बिहार के जमुई जिले से एक बड़ी और डराने वाली खबर सामने आई है। शनिवार की देर रात जसीडीह–झाझा रेलखंड पर सीमेंट से लदी एक मालगाड़ी भीषण हादसे का शिकार हो गई। टेलवा बाजार हॉल्ट के पास बड़ुआ नदी पर बने पुल संख्या 676 पर मालगाड़ी के करीब 15 से 17 डिब्बे पटरी से उतर गए। हादसा इतना जबरदस्त था कि मालगाड़ी के 5 डिब्बे सीधे पुल के नीचे नदी में जा गिरे। इस घटना के बाद से ही हावड़ा–पटना–दिल्ली मुख्य रेल मार्ग पर परिचालन पिछले 10 घंटों से अधिक समय से पूरी तरह बाधित है।

जमुई ट्रेन हादसा कैसे और कब हुआ ?
यह हादसा शनिवार रात करीब 11:25 से 11:40 बजे के बीच हुआ। जानकारी के मुताबिक, सीमेंट से लदी यह मालगाड़ी आसनसोल से झाझा की ओर “अप” लाइन पर जा रही थी। जैसे ही ट्रेन बड़ुआ नदी के पुल पर पहुँची, अचानक एक तेज धमाके जैसी आवाज हुई और पटरियां उखड़ गईं। चश्मदीदों और लोको पायलट के अनुसार, ट्रेन की गति सामान्य थी, लेकिन अचानक लगे झटके ने सब कुछ तहस-नहस कर दिया।
पटरियां उखड़ने के कारण 12 डिब्बे एक-दूसरे के ऊपर चढ़ गए, जबकि 5 डिब्बे पुल की रेलिंग तोड़कर नीचे बह रही नदी में समा गए। गनीमत यह रही कि यह एक मालगाड़ी थी, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन रेलवे की संपत्ति को करोड़ों का नुकसान पहुँचा है।
रेल यातायात पर पड़ा व्यापक असर
जमुई में हुए इस हादसे ने पूर्वी रेलवे के सबसे व्यस्त रूटों में से एक को पंगु बना दिया है। हावड़ा–पटना–दिल्ली मुख्य मार्ग भारतीय रेलवे की लाइफलाइन माना जाता है, और इस पर परिचालन रुकने से हजारों यात्री बीच रास्ते में फंस गए हैं।
प्रमुख प्रभावित ट्रेनें:
- बाघ एक्सप्रेस (13020): मुजफ्फरपुर से हावड़ा जाने वाली इस ट्रेन को बरौनी से ही डायवर्ट कर दिया गया है। करीब 16 स्टेशनों पर इस ट्रेन का परिचालन रद्द कर दिया गया।
- पटना–शालीमार दुरंतो (22214): इसे झाझा स्टेशन पर घंटों रोका गया और बाद में गया–किऊल मार्ग से रवाना किया गया।
- हावड़ा राजधानी एक्सप्रेस: इस प्रीमियम ट्रेन के मार्ग में भी बदलाव किया गया है।
- लोकल ट्रेनें: मोकामा–जसीडीह (63572) जैसी कई पैसेंजर ट्रेनों को 28 दिसंबर के लिए पूरी तरह रद्द कर दिया गया है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि कुल 34 जोड़ी ट्रेनों पर इस हादसे का सीधा असर पड़ा है।
युद्ध स्तर पर जारी है राहत कार्य
हादसे की जानकारी मिलते ही आसनसोल मंडल और पूर्व मध्य रेलवे के आला अधिकारी मौके पर पहुँच गए। आसनसोल, मधुपुर और झाझा से ‘एक्सीडेंट रिलीफ ट्रेन’ (ART) को रवाना किया गया है। नदी में गिरे भारी-भरकम डिब्बों को निकालने के लिए दानापुर से विशेष हाइड्रोलिक क्रेन मंगवाई गई है।
रेलवे के अनुसार, मलबे को साफ करने और ट्रैक को दोबारा चालू करने का काम “युद्ध स्तर” पर किया जा रहा है। हालांकि, पुल के गर्डर को भी नुकसान पहुँचा है, जिसके कारण बहाली में सोमवार तक का समय लग सकता है। अधिकारी कोशिश कर रहे हैं कि पहले ‘डाउन’ लाइन को चालू किया जाए ताकि फंसी हुई ट्रेनों को निकाला जा सके।
जमुई ट्रेन हादसा : सुरक्षा में चूक या तकनीकी खराबी?
इस हादसे ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हैरानी की बात यह है कि जिस पुल संख्या 676 पर यह हादसा हुआ, उसका गर्डर हाल ही में बदला गया था। स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों का कहना है कि क्या नए निर्माण में कोई तकनीकी कमी रह गई थी? इसके अलावा, कड़ाके की ठंड में पटरियों का चटकना (Rail Fracture) भी एक संभावित कारण माना जा रहा है। रेलवे बोर्ड ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।
यात्रियों के लिए जरूरी जानकारी (हेल्पलाइन नंबर्स)
अगर आप या आपके परिचित इस रूट पर यात्रा कर रहे हैं, तो रेलवे ने सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। यात्रा शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन का स्टेटस जरूर चेक कर लें।
- रेलवे पूछताछ: 139
- जमुई कंट्रोल रूम: 06345-222002
- आपदा प्रबंधन: 9473191405
- झाझा पुलिस स्टेशन: 06349-223132
जमुई रेल दुर्घटना ने एक बार फिर यात्रियों को परेशानी में डाल दिया है। हालांकि रेलवे प्रशासन बहाली में जुटा है, लेकिन मुख्य मार्ग पूरी तरह सामान्य होने में सोमवार तक का समय लग सकता है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे सड़क मार्ग या वैकल्पिक रेल मार्गों (जैसे गया-किऊल खंड) का चुनाव करें।
















