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बिहार के सभी विश्वविद्यालयों में अब पीएचडी एडमिशन के लिए होगी एक ही परीक्षा: छात्रों के लिए बड़ी राहत

बिहार के उच्च शिक्षा जगत में एक बड़ा और सकारात्मक बदलाव होने जा रहा है। अगर आप भी शोध (Research) के क्षेत्र में अपना करियर बनाने का सपना देख रहे हैं और बिहार की किसी यूनिवर्सिटी से पीएचडी करना चाहते हैं, तो यह खबर आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण है। बिहार शिक्षा विभाग के उच्च शिक्षा निदेशालय ने अब राज्य के सभी विश्वविद्यालयों में पीएचडी (PhD) नामांकन के लिए एक ही ‘कॉमन एंट्रेंस टेस्ट’ (Single Exam) आयोजित करने का फैसला लिया है।

क्या है नया नियम और क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

अब तक बिहार के अलग-अलग विश्वविद्यालयों में पीएचडी के लिए अपनी अलग-अलग प्रवेश परीक्षाएं (जैसे PAT – PhD Admission Test) होती थीं। इससे छात्रों को हर यूनिवर्सिटी के लिए अलग आवेदन करना पड़ता था, अलग फीस भरनी पड़ती थी और अलग-अलग समय पर परीक्षाओं में शामिल होना पड़ता था। इस प्रक्रिया में न केवल छात्रों का काफी पैसा खर्च होता था, बल्कि समय की भी बर्बादी होती थी।

इस समस्या को सुलझाने के लिए बिहार राज्य उच्चतर शिक्षा परिषद ने निर्णय लिया है कि नए शैक्षणिक सत्र से पूरे राज्य के लिए एक ही परीक्षा आयोजित की जाएगी। इस प्रस्ताव को अंतिम रूप दे दिया गया है और अब इसे राज्यपाल सह कुलाधिपति (Chancellor) के कार्यालय, जिसे अब ‘बिहार लोक भवन’ के नाम से जाना जाता है, को मंजूरी के लिए भेजा जा रहा है।

एक परीक्षा, कई फायदे

इस नई व्यवस्था के लागू होने से छात्रों को कई तरह की सहूलियतें मिलेंगी:

  1. पैसों की बचत: छात्रों को अब हर यूनिवर्सिटी के लिए अलग-अलग फॉर्म भरने की मोटी फीस नहीं देनी होगी।
  2. मानसिक तनाव से मुक्ति: बार-बार परीक्षा देने और अलग-अलग सिलेबस की तैयारी करने का झंझट खत्म हो जाएगा।
  3. पारदर्शिता: एक ही परीक्षा होने से चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी होगी। दाखिला पूरी तरह से मेधा सूची (Merit List), संबंधित विषय में सीटों की उपलब्धता और राज्य के आरक्षण रोस्टर के आधार पर होगा।
  4. समय पर सत्र: कॉमन एग्जाम होने से सभी विश्वविद्यालयों में पीएचडी का सत्र एक साथ शुरू हो सकेगा, जिससे समय की बचत होगी।

NET की तर्ज पर शुरू होगा ‘BET’

बिहार सरकार केवल पीएचडी तक ही सीमित नहीं है। उच्च शिक्षा विभाग ने राज्य के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक (Assistant Professor) बनने के लिए भी एक नई परीक्षा ‘बिहार एलिजिबिलिटी टेस्ट’ (BET) शुरू करने का निर्णय लिया है। यह परीक्षा राष्ट्रीय स्तर की ‘नेट’ (UGC-NET) परीक्षा के पैटर्न पर आधारित होगी। इससे उन छात्रों को बड़ा फायदा होगा जो बिहार में ही रहकर प्रोफेसर बनने का लक्ष्य रखते हैं।

मुख्यमंत्री स्कॉलरशिप: सपनों को मिलेगी नई उड़ान

शोधार्थियों के लिए एक और अच्छी खबर यह है कि शिक्षा विभाग ने ‘मुख्यमंत्री स्कॉलरशिप योजना’ को भी मंजूरी दी है। इस योजना के तहत हर साल बिहार के 100 मेधावी छात्र-छात्राओं को दुनिया के नामचीन विदेशी संस्थानों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए पूरी स्कॉलरशिप दी जाएगी। इसके अलावा, ‘मुख्यमंत्री पीएचडी फेलोशिप योजना’ और ‘आर्यभट्ट बिहार रिसर्च प्रोजेक्ट स्कीम’ के माध्यम से शोध कर रहे छात्रों को आर्थिक मदद भी दी जाएगी।

डिजिटल बिहार: समर्थ पोर्टल का बढ़ता कदम

बिहार के विश्वविद्यालयों को आधुनिक बनाने के लिए ‘समर्थ ई-गवर्नेंस पोर्टल’ का उपयोग बढ़ाया जा रहा है। अब छात्र नामांकन, परीक्षा और रिसर्च प्रोजेक्ट की ट्रैकिंग ऑनलाइन कर सकेंगे। पटना यूनिवर्सिटी, पूर्णिया यूनिवर्सिटी और ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी जैसे संस्थान पहले ही इस डिजिटल बदलाव की ओर बढ़ चुके हैं।

वर्तमान स्थिति और आगे की राह

फिलहाल, कुछ विश्वविद्यालयों ने अपनी पुरानी प्रक्रिया के तहत परीक्षा आयोजित की है। जैसे ललित नारायण मिथिला यूनिवर्सिटी (LNMU) ने PAT-2024 की परीक्षा 10 जनवरी 2026 को निर्धारित की है। वहीं, मगध यूनिवर्सिटी में 2026-27 सत्र के लिए आवेदन की प्रक्रिया 31 जनवरी 2026 तक चल रही है। लेकिन यह माना जा रहा है कि कुलाधिपति की अंतिम मुहर लगते ही भविष्य के सभी पीएचडी दाखिले एकीकृत परीक्षा के माध्यम से ही होंगे।

बिहार के वर्तमान राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खान के नेतृत्व में राजभवन (बिहार लोक भवन) इन शैक्षणिक सुधारों को गति दे रहा है। छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक वेबसाइटों पर अपनी नजर बनाए रखें और इस ऐतिहासिक बदलाव के लिए तैयार रहें।

बिहार सरकार का यह कदम राज्य में उच्च शिक्षा के स्तर को सुधारने और शोध के माहौल को बेहतर बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी फैसला है। अब बिहार के छात्रों को अपने ही राज्य में विश्वस्तरीय शोध और शिक्षण के अवसर अधिक आसानी से मिल सकेंगे।

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