बिहार की राजधानी पटना के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) पटना ने केंद्र सरकार की ‘कायाकल्प’ (Kayakalp) योजना के तहत पूरे देश में तीसरा स्थान प्राप्त कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह पुरस्कार केवल सफाई के लिए नहीं, बल्कि अस्पताल के प्रबंधन, संक्रमण नियंत्रण और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं में आए क्रांतिकारी बदलाव का परिणाम है।

क्या है कायाकल्प योजना?
भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने 15 मई 2015 को ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के तहत ‘कायाकल्प’ कार्यक्रम की शुरुआत की थी । इसका मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में स्वच्छता, स्वच्छता के प्रति जागरूकता और संक्रमण नियंत्रण को बढ़ावा देना है। यह योजना अस्पतालों के बीच एक ‘स्वस्थ प्रतिस्पर्धा’ पैदा करती है ताकि वे मरीजों को एक सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण प्रदान कर सकें।
एम्स पटना की उपलब्धि: एक नजर में
साल 2024-25 के मूल्यांकन चक्र में, एम्स पटना को ‘केंद्रीय सरकारी अस्पताल और संस्थान’ की श्रेणी में राष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त तीसरा स्थान मिला है। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि एम्स पटना का मुकाबला देश के उन पुराने और स्थापित संस्थानों से था जो दशकों से चिकित्सा के क्षेत्र में अग्रणी रहे हैं। इस रैंकिंग ने साबित कर दिया है कि एम्स पटना अब न केवल इलाज के मामले में, बल्कि अस्पताल संचालन (Hospital Administration) में भी देश के सर्वश्रेष्ठ संस्थानों की कतार में खड़ा है।
किन मानकों पर मिली यह कामयाबी?
कायाकल्प पुरस्कार के लिए मूल्यांकन की प्रक्रिया बेहद कठिन और पारदर्शी होती है। एम्स पटना को इन 8 मुख्य मानकों पर परखा गया था:
- अस्पताल का रखरखाव: भवन की स्थिति, साइनेज (रास्ता बताने वाले बोर्ड) और अस्पताल परिसर की खूबसूरती।
- स्वच्छता और सफाई: वार्डों, शौचालयों और ओपीडी क्षेत्रों की नियमित और गहरी सफाई।
- अपशिष्ट प्रबंधन: बायोमेडिकल कचरे का सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से निपटान ।
- संक्रमण नियंत्रण: मरीजों और कर्मचारियों को अस्पताल से होने वाले संक्रमण (Infection) से बचाने के कड़े प्रोटोकॉल।
- नर्सिंग और सहायता सेवाएं: मरीजों की देखभाल में नर्सिंग स्टाफ का व्यवहार और दक्षता।
- स्वच्छता संवर्धन: मरीजों और उनके परिजनों के बीच सफाई के प्रति जागरूकता फैलाना।
- परिसर के बाहर की सफाई: अस्पताल की बाउंड्री के बाहर के वातावरण को भी स्वच्छ रखना।
- पर्यावरण के अनुकूल प्रयास: सौर ऊर्जा का उपयोग और प्लास्टिक मुक्त परिसर जैसे ‘इको-फ्रेंडली’ कदम ।
सफलता के असली हीरो: नेतृत्व और टीम वर्क
एम्स पटना की इस सफलता का श्रेय संस्थान के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर (ब्रिगेडियर) डॉ. राजू अग्रवाल और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अनूप कुमार के कुशल नेतृत्व को जाता है। डॉ. अग्रवाल ने सैन्य अनुशासन के साथ अस्पताल की कार्यप्रणाली में जवाबदेही और समन्वय सुनिश्चित किया।
इस उपलब्धि पर डॉ. अनूप कुमार ने कहा कि यह कामयाबी सफाई कर्मचारियों, नर्सों, डॉक्टरों और इंजीनियरिंग विभाग के ‘राउंड-द-क्लॉक’ यानी 24 घंटे की कड़ी मेहनत का नतीजा है । विशेष रूप से सफाई कर्मियों को इस जीत का असली हकदार माना गया है, जिन्होंने संक्रमण मुक्त वातावरण बनाने में रीढ़ की हड्डी की तरह काम किया।
इनाम की राशि और उसका उपयोग
कायाकल्प रैंकिंग में तीसरे स्थान पर रहने वाले संस्थान को आमतौर पर 1 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाती है । नियमों के अनुसार, इस पुरस्कार राशि का 75% हिस्सा अस्पताल के बुनियादी ढांचे और सुविधाओं को और बेहतर बनाने के लिए खर्च किया जाता है। वहीं, शेष 25% राशि सफाई कर्मियों और संक्रमण नियंत्रण टीम जैसे कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए दी जाती है । इससे भविष्य में भी उच्च मानकों को बनाए रखने का जज्बा बना रहता है।
मरीजों को क्या होगा फायदा?
जब कोई अस्पताल ‘कायाकल्प’ पुरस्कार जीतता है, तो इसका सीधा लाभ वहां आने वाले मरीजों को मिलता है:
- संक्रमण का कम खतरा: बेहतर स्वच्छता प्रोटोकॉल के कारण मरीजों को इलाज के दौरान नया संक्रमण होने का डर नहीं रहता।
- सकारात्मक वातावरण: साफ-सुथरा वार्ड और परिसर मरीज के मानसिक स्वास्थ्य और रिकवरी में मदद करता है।
- बेहतर सुविधाएं: पुरस्कार राशि से अस्पताल में नई मशीनें और बेहतर वेटिंग एरिया जैसी सुविधाएं जोड़ी जाएंगी ।
एम्स पटना का सफर: 2012 से 2025 तक
एम्स पटना, जिसे पहले जय प्रकाश नारायण एम्स के नाम से जाना जाता था, ने 2012 में अपना कामकाज शुरू किया था । शुरुआती सालों में कई चुनौतियों और निर्माण कार्यों में देरी के बावजूद, संस्थान ने 2018 तक पूरी तरह कार्यात्मक (Full Functionality) दर्जा प्राप्त कर लिया । आज यहाँ किडनी ट्रांसप्लांट जैसी जटिल सर्जरी भी सफलतापूर्वक हो रही हैं। कायाकल्प की यह तीसरी रैंक संस्थान के उस सफर की गवाह है जिसने बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था की छवि को राष्ट्रीय स्तर पर बदल दिया है।
















