बिहार की राजधानी पटना के लिए परिवहन के क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। सड़कों पर लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम से परेशान पटनावासियों के लिए ‘वॉटर मेट्रो’ एक गेम-चेंजर साबित होने वाली है। ₹908 करोड़ की लागत वाली यह महत्वाकांक्षी परियोजना न केवल यातायात को सुगम बनाएगी, बल्कि गंगा नदी के किनारे पर्यटन को भी नए पंख देगी।

- कुल लागत: ₹908 करोड़
- संचालन: भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण (IWAI) और बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम (BSTDC)
- पहला रूट: दीघा घाट से कंगन घाट (पटना सिटी)
- लॉन्च की तारीख: जनवरी 2026 (संभावित)
- तकनीकी सहयोग: कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड (KMRL)
क्या है पटना वॉटर मेट्रो?
वॉटर मेट्रो एक अत्याधुनिक परिवहन प्रणाली है जिसमें बिजली या हाइब्रिड तकनीक से चलने वाले आधुनिक जहाजों (Vessels) का उपयोग किया जाता है। यह ठीक वैसी ही सुविधा प्रदान करती है जैसी आप जमीन पर चलने वाली मेट्रो में अनुभव करते हैं—वातानुकूलित केबिन, आरामदायक सीटें और तेज गति। पटना में इसे राष्ट्रीय जलमार्ग-1 (गंगा नदी) पर संचालित किया जा रहा है।
वॉटर मेट्रो का पहला चरण लगभग 10.5 किलोमीटर लंबा होगा। यह मार्ग पटना के सबसे व्यस्त इलाकों के समानांतर चलता है, जिससे सड़क पर वाहनों का दबाव कम होगा।
प्रमुख स्टॉपेज:
- दीघा घाट (शुरुआती बिंदु): यहाँ से यात्रा शुरू होगी।
- NIT घाट: यहाँ रीचार्जिंग स्टेशन और आधुनिक जेटी बनाई जा रही है।
- गाय घाट: केंद्रीय पटना का एक महत्वपूर्ण स्टॉप।
- कंगन घाट (अंतिम बिंदु): पटना सिटी का ऐतिहासिक क्षेत्र।
भविष्य का विस्तार: आने वाले समय में इसे छपरा के पहलेजा घाट से वैशाली के बिदुपुर तक विस्तार देने की योजना है, जिसकी कुल दूरी लगभग 50 किलोमीटर होगी। इसमें हरिहरनाथ मंदिर (सोनपुर), हाजीपुर और चेचर घाट जैसे 10 अन्य स्थानों को भी जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
अत्याधुनिक जहाज: एमवी गोमधर कुंवर और एमवी निषादराज
पटना वॉटर मेट्रो के बेड़े में दो तरह के प्रमुख जहाज शामिल किए गए हैं:
- एमवी गोमधर कुंवर (MV Gomdhar Kunwar): यह पूरी तरह इलेक्ट्रिक वेसल है जिसे ₹12 करोड़ की लागत से बनाया गया है। इसमें 50 यात्रियों के बैठने और 25 के खड़े होने की क्षमता है। यह मात्र 30 मिनट की चार्जिंग में 90 मिनट तक चल सकता है।
- एमवी निषादराज (MV Nishadraj): यह एक बड़ा हाइब्रिड इलेक्ट्रिक कैटामरन है जिसमें 100 यात्रियों के बैठने की जगह है। इसमें दिव्यांगों के लिए व्हीलचेयर की विशेष व्यवस्था भी की गई है।
किराया और समय
अभी तक आधिकारिक तौर पर किराए की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन अनुमान है कि न्यूनतम किराया ₹20 से ₹40 के बीच हो सकता है। वॉटर मेट्रो की सेवा सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक उपलब्ध रहने की उम्मीद है।
रेल मेट्रो के साथ तालमेल
पटना वॉटर मेट्रो की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘मल्टी-मोडल एकीकरण’ है। इसे पटना के आगामी रेल मेट्रो प्रोजेक्ट के साथ इस तरह जोड़ा जाएगा कि यात्री एक ही कार्ड या टिकट से जलमार्ग और रेल मार्ग दोनों का उपयोग कर सकेंगे। दीघा और गाय घाट जैसे टर्मिनल मेट्रो स्टेशनों के नजदीक होंगे, जिससे सफर बेहद आसान हो जाएगा।
शिप रिपेयर सेंटर: कुर्जी में नया हब
जहाजों के रखरखाव के लिए पटना के कुर्जी में ₹4.15 करोड़ की लागत से एक आधुनिक शिप रिपेयर सेंटर (Ship Repair Centre) भी बनाया जा रहा है। 5 एकड़ में फैले इस सेंटर के बनने से बिहार के जहाजों को मरम्मत के लिए अब कोलकाता भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
क्यों खास है पटना वॉटर मेट्रो
- ट्रैफिक से राहत: अशोक राजपथ पर लगने वाले घंटों के जाम से मुक्ति मिलेगी।
- पर्यावरण के अनुकूल: इलेक्ट्रिक जहाजों के कारण गंगा में प्रदूषण नहीं होगा।
- पर्यटन को बढ़ावा: गंगा के सुंदर घाटों का नजारा पर्यटकों को आकर्षित करेगा।
- रोजगार के अवसर: नए टर्मिनलों और केंद्रों के बनने से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा।
पटना वॉटर मेट्रो केवल एक सवारी नहीं, बल्कि बिहार की आधुनिक बदलती तस्वीर है। जनवरी 2026 में इसके शुरू होने के बाद, पटना की सड़कों के साथ-साथ अब इसकी जीवनरेखा—गंगा—भी शहर की रफ़्तार को नई दिशा देगी।

















