बिहार में शिक्षा व्यवस्था को डिजिटल बनाने के लिए केंद्र सरकार की ‘वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी’ (APAAR) योजना पर काम तो तेजी से चल रहा है, लेकिन धरातल पर अभी भी लाखों छात्र इससे वंचित हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, बिहार के सरकारी और निजी स्कूलों के लाखों बच्चों के आपार कार्ड अभी तक नहीं बन पाए हैं, जिससे उनकी साइकिल, पोशाक और छात्रवृत्ति जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं पर संकट मंडरा रहा है।

क्या है आपार (APAAR) आईडी?
आपार का पूरा नाम Automated Permanent Academic Account Registry है। यह छात्रों के लिए 12 अंकों की एक यूनिक डिजिटल पहचान है, जो आधार कार्ड से जुड़ी होती है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्र के प्री-प्राइमरी से लेकर उच्च शिक्षा तक के सभी एकेडमिक रिकॉर्ड, मार्कशीट और क्रेडिट स्कोर को एक ही डिजिटल लॉकर (DigiLocker) में सुरक्षित रखना है।
बिहार में वर्तमान स्थिति: आंकड़ों की जुबानी
बिहार में आपार कार्ड बनाने की गति सरकारी और निजी स्कूलों में अलग-अलग है।
- सरकारी स्कूल: राज्य के 1.65 करोड़ बच्चों में से लगभग 1.26 करोड़ (73.92%) बच्चों के कार्ड 11 फरवरी 2026 तक बन चुके हैं।
- निजी स्कूल: यहाँ स्थिति अधिक चिंताजनक है। करीब 35.49 लाख छात्रों में से केवल 13.58 लाख के कार्ड बने हैं, यानी लगभग 68% बच्चे अभी भी वंचित हैं।
- अकेले सरकारी स्कूलों में: लगभग 30 लाख बच्चों का आधार कार्ड न होने की वजह से उनका आपार रजिस्ट्रेशन अटका हुआ है।
छात्रों को कार्ड न मिलने की 5 बड़ी वजहें
बिहार में आपार कार्ड के निर्माण में कई तकनीकी और प्रशासनिक बाधाएं सामने आ रही हैं:
- आधार डेटा मिसमैच (The Mismatch Crisis): सबसे बड़ी समस्या स्कूल रिकॉर्ड और आधार कार्ड में दी गई जानकारी का मेल न खाना है। नाम की स्पेलिंग, जन्मतिथि या लिंग में मामूली अंतर होने पर भी सिस्टम आपार आईडी जनरेट नहीं कर पाता।
- जन्म की तारीख का ‘डिफ़ॉल्ट’ होना: ग्रामीण इलाकों में कई बच्चों की जन्मतिथि स्कूल रजिस्टर में केवल ‘1 जनवरी’ दर्ज कर दी जाती है, जबकि आधार में कुछ और होती है। यह विसंगति डिजिटल वेरिफिकेशन को फेल कर देती है।
- मोबाइल नंबर और OTP की समस्या: एक आपार आईडी के लिए एक यूनिक मोबाइल नंबर की आवश्यकता होती है। ग्रामीण परिवारों में एक ही मोबाइल नंबर कई भाई-बहनों के लिए इस्तेमाल होता है, जिससे OTP वेरिफिकेशन में दिक्कत आती है।
- आधार सेंटर की कमी: राज्य में लगभग 30 लाख बच्चों के पास अभी तक आधार कार्ड ही नहीं है। गाँवों में आधार सेंटर की कमी के कारण माता-पिता बच्चों का आधार नहीं बनवा पा रहे हैं।
- शिक्षकों पर अतिरिक्त बोझ: स्कूल के प्रधानाध्यापकों और शिक्षकों को पढ़ाने के साथ-साथ डेटा एंट्री के 53 क्षेत्रों को भरने की जिम्मेदारी दी गई है, जिससे काम की गति धीमी हो रही है।
छात्रवृत्ति और योजनाओं पर असर
बिहार सरकार की मेधासॉफ्ट (MedhaSoft) पोर्टल के जरिए मिलने वाली योजनाओं जैसे साइकिल, पोशाक और छात्रवृत्ति का लाभ अब सीधे डिजिटल वेरिफिकेशन से जुड़ रहा है। यदि किसी छात्र का आपार कार्ड नहीं बनता है, तो उसके रिकॉर्ड को ट्रैक करना कठिन हो जाता है, जिससे उनके बैंक खातों में पैसा (DBT) पहुँचने में देरी हो सकती है।
बोर्ड परीक्षाओं के लिए क्या है नियम?
CBSE ने 2026 की बोर्ड परीक्षाओं (कक्षा 9वीं से 12वीं) के लिए आपार आईडी को अनिवार्य करने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, तकनीकी दिक्कतों को देखते हुए फिलहाल कुछ राहत दी गई है, लेकिन भविष्य में इसके बिना रजिस्ट्रेशन संभव नहीं होगा। बिहार बोर्ड (BSEB) ने भी मैट्रिक और इंटर परीक्षा 2026 के फॉर्म में आपार आईडी के कॉलम को शामिल किया है ताकि डेटा की पारदर्शिता बनी रहे।
जिलेवार प्रदर्शन: कौन आगे, कौन पीछे?
बिहार के कुछ जिलों ने शानदार प्रदर्शन किया है, जबकि कुछ अभी भी काफी पीछे हैं:
- सबसे बेहतर: शेखपुरा जिला लगभग 78.86% के साथ राज्य में शीर्ष पर रहा है।
- सबसे पीछे: सहरसा, पटना (56.50%), और पूर्वी चंपारण जैसे जिलों में काम की गति अभी भी काफी धीमी है।
समाधान: अब क्या करना चाहिए?
यदि आप एक छात्र या अभिभावक हैं और अभी तक आपार कार्ड नहीं बना है, तो ये कदम उठाएं:
- दस्तावेजों का मिलान करें: सुनिश्चित करें कि छात्र का नाम और जन्मतिथि स्कूल के रिकॉर्ड और आधार कार्ड में बिल्कुल एक जैसी हो।
- आधार अपडेट कराएं: यदि आधार में कोई त्रुटि है, तो नजदीकी आधार सेंटर पर जाकर उसे तुरंत सुधरवाएं।
- स्कूल से संपर्क करें: आपार आईडी स्कूल के UDISE+ पोर्टल के माध्यम से ही बनाई जाती है, इसलिए अपने प्रधानाध्यापक से संपर्क कर अपनी सहमति (Consent Form) जमा करें।

















