बिहार की सड़कों पर अब सिर्फ गाड़ियाँ नहीं, बल्कि राज्य के विकास के सपने दौड़ रहे हैं। पिछले कुछ वर्षों में बिहार ने अपने बुनियादी ढाँचे (infrastructure) में एक बड़ी छलांग लगाई है। अब यहाँ पुराने जाम वाले रास्तों की जगह आधुनिक, हाई-स्पीड और एक्सेस-कंट्रोल्ड (access-controlled) 6-लेन एक्सप्रेसवे ले रहे हैं। यह बदलाव न केवल सफर को आसान बना रहा है, बल्कि व्यापार और रोजगार के नए द्वार भी खोल रहा है।

1. वाराणसी-औरंगाबाद कॉरिडोर: बिहार का पहला 6-लेन गौरव
वाराणसी-औरंगाबाद कॉरिडोर बिहार की सड़क क्रांति का एक बड़ा मील का पत्थर है। यह NH-19 का हिस्सा है और ऐतिहासिक ग्रैंड ट्रंक रोड का आधुनिक रूप है। लगभग 192.4 किलोमीटर लंबा यह प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश के औद्योगिक केंद्रों को बिहार के रास्ते झारखंड और पश्चिम बंगाल से जोड़ता है ।
इसका 95% से अधिक निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। जहाँ उत्तर प्रदेश का हिस्सा चालू हो चुका है, वहीं बिहार के कैमूर, रोहतास और औरंगाबाद जिलों में अंतिम सुरक्षा जाँच और फिनिशिंग का काम चल रहा है । उम्मीद है कि 2026 की पहली छमाही तक इसे पूरी तरह जनता के लिए खोल दिया जाएगा । इस एक्सप्रेसवे से वाराणसी और औरंगाबाद के बीच सफर का समय 2 घंटे कम हो जाएगा ।
2. आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे: उत्तर और दक्षिण बिहार का संगम
NH-119D के नाम से जाना जाने वाला आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे बिहार का पहला ‘एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड’ प्रोजेक्ट है । 189 किलोमीटर लंबा यह 6-लेन एक्सप्रेसवे गया जिले के आमस से शुरू होकर दरभंगा के बेला नवादा तक जाता है ।
यह मार्ग गया, जहानाबाद, पटना, वैशाली और समस्तीपुर जैसे 7 जिलों से होकर गुजरता है । इसका सबसे खास हिस्सा पटना में गंगा पर बन रहा 9.75 किलोमीटर लंबा कच्ची दरगाह-बिदुपुर पुल है । इसके बन जाने से गया से दरभंगा का सफर जो पहले 5-6 घंटे लेता था, अब मात्र 2.5 से 3 घंटे में पूरा होगा । इसका लक्ष्य मार्च 2026 तक निर्माण पूरा करना है ।
3. पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे (NE-9): राज्य का अपना एक्सप्रेसवे
केंद्र सरकार ने पटना-पूर्णिया सड़क को आधिकारिक तौर पर ‘नेशनल एक्सप्रेसवे-9’ (NE-9) का दर्जा दिया है । यह बिहार का पहला ऐसा एक्सप्रेसवे है जो पूरी तरह से राज्य की सीमाओं के भीतर स्थित है। लगभग 250 से 282 किलोमीटर लंबे इस 6-लेन मार्ग का डिजाइन 120 किमी/घंटा की गति के लिए तैयार किया गया है ।
यह एक्सप्रेसवे सारण, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, सहरसा और मधेपुरा होते हुए पूर्णिया तक जाएगा । इसकी मदद से पटना और पूर्णिया के बीच की दूरी महज 3 घंटे में सिमट जाएगी । साथ ही, यह दीघवारा-शेरपुर पुल के जरिए पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जुड़कर दिल्ली तक के सफर को बेहद तेज बना देगा ।
4. गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे: सीमांचल के लिए लाइफलाइन
यह 520 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट उत्तर भारत को पूर्वोत्तर (Northeast) से जोड़ने वाला एक रणनीतिक गलियारा है । इसका लगभग 416 किलोमीटर हिस्सा बिहार के 8 जिलों—पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज से गुजरेगा । 2028 तक पूरा होने वाले इस प्रोजेक्ट से गोरखपुर और सिलीगुड़ी के बीच की दूरी 600 किलोमीटर कम हो जाएगी ।
5. रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे: व्यापार का नया रास्ता
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित रक्सौल को पश्चिम बंगाल के हल्दिया पोर्ट से जोड़ने वाला यह 650-719 किलोमीटर लंबा 6-लेन एक्सप्रेसवे अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए बेहद जरूरी है । बिहार के 12 जिलों से गुजरने वाला यह मार्ग रक्सौल से हल्दिया के सफर को 15 घंटे से घटाकर सिर्फ 8-10 घंटे कर देगा । इसका निर्माण कार्य भी 2028 तक पूरा होने की उम्मीद है ।
6. वाराणसी-राँची-कोलकाता एक्सप्रेसवे (NH-319B)
यह 610-710 किलोमीटर लंबा 6-लेन ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट बिहार के कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया जिलों से गुजरता है । बिहार में इसकी लंबाई लगभग 169 किलोमीटर है । इसकी एक खास इंजीनियरिंग विशेषता कैमूर की पहाड़ियों में बनने वाली 5 किलोमीटर लंबी सुरंग है, जिससे वनों की कटाई कम होगी । यह कॉरिडोर 2028 तक चालू होने की संभावना है और इससे वाराणसी से कोलकाता का सफर आधा रह जाएगा ।
गंगा पर आधुनिक 6-लेन पुल
एक्सप्रेसवे नेटवर्क की सफलता के लिए गंगा नदी पर मजबूत पुलों का होना अनिवार्य है।
- कच्ची दरगाह-बिदुपुर पुल: 9.76 किलोमीटर लंबा यह पुल भारत का सबसे लंबा नदी पुल होगा। यह बिहार का पहला 6-लेन एक्स्ट्राडोज्ड केबल ब्रिज (extradosed cable bridge) है ।
- मोकामा-सिमरिया पुल: NH-31 पर 8.15 किलोमीटर लंबा यह 6-लेन पुल राजेंद्र सेतु के समानांतर बन रहा है ।
- दीघा-सोनपुर पुल: पटना और सोनपुर के बीच NH-139W पर एक नया 6-लेन एलिवेटेड पुल भी प्रस्तावित है ।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
इन एक्सप्रेसवे के किनारे 10 नए औद्योगिक पार्क और 100 MSME पार्क विकसित करने की योजना है । इससे राज्य में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश और बड़े पैमाने पर रोजगार की उम्मीद है । साथ ही, पटना, आरा और सासाराम जैसे शहरों में प्रॉपर्टी की कीमतों में 20% से 30% तक की बढ़ोतरी देखी जा रही है ।
बिहार अब सिर्फ खेती के लिए नहीं, बल्कि अपनी रफ़्तार के लिए जाना जाएगा। 2026 से 2028 के बीच जब ये 6-लेन एक्सप्रेसवे पूरी तरह चालू हो जाएंगे, तो बिहार पूर्वी भारत का सबसे बड़ा लॉजिस्टिक्स और इंडस्ट्रियल हब बनकर उभरेगा।

















