बिहार के उच्च शिक्षा क्षेत्र में करियर बनाने का सपना देख रहे लाखों युवाओं के लिए नया साल 2026 नई उम्मीदें और बड़े अवसर लेकर आया है। राज्य के विश्वविद्यालयों में लंबे समय से चल रही शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए बिहार सरकार ने एक निर्णायक कदम उठाया है। 11 दिसंबर 2025 को अनुभवी आईएएस अधिकारी राजीव रौशन को नवगठित उच्च शिक्षा विभाग का सचिव नियुक्त किया गया है । पदभार संभालते ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी प्राथमिकता बिहार को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाना और युवाओं को रोजगारोन्मुख शिक्षा प्रदान करना है ।

6,000 पदों पर ‘बंपर’ बहाली: आंकड़ों की जुबानी
बिहार के 13 पारंपरिक विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी एक कड़वी सच्चाई रही है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2020 के बाद बड़ी संख्या में शिक्षकों के सेवानिवृत्त होने के कारण असिस्टेंट प्रोफेसर के लगभग 5,000 पद रिक्त हैं । इसके अलावा, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर जैसे वरिष्ठ पदों पर पिछले चार दशकों से सीधी भर्ती नहीं हुई है, जहाँ करीब 1,000 पद खाली पड़े हैं ।
सचिव राजीव रौशन के नेतृत्व में विभाग ने सभी विश्वविद्यालयों को 31 दिसंबर 2025 तक रिक्तियों की अंतिम सूची और आरक्षण रोस्टर क्लियर करके भेजने का कड़ा निर्देश दिया था । इस ‘बंपर बहाली’ का आधिकारिक विज्ञापन जनवरी 2026 में जारी होने की प्रबल संभावना है ।
चयन प्रक्रिया में ऐतिहासिक बदलाव: अब लिखित परीक्षा का बोलबाला
इस बार की बहाली केवल पदों की संख्या के कारण नहीं, बल्कि चयन के बदले हुए नियमों के कारण भी चर्चा में है। अब तक असिस्टेंट प्रोफेसरों का चयन मुख्य रूप से शैक्षणिक अंकों और साक्षात्कार (Interview) पर आधारित होता था, जिससे अक्सर पारदर्शिता पर सवाल उठते थे। सचिव राजीव रौशन ने इस प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और मेरिट-आधारित बनाने के लिए एक नया फॉर्मूला पेश किया है :
- लिखित परीक्षा (80% वेटेज): अब सफलता का मुख्य आधार आपकी विषय विशेषज्ञता होगी। कुल चयन में 80% अंक लिखित परीक्षा से तय होंगे ।
- साक्षात्कार (12% वेटेज): इंटरव्यू का प्रभाव अब केवल 12% अंकों तक सीमित रहेगा ।
- कार्य अनुभव (8% वेटेज): अतिथि शिक्षकों या शोध अनुभव के लिए अधिकतम 8% अंक निर्धारित किए गए हैं ।
यह बदलाव उन मेधावी छात्रों के लिए एक वरदान है जो लिखित परीक्षा में शानदार प्रदर्शन कर सकते हैं, लेकिन पहले पुराने एकेडमिक स्कोरिंग सिस्टम के कारण पिछड़ जाते थे ।
बिहार पात्रता परीक्षा (BET): उन युवाओं के लिए मौका जिनका NET नहीं है
वे अभ्यर्थी जो यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण नहीं कर पाए हैं, उनके लिए राज्य सरकार बिहार पात्रता परीक्षा (BET) 2026 आयोजित करने जा रही है । BET का नोटिफिकेशन भी जनवरी 2026 में ही आने की उम्मीद है और इसकी परीक्षा मार्च 2026 में संभावित है । इसका पाठ्यक्रम पूरी तरह से यूजीसी नेट के पैटर्न पर आधारित होगा, जिसमें सामान्य योग्यता और विषय-विशेष के दो पेपर होंगे ।
पात्रता और आयु सीमा
अभ्यर्थियों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से संबंधित विषय में 55% अंकों के साथ स्नातकोत्तर (Master’s) होना अनिवार्य है (आरक्षित वर्ग के लिए 50%) । इसके साथ ही नेट, बेट या पीएचडी (2009/2016 के नियमों के तहत) की योग्यता आवश्यक होगी । असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए अधिकतम आयु सीमा 55 वर्ष तय की गई है, जो अनुभवी शिक्षकों को भी एक मौका देती है ।
भर्ती में पारदर्शिता और कानूनी चुनौतियों का समाधान
अतीत में बिहार की शिक्षक भर्तियां अक्सर कानूनी विवादों में फंसी रही हैं । सचिव राजीव रौशन ने इन गलतियों से सबक लेते हुए प्रक्रिया को “चट मंगनी पट ब्याह” की तर्ज पर तेज और विवाद-रहित बनाने का संकल्प लिया है । विभाग का लक्ष्य विधानसभा चुनावों से पहले इन नियुक्तियों को पूरा करना है ताकि राज्य के कॉलेजों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षण शुरू हो सके ।
अभ्यर्थियों के लिए सलाह
अगर आप बिहार में प्रोफेसर बनने का सपना देख रहे हैं, तो अब केवल अधिसूचना का इंतजार करने के बजाय अपनी विषय की गहराई में उतरने का समय है। चूंकि लिखित परीक्षा का वेटेज 80% है, इसलिए आपकी सफलता आपकी कलम तय करेगी । यह केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि बिहार की नई पीढ़ी की बौद्धिक नींव रखने का एक सुनहरा अवसर है।


















