बिहार के लोगों के लिए अपने घर से दूर दूसरे राज्यों में जाना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। त्योहारों के समय ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट और प्राइवेट बसों की मनमानी कीमतों ने आम आदमी के सफर को थकाऊ बना दिया था। लेकिन अब यह तस्वीर बदलने वाली है। बिहार सरकार ने राज्य के भीतर और दूसरे राज्यों के साथ कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अब बिहार से बाहर जाना न केवल आसान होगा, बल्कि यह सफर आधुनिक सुविधाओं से भी लैस होगा।

235 नए रूट और 650 बसों का बेड़ा
बिहार परिवहन विभाग ने घोषणा की है कि अगले छह महीनों के भीतर राज्य में 235 नए रूटों पर 650 अतिरिक्त बसें शुरू की जाएंगी। यह विस्तार मुख्य रूप से बिहार के उन प्रवासियों और छात्रों को ध्यान में रखकर किया गया है जो काम या पढ़ाई के सिलसिले में पड़ोसी राज्यों में रहते हैं।
इस नए बेड़े में सुविधा का खास ख्याल रखा गया है। इसमें लगभग 200 एसी (AC) बसें, 400 नॉन-एसी बसें और 50 लग्जरी बसें शामिल होंगी। सरकार का लक्ष्य सिर्फ बड़े शहरों को जोड़ना नहीं है, बल्कि उन प्रखंडों (Blocks) तक पहुँचना है जिनकी आबादी 50,000 से अधिक है, ताकि गांव-गांव तक सरकारी बस सेवा की पहुँच हो सके।
किन राज्यों को होगा सबसे ज्यादा फायदा?
परिवहन विभाग के इस मास्टर प्लान में झारखंड को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी गई है। प्रस्तावित रूटों का विवरण कुछ इस प्रकार है:
- झारखंड: सबसे अधिक 90 रूट।
- पश्चिम बंगाल: 45 रूट, जिसमें सिलीगुड़ी के लिए 12 विशेष सेवाएँ शामिल हैं।
- उत्तर प्रदेश: 34 रूट।
- छत्तीसगढ़: 28 रूट।
- ओडिशा: 16 रूट।
- दिल्ली: बिहार से देश की राजधानी के लिए 10 सीधी बस सेवाएँ शुरू करने की योजना है।
इसके अलावा, सरकार बिहार और नेपाल के बीच भी लग्जरी बस सेवा शुरू करने के प्रस्ताव पर काम कर रही है, जिससे सीमा पार कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिलेगी।
पीपीपी (PPP) मॉडल और रोजगार के अवसर
यह पूरी योजना पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत लागू की जा रही है। परिवहन विभाग जनवरी के बाद निजी बस ऑपरेटरों से आवेदन मांगेगा। वर्तमान में, बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (BSRTC) पहले से ही लगभग 1,200 बसों का संचालन पीपीपी मॉडल के तहत कर रहा है। इस पहल से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि हजारों स्थानीय लोगों के लिए ड्राइवरों, कंडक्टरों और प्रबंधन के क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
हाई-टेक सफर और यात्रियों की सुरक्षा
सफर को डिजिटल और सुरक्षित बनाने के लिए सरकार ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया है।
- डिजिटल टिकट: केनरा बैंक और वर्ल्डलाइन के साथ मिलकर एक नया ऐप-आधारित टिकटिंग सिस्टम शुरू किया जा रहा है । अब यात्री मोबाइल से ही अपनी सीट चुन सकेंगे और टिकट बुक या कैंसिल कर सकेंगे।
- चलो कार्ड (Chalo Card): पटना जैसे शहरों में सफल रहने के बाद, कॉन्टैक्टलेस ‘चलो कार्ड’ का विस्तार किया जा रहा है, जिससे यात्रियों को खुले पैसों (chutta) की झंझट से मुक्ति मिलेगी ।
- सुरक्षा मानक: लंबी दूरी (250 किमी से अधिक) की बसों के लिए दो ड्राइवरों का होना अनिवार्य कर दिया गया है ताकि थकान की वजह से होने वाले हादसों को रोका जा सके। साथ ही, बसों में जीपीएस (GPS), सीसीटीवी (CCTV) और पैनिक बटन की सुविधा भी दी जा रही है ।
महिलाओं और पर्यटकों के लिए विशेष सौगात
बिहार सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए ‘पिंक बस’ सेवा का दायरा और बढ़ा दिया है। वर्तमान में 100 पिंक बसें चल रही हैं और जल्द ही 80 नई सीएनजी पिंक बसें सड़कों पर उतरेंगी । ये बसें पूरी तरह से महिला स्टाफ द्वारा संचालित की जाती हैं।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए, जनवरी 2026 से पटना से राजगीर और ककोलत जलप्रपात के लिए विशेष डीजल बसें शुरू की गई हैं। वहीं, फरवरी 2026 से बोधगया, सासाराम और वैशाली जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों के लिए 40 इलेक्ट्रिक बसें चलाने की तैयारी पूरी कर ली गई है।

















