बिहार की भौगोलिक बनावट में गंगा नदी हमेशा से एक बड़ी बाधा रही है, जो राज्य को उत्तर और दक्षिण दो हिस्सों में बांटती है। लेकिन अब, हाथीदह और सिमरिया के बीच बना नया हाथीदह–सिमरिया डबल ट्रैक रेल पुल और इसके बगल में स्थित औंटा-सिमरिया सिक्स-लेन सड़क पुल ने इस बाधा को हमेशा के लिए खत्म कर दिया है। यह सिर्फ एक निर्माण नहीं, बल्कि बिहार की बदलती आर्थिक तस्वीर की एक नई पहचान है ।

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ऐतिहासिक विरासत और बदलाव की जरूरत
साल 1959 में बने ऐतिहासिक ‘राजेंद्र सेतु’ ने दशकों तक बिहार की सेवा की। लेकिन समय के साथ उसकी क्षमता कम होने लगी और भारी वाहनों पर पाबंदी लग गई । स्थिति यह थी कि ट्रेनों को गंगा पार करने के लिए घंटों सिग्नल का इंतज़ार करना पड़ता था । इसी समस्या को सुलझाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में नए डबल ट्रैक रेल पुल की नींव रखी थी 。
हाथीदह-सिमरिया डबल ट्रैक रेल पुल: तकनीकी खूबियाँ
यह नया रेल पुल इंजीनियरिंग का एक अद्भुत नमूना है। करीब 1.86 किलोमीटर लंबे इस पुल को ₹1,700 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है।
- डबल ट्रैक की ताकत: पहले राजेंद्र सेतु पर सिर्फ एक रेल लाइन थी, लेकिन अब यहाँ डबल ट्रैक होगा। यानी दो ट्रेनें एक साथ पुल को पार कर सकेंगी। पुराने राजेंद्र सेतु को मिलाकर अब यहाँ से एक साथ तीन ट्रेनें गुजर सकेंगी।
- तेज रफ्तार: इस पुल को आधुनिक तकनीक से बनाया गया है, जिससे इस पर ट्रेनें 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेंगी।
- गोल्डन जॉइंट: फरवरी 2026 में इस पुल के 12वें पिलर पर अंतिम हिस्से को जोड़कर ‘गोल्डन जॉइंट’ सेलिब्रेशन मनाया गया, जो इसके निर्माण के पूरा होने की एक बड़ी उपलब्धि है।
औंटा-सिमरिया सिक्स-लेन सड़क पुल: एशिया का गौरव
रेल पुल के ठीक बगल में बना औंटा-सिमरिया सिक्स-लेन सेतु एशिया के सबसे चौड़े ‘एक्स्ट्राडोज्ड केबल-स्टेयड’ पुलों में से एक है।
- उद्घाटन: इस 1.865 किमी लंबे शानदार सड़क पुल का उद्घाटन प्रधानमंत्री ने 22 अगस्त 2025 को किया था ।
- दूरी में कमी: इस पुल के चालू होने से भारी वाहनों को अब 100 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर नहीं लगाना पड़ता। पटना से बेगूसराय का सफर जो पहले 3 घंटे का था, अब सिर्फ 90 मिनट में पूरा हो जाता है ।
- स्मार्ट फीचर्स: यह एक ‘स्मार्ट ब्रिज’ है जिसमें सीसीटीवी कैमरे, डिजिटल डिस्प्ले, एलईडी लाइटें और दोनों किनारों पर पार्क जैसे सुंदर रोटरी (गोलंबर) बनाए गए हैं ।
आर्थिक और सामरिक महत्व
यह प्रोजेक्ट बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए ‘पावर हाउस’ साबित होगा।
- औद्योगिक क्रांति: बेगूसराय के बरौनी रिफाइनरी, खाद कारखाने और थर्मल पावर प्लांट के लिए कच्चे माल की आवाजाही अब तेज हो गई है ।
- किसानों को लाभ: उत्तर बिहार के मखाना और अन्य फसलों को अब दक्षिण भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाना आसान हो गया है ।
- धार्मिक पर्यटन: सिमरिया धाम, जो राष्ट्रकवि दिनकर की जन्मस्थली भी है, अब श्रद्धालुओं के लिए और करीब आ गया है ।
- सेना के लिए सुगमता: सामरिक दृष्टि से यह पुल पूर्वोत्तर भारत तक सैन्य साजो-सामान पहुँचाने में बहुत मददगार साबित होगा।
स्टेशनों का कायाकल्प: हाथीदह और सिमरिया
सिर्फ पुल ही नहीं, बल्कि इसके दोनों तरफ के स्टेशनों को भी संवारा गया है।
- हाथीदह जंक्शन: यहाँ ऊपरी ट्रैक पर 400 मीटर लंबे 4 नए प्लेटफॉर्म बनाए गए हैं, जो लिफ्ट, एस्केलेटर और आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं।
- सिमरिया स्टेशन: इसे भी आधुनिक बनाया जा रहा है ताकि यात्रियों को विश्वस्तरीय अनुभव मिल सके।
हाथीदह-सिमरिया डबल ट्रैक रेल पुल और औंटा-सिमरिया सिक्स-लेन सेतु बिहार के “lantern age” से बाहर निकलकर “infrastructure hub” बनने की कहानी कह रहे हैं । फरवरी 2026 के अपडेट्स के अनुसार, रेल पुल भी अब अपने संचालन के बेहद करीब है और जल्द ही इस पर यात्री ट्रेनें दौड़ती नजर आएंगी। बिहार के लिए यह पुल सिर्फ कंक्रीट का ढांचा नहीं, बल्कि तरक्की की एक नई पटरी है।

















