बिहार की बदलती तस्वीर अब आंकड़ों में भी नजर आने लगी है। हाल ही में राज्य के योजना एवं विकास मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने जो घोषणा की, उसने अर्थशास्त्रियों और आम जनता दोनों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। वित्त वर्ष 2024-25 में बिहार की अर्थव्यवस्था ने 13.09% की शानदार विकास दर दर्ज की है । यह केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि उस मेहनत का नतीजा है जो पिछले कुछ वर्षों में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) और ग्रामीण विकास पर की गई है।

बिहार की अर्थव्यवस्था : क्या कहते हैं विकास के आंकड़े?
मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने पटना के सूचना भवन में पत्रकारों को बताया कि वर्तमान कीमतों (Current Prices) पर बिहार का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) 13.09% की दर से बढ़ा है । अगर हम स्थिर कीमतों (Constant Prices) की बात करें, तो यह विकास दर 8.64% रही है, जिसने बिहार को देश के सबसे तेजी से बढ़ने वाले राज्यों की सूची में छठे स्थान पर खड़ा कर दिया है ।
सबसे सुखद खबर आम आदमी की जेब से जुड़ी है। राज्य में प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) बढ़कर ₹76,490 (वर्तमान कीमतों पर) हो गई है, जो पिछले साल ₹66,828 थी । हालांकि, राष्ट्रीय औसत के मुकाबले हम अभी भी पीछे हैं, लेकिन यह बढ़ोतरी दिखाती है कि बदलाव की बयार चल पड़ी है। बिहार की कुल अर्थव्यवस्था अब लगभग ₹9.92 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच गई है ।
बिहार की अर्थव्यवस्था : किस सेक्टर ने मारी बाजी?
बिहार की इस तरक्की में हर सेक्टर का अपना योगदान है। वर्तमान में राज्य की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा हिस्सा ‘सर्विस सेक्टर’ (Tertiary Sector) से आता है, जिसका योगदान लगभग 58.6% है । इसमें व्यापार, होटल, परिवहन और संचार जैसे क्षेत्रों ने जबरदस्त काम किया है।
वहीं, निर्माण और उद्योग (Secondary Sector) का हिस्सा 21.5% रहा है । बिजली, गैस और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं में 14.5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे लोगों के जीवन स्तर में सुधार आया है । कृषि क्षेत्र, जो बिहार की जान है, आज भी राज्य की 54% से अधिक आबादी को रोजगार देता है । हाल के समय में चावल के उत्पादन में 21% और गेहूं में 10.7% की वृद्धि हुई है, जो ग्रामीण समृद्धि का संकेत है ।
‘न्यू एज इकोनॉमी’ और 1 करोड़ नौकरियों का सपना
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार सरकार ने अब ‘न्यू एज इकोनॉमी’ (New Age Economy) का विजन पेश किया है । इसका मुख्य लक्ष्य अगले 5 वर्षों (2025-2030) में राज्य के युवाओं के लिए 1 करोड़ रोजगार और नौकरी के अवसर पैदा करना है । सरकार का मानना है कि बिहार को अब सिर्फ खेती पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे टेक्नोलॉजी और सर्विस हब बनाना होगा।
इस विजन के तहत राज्य में कई बड़े प्रोजेक्ट्स की योजना बनाई गई है:
- टेक्नोलॉजी हब: बिहार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मिशन, सेमीकंडक्टर पार्क और मेगा टेक सिटी बनाने की तैयारी है ।
- इंडस्ट्रियल कॉरिडोर: डिफेंस कॉरिडोर और फिनटेक सिटी के जरिए बड़े निवेश को आकर्षित किया जाएगा 。
- चीनी मिलों का पुनरुद्धार: सरकार ने 9 बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से खोलने और 25 नई मिलें लगाने का फैसला किया है।
- ग्रीनफील्ड टाउनशिप: राज्य के 11 शहरों में आधुनिक सुविधाओं से लैस नई टाउनशिप विकसित की जाएंगी ।
ग्रामीण बिहार में डिजिटल क्रांति
विकास की इस दौड़ में गांवों को पीछे नहीं छोड़ा गया है। बिहार की प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) को अब बहुउद्देशीय (M-PACS) बनाया जा रहा है । अब तक 4,460 PACS को कंप्यूटर से जोड़ दिया गया है, जिससे किसानों को लोन, खाद और बीज मिलना आसान हो गया है । साथ ही, ‘विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना’ के तहत गोदामों की क्षमता बढ़ाई जा रही है ताकि किसानों की फसल खराब न हो ।
बिहार की अर्थव्यवस्था : चुनौतियां और भविष्य की राह
इतनी सकारात्मक खबरों के बीच कुछ चुनौतियां भी हैं। बिहार आज भी गरीबी और पलायन (Migration) जैसी समस्याओं से जूझ रहा है । राज्य की प्रति व्यक्ति आय अभी भी गुजरात या तमिलनाडु जैसे राज्यों से काफी कम है । इसके अलावा, उत्तर बिहार में हर साल आने वाली बाढ़ खेती के लिए एक बड़ा खतरा बनी रहती है ।
लेकिन, जिस तरह से राज्य ने 13.09% की विकास दर हासिल की है और ₹50 लाख करोड़ के निजी निवेश का लक्ष्य रखा है, उससे उम्मीद जगती है । बिहार की युवा आबादी हमारा सबसे बड़ा हथियार है। अगर ‘न्यू एज इकोनॉमी’ के तहत उन्हें सही कौशल (Skill) और मौका मिला, तो 2030 तक बिहार एक विकसित राज्य की श्रेणी में खड़ा हो सकता है।














