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IGIMS Patna First Robotic Surgery

बिहार की स्वास्थ्य क्रांति: IGIMS पटना में पहली सफल रोबोटिक सर्जरी

IGIMS पटना ने लगभग 27 करोड़ रुपये की लागत से अत्याधुनिक ‘दा विंची’ (da Vinci) रोबोटिक सिस्टम और एआई-लैस सिमुलेटर स्थापित किया है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह सर्जन के हाथों की गतिविधियों को अत्यधिक सटीकता के साथ दोहराता है। जहाँ इंसानी हाथों की एक सीमा होती है, वहाँ रोबोटिक आर्म्स 360 डिग्री पर घूमकर शरीर के उन हिस्सों तक भी आसानी से पहुँच सकते हैं जहाँ पारंपरिक सर्जरी कठिन होती है।

IGIMS Patna First Robotic Surgery

डॉ. मनीष मंडल के नेतृत्व में मिली सफलता

इस मिशन की कमान IGIMS के चिकित्सा अधीक्षक और प्रसिद्ध जीआई सर्जन प्रो. डॉ. मनीष मंडल ने संभाली। डॉ. मंडल और उनकी डॉक्टरों की टीम ने दिल्ली में एआई-आधारित सिमुलेटर पर हफ्तों तक कड़ा प्रशिक्षण लिया था। हाल ही में डॉ. मंडल को सिंगापुर में ‘इंटरनेशनल कॉलेज ऑफ सर्जन्स’ द्वारा FICS की प्रतिष्ठित उपाधि से भी नवाजा गया है, जो उनकी वैश्विक विशेषज्ञता का प्रमाण है।

मरीजों को क्या होंगे फायदे?

रोबोटिक सर्जरी पारंपरिक ‘ओपन सर्जरी’ की तुलना में कई गुना बेहतर है। इसके मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:

  1. कम दर्द और छोटा चीरा: ‘कीहोल’ सर्जरी होने के कारण शरीर पर बहुत छोटा निशान पड़ता है ।
  2. न्यूनतम रक्तस्राव: सर्जरी के दौरान खून बहुत कम बहता है, जिससे मरीज को कमजोरी कम होती है ।
  3. तेजी से रिकवरी: जहाँ पित्ताशय की सामान्य सर्जरी के बाद मरीज को 5-7 दिन अस्पताल में रुकना पड़ता था, अब रोबोटिक तकनीक से 48 घंटे के भीतर छुट्टी मिल सकेगी ।
  4. सटीकता: प्रोस्टेट, किडनी, ब्लैडर और कैंसर जैसी जटिल सर्जरी में सफलता की दर काफी बढ़ जाती है।

आयुष्मान भारत: गरीबों के लिए वरदान

अक्सर यह माना जाता है कि रोबोटिक सर्जरी जैसी महंगी तकनीक केवल अमीरों के लिए है। निजी अस्पतालों में इसका खर्च 4.5 से 6 लाख रुपये तक आता है। लेकिन बिहार सरकार और IGIMS प्रशासन ने यह स्पष्ट किया है कि यह सुविधा आयुष्मान भारत (AB-PMJAY) योजना के तहत कवर की जाएगी । इसका मतलब है कि राज्य के गरीब और वंचित वर्ग के लोग भी अब विश्वस्तरीय तकनीक का लाभ बिल्कुल मुफ्त उठा सकेंगे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने पहले ही घोषणा की है कि संस्थान में दवाइयाँ और इलाज पूरी तरह से मुफ्त करने की दिशा में तेजी से काम हो रहा है।

1,200 बेड का नया सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल

रोबोटिक यूनिट का संचालन IGIMS परिसर में बन रहे नए सात मंजिला सुपर-स्पेशियलिटी अस्पताल का हिस्सा है। इस 1,050 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट में 1,200 नए बेड जोड़े जा रहे हैं, जिससे संस्थान की कुल क्षमता 3,100 बेड से अधिक हो जाएगी। इसके ग्राउंड फ्लोर पर एक ‘इमरजेंसी सुपर सेंटर’ बनाया गया है जिसमें 6 समर्पित ऑपरेशन थिएटर हैं, ताकि किसी भी गंभीर स्थिति में मरीज को तत्काल इलाज मिल सके।

विभाग जहाँ उपलब्ध होगी यह सुविधा

शुरुआती दौर में यह तकनीक यूरोलॉजी, गायनेकोलॉजी और गैस्ट्रो-सर्जरी विभागों में प्रभावी होगी। आने वाले समय में इसे न्यूरोसर्जरी, कार्डियोलॉजी और पीडियाट्रिक सर्जरी (बच्चों के ऑपरेशन) तक विस्तारित किया जाएगा। संस्थान के निदेशक प्रो. डॉ. बिंदे कुमार के अनुसार, रोबोटिक फिजियोथेरेपी पहले ही शुरू की जा चुकी है, जिससे लकवा और रीढ़ की हड्डी के मरीजों को काफी राहत मिल रही है।

भविष्य की राह: टेलीसर्जरी और ग्रामीण पहुँच

IGIMS पटना का लक्ष्य केवल शहर तक सीमित रहना नहीं है। भविष्य में ‘टेलीसर्जरी’ (Telesurgery) के जरिए पटना में बैठा विशेषज्ञ डॉक्टर 5G नेटवर्क की मदद से बिहार के किसी सुदूर जिले जैसे पूर्णिया या भागलपुर में रोबोटिक सर्जरी कर सकेगा। यह तकनीक भविष्य में ‘रोबोटिक सर्जरी ऑन व्हील्स’ (बस के भीतर ऑपरेशन थिएटर) के रूप में भी सामने आ सकती है, जो चिकित्सा के लोकतंत्रीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम होगा।

IGIMS पटना में रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत बिहार के स्वास्थ्य इतिहास का ‘स्वर्ण अध्याय’ है। यह न केवल डॉक्टरों के कौशल को निखारेगा बल्कि राज्य के हर नागरिक को यह अहसास दिलाएगा कि अब जान बचाने वाली आधुनिक तकनीक उनके अपने शहर में उपलब्ध है।

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