase 1): इसका काम पूरा हो चुका है और 26 फरवरी, 2026 से यहाँ व्यावसायिक उत्पादन (Commercial Generation) शुरू हो गया है। इसमें 185 मेगावाट (MW) का सोलर प्लांट और 282 मेगावाट-घंटे (MWh) का बैटरी बैंक लगाया गया है। इसे बनाने में करीब ₹1,810 करोड़ का खर्च आया है।
- दूसरा चरण (Phase 2): दूसरे चरण का काम तेजी से चल रहा है, जिसे जनवरी 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इसमें 116 MW सोलर क्षमता और 241 MWh का बैटरी स्टोरेज और जोड़ा जाएगा।
कुल क्षमता: जब दोनों चरण पूरे हो जाएंगे, तब कजरा प्लांट की कुल क्षमता 301 मेगावाट सोलर और 523 मेगावाट-घंटे बैटरी स्टोरेज हो जाएगी।
तकनीक जो इसे बनाती है खास
इस प्रोजेक्ट का निर्माण इंजीनियरिंग की दिग्गज कंपनी L&T (Larsen & Toubro) ने किया है। यहाँ इस्तेमाल की गई तकनीक विश्व स्तर की है:
- LiFePO4 बैटरियां: इसमें ‘लिथियम आयरन फॉस्फेट’ केमिस्ट्री वाली बैटरियों का इस्तेमाल किया गया है, जो बहुत सुरक्षित मानी जाती हैं।
- लिक्विड कूलिंग सिस्टम: बिहार की भीषण गर्मी को देखते हुए इन बैटरियों के लिए ‘लिक्विड कूलिंग’ वाले कंटेनर लगाए गए हैं, ताकि वे गर्म होकर खराब न हों।
- स्मार्ट ग्रिड इंटीग्रेशन: प्लांट से बिजली निकालने के लिए 132 KV की ट्रांसमिशन लाइन और 100 MVA का ट्रांसफार्मर लगाया गया है, जो सीधे ग्रिड से जुड़ा है।
बिहार के आम लोगों को क्या होगा फायदा?
कजरा प्रोजेक्ट सिर्फ एक मशीन नहीं है, बल्कि यह बिहार की बिजली व्यवस्था की रीढ़ बनने वाला है। इसके मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:
- शाम को भी मिलेगी सोलर बिजली: आमतौर पर सोलर प्लांट रात में काम नहीं करते, लेकिन यहाँ लगा बैटरी बैंक सूरज डूबने के बाद भी 4 से 5 घंटे तक लगातार बिजली की सप्लाई सुनिश्चित करेगा।
- सस्ती बिजली की राह: BSPGCL ने इस प्रोजेक्ट से करीब ₹4.3 प्रति यूनिट की दर से बिजली देने का प्रस्ताव रखा है, जो अन्य स्रोतों की तुलना में काफी प्रतिस्पर्धी है।
- ग्रिड की मजबूती: बैटरी स्टोरेज सिस्टम ग्रिड में होने वाले उतार-चढ़ाव (Fluctuations) को संभालता है, जिससे वोल्टेज की समस्या कम होती है और बिजली गुल होने (Outages) का खतरा कम हो जाता है।
- प्रदूषण में कमी: यह प्रोजेक्ट बिहार के कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में मदद करेगा और राज्य को अपने ‘रिन्यूएबल परचेज ऑब्लिगेशन’ (RPO) लक्ष्यों को पूरा करने में मदद देगा।
ऊर्जा मंत्री का दौरा और भविष्य की योजनाएं
हाल ही में 6 अप्रैल, 2026 को बिहार के ऊर्जा मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने कजरा साइट का दौरा किया। उन्होंने दूसरे चरण के काम में तेजी लाने के निर्देश दिए और अधिकारियों से कहा कि कजरा के आसपास की पहाड़ियों पर भी नए रिन्यूएबल प्रोजेक्ट्स की संभावना तलाशी जाए। साथ ही, उत्तर बिहार के जल निकायों (Ponds) पर फ्लोटिंग सोलर (तैरते हुए सोलर पैनल) लगाने की योजना पर भी काम शुरू करने को कहा गया है।
बिहार सरकार बिजली क्षेत्र में करीब ₹50,000 करोड़ का निवेश कर रही है। कजरा के अलावा भागलपुर के पिरपैंती में भी बड़े बिजली प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है, जिससे आने वाले समय में बिहार ऊर्जा के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो जाएगा।


















