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AIIMS Darbhanga : ऐलान 2015 का, हकीकत 2030 की

यह परियोजना, जिसे बिहार के मिथिला, कोशी और तिरहुत क्षेत्रों के लिए जीवनरेखा माना जाता है, राजनीतिक गतिरोध और प्रशासनिक विफलता का राष्ट्रीय प्रतीक बन गई है। यह रिपोर्ट बताती है कि 1264 करोड़ रुपये की यह सुविधा क्यों अपनी समयरेखा से लगभग एक दशक पीछे छूट गई |

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AIIMS Darbhanga : कागज़ पर मंज़ूरी और 48 महीनों का वादा (2015-2020)

AIIMS Darbhanga की यात्रा 28 फरवरी, 2015 को शुरू हुई, जब इसकी पहली राजनीतिक घोषणा हुई थी । यह परियोजना केंद्र की प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY) के तहत शुरू होनी थी।   

  • औपचारिक स्वीकृति: राजनीतिक घोषणा के बाद भी, नौकरशाही प्रक्रिया धीमी रही। इसे औपचारिक मंज़ूरी केंद्रीय कैबिनेट से 15 सितंबर, 2020 को मिली , जिसमें ₹1264 करोड़ का बजट स्वीकृत हुआ ।   
  • समय सीमा: मंज़ूरी के समय ही यह तय था कि परियोजना शुरू होने की तारीख से 48 महीनों (चार साल) के भीतर पूरी हो जाएगी । यदि 2020 में काम शुरू होता, तो यह अस्पताल 2024 के अंत तक तैयार हो जाता। लेकिन ज़मीन की अदला-बदली ने इस समयरेखा को सिरे से ख़त्म कर दिया।   

AIIMS Darbhanga: ज़मीन के झगड़े में तीन साल की बर्बादी (2021-2024)

परियोजना की सबसे बड़ी रुकावट ज़मीन चयन का राजनीतिक और तकनीकी विवाद था, जो लगभग तीन साल चला।

  • पहला बदलाव: नवंबर 2021 में राज्य सरकार ने शुरू में दरभंगा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (DMCH) परिसर में 200 एकड़ ज़मीन दी । यहाँ मिट्टी भराई पर करीब ₹13 करोड़ खर्च भी हुए । लेकिन बाद में राज्य में सत्ता बदलने के बाद इस फैसले को पलट दिया गया। उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने तर्क दिया कि DMCH के नवीनीकरण के लिए ₹3115 करोड़ स्वीकृत हैं, इसलिए दो बड़े अस्पताल अलग-अलग जगह होने चाहिए ।   
  • दूसरी साइट की अस्वीकृति: राज्य ने इसके बाद शोभांम बाईपास के पास एक और ज़मीन का प्रस्ताव दिया और मिट्टी भराई के लिए ₹309 करोड़ मंज़ूर किए ।   
  • केंद्रीय वीटो: केंद्र सरकार ने मई 2023 में इस दूसरी साइट को तकनीकी रूप से ख़ारिज कर दिया । केंद्रीय विशेषज्ञ समिति ने पाया कि यह साइट निचला क्षेत्र थी, जिस पर निर्माण के लिए 10 मीटर से ज़्यादा मिट्टी भरनी पड़ती । इससे लागत अत्यधिक बढ़ती और सबसे गंभीर रूप से जल निकासी (Drainage) और जल-जमाव (Water-logging) का खतरा था ।   

यह गतिरोध राजनीतिक बयानबाज़ी में भी बदल गया। अगस्त 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावा किया कि दरभंगा एम्स खोल दिया गया है, जिस पर तेजस्वी यादव ने पलटवार करते हुए इसे “सरासर झूठ” बताया ।   

शिलान्यास और धीमी रफ़्तार: 2025 की हक़ीकत

सालों की खींचतान के बाद, गतिरोध तब टूटा जब राज्य सरकार ने सितंबर 2024 में 187.44 एकड़ की उपयुक्त ज़मीन केंद्र को सौंपी ।   

  • शिलान्यास: ज़मीन मिलते ही, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 13 नवंबर, 2024 को औपचारिक रूप से एम्स दरभंगा का शिलान्यास किया । यह तारीख परियोजना की वास्तविक शुरुआत मानी जाती है।   
  • वर्तमान काम: अप्रैल 2025 तक, परियोजना पूर्व-निवेश चरण में है। स्थलाकृतिक (Topographical) और जल विज्ञान (Hydrological) सर्वेक्षण पूरे हो चुके हैं ।   
  • पहला निर्माण कार्य: सबसे पहला टेंडर मार्च 2025 में चारदीवारी बनाने के लिए जारी किया गया । मुख्य भवन के मास्टरप्लान और डिज़ाइन के लिए आईआईटी दिल्ली से परामर्श चल रहा है ।   
  • फंडिंग की स्थिति: ₹1264 करोड़ के स्वीकृत बजट के मुकाबले, अप्रैल 2025 तक केवल ₹2.81 करोड़ ही पूर्व-निवेश कार्य के लिए जारी किए गए हैं । यह न्यूनतम ख़र्च बताता है कि ज़मीन पर असली निर्माण बस शुरू ही हुआ है।   

AIIMS Darbhanga controversy : 2030 से पहले असंभव

ज़मीन विवाद में तीन साल से अधिक का समय गंवाने के कारण, दरभंगा एम्स अपनी निर्धारित समयसीमा से बहुत पीछे छूट गया है।

  • नई समयरेखा: चूंकि 2025 नियोजन (Planning) और टेंडर प्रक्रिया में ही निकल जाएगा, इसलिए मुख्य ऊर्ध्वाधर निर्माण 2026 की शुरुआत से पहले संभव नहीं है। 48 महीने के मानक निर्माण समय को देखते हुए, 750 बिस्तरों वाले इस अस्पताल के पूर्ण परिचालन की तारीख अब देर 2029 या 2030 की शुरुआत तक खिंच गई है ।   

AIIMS Darbhanga की कहानी भारत की जटिल संघीय संरचना में बुनियादी ढांचे के निष्पादन की कमज़ोरी का एक सबक है। यह दिखाता है कि कैसे तकनीकी जाँच में लापरवाही और राजनीतिक अविश्वास एक ज़रूरी सार्वजनिक स्वास्थ्य परियोजना को दशकों तक लटका सकता है।

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