Mobile Only Menu
  • Home
  • पर्यटन
  • राजगीर महोत्सव 2025: बिहार की संस्कृति का महाकुंभ
राजगीर महोत्सव 2025

राजगीर महोत्सव 2025: बिहार की संस्कृति का महाकुंभ

 19 से 21 दिसंबर को राजगीर में यह तीन दिनों का पर्व मनाया जाएगा। मेला राजगीर के इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर और आईसीसी-हॉकी मैदान के पास खुली जमीन पर लगेगा।

राजगीर महोत्सव 2025

इस बार खास क्या है?

इस बार महोत्सव को ऐतिहासिक रंग दिया गया है। पहली बार राजगीर की धरोहरों – जरासंध अखाड़ा, शांति स्तूप और ब्रह्मकुंड की प्रतिमूर्तियां लगाई जाएंगी। आने वाले सैलानियों को इन जगहों का इतिहास सीखने का मौका मिलेगा। यानी, यह सिर्फ गीत-नृत्य का उत्सव नहीं, बल्कि नालंदा की समृद्ध विरासत से परिचय का भी त्योहार है।

संगीत का जादू -कैलाश खेर

कैलाश खेर – जिनकी आवाज़ “ओ लाल मेरिया” गीत से पूरी दुनिया में गूंजी थी – 19 दिसंबर की शाम को मंच पर होंगे। यह उनकी 12 साल की लंबी अनुपस्थिति के बाद वापसी है! उनके सूफी और लोक संगीत वाले गीतों से राजगीर की रात जादुई हो जाएगी।

महोत्सव का इतिहास पढ़ें तो यह कहानी बेहद रोचक है:

1986 में जब बिहार के मुख्यमंत्री बिंदेश्वरी दूबे ने इस उत्सव का उद्घाटन किया था, तो सोचा था कि खजुराहो नृत्य महोत्सव की तरह यह भी पर्यटकों को आकर्षित करेगा। लेकिन शुरुआत में यह मेल नहीं खा पाया। 1995 में जब इसे दोबारा शुरू किया गया, तब जाकर यह समझ में आया कि महोत्सव को आम लोगों के करीब लाना जरूरी है। तब से यह त्योहार बन गया।

मेले की रंगीनियाँ:

यहाँ सिर्फ बड़े कलाकारों का ही नहीं, स्थानीय प्रतिभा का मंच भी है। दिन के समय राजगीर के अपने गायक, नर्तक और कलाकार मंच पर आते हैं। महिला सशक्तीकरण को ध्यान में रखते हुए इस बार भी महिला महोत्सव का आयोजन होगा।

तांगा सज्जा, पालकी प्रतियोगिता, सद्भावना मार्च जैसी परंपरागत खेलों के साथ-साथ ग्रामीण व्यंजन मेला, कृषि मेला, हस्तशिल्प स्टॉल्स भी लगेंगे। इसका मतलब है – छोटे कारीगरों को बिक्री का सुअवसर और आपको असली देसी चीजें खरीदने का मौका।

राजगीर सज जाएगा:

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि पूरा शहर “दुल्हन की तरह” सजाया जाएगा। सड़कों पर रौशनी, पानी की व्यवस्था, स्वच्छता और सुरक्षा – सब कुछ परफेक्ट होगा। होटलों और दुकानों को भी सजने के लिए कहा गया है।

भीड़ का मजा:

अगर आप घर बैठे सोच रहे हैं कि उत्सव देखूँ या नहीं, तो इतना जानिए – राजगीर का यह त्योहार अब एक पूरा अनुभव बन गया है। यहाँ बच्चों के झूले हैं, खेल-कूद की प्रतियोगिताएँ हैं, संगीत है, इतिहास है और अपनापन भी है।

यह कोई महंगा और डिस्टेंट त्योहार नहीं है – यह बिहार की अपनी जमीन पर, अपनी संस्कृति का जश्न है। राजगीर जैसी पवित्र जगह पर इसका आयोजन इसे और भी खास बनाता है।

Releated Posts

दिल्ली से बिहार के लिए शुरू हो रही है सीधी एसी बस सेवा: जानें किराया, रूट और पूरी जानकारी

दिल्ली में रहने वाले पूर्वांचली भाई-बहनों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है। लंबे समय के इंतजार के…

ByByManvinder Mishra Mar 18, 2026

गया जंक्शन बनेगा विश्वस्तरीय: 2026 तक एयरपोर्ट जैसी सुविधाओं से लैस होगा बिहार का यह प्रमुख स्टेशन

बिहार का गया जिला, जो भगवान बुद्ध की ज्ञान स्थली और पितृपक्ष मेले के लिए विश्व प्रसिद्ध है,…

ByByHarshvardhan Mar 18, 2026

सोनपुर ग्रीनफील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट: बिहार की तरक्की को लगेंगे पंख, जानें पूरी योजना

बिहार के विकास की कहानी में मार्च 2026 का महीना एक ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया है। भारत सरकार…

ByByManvinder Mishra Mar 16, 2026

हाथीदह-सिमरिया रेल पुल और 6-लेन सेतु: बिहार की प्रगति को मिले नए पंख

बिहार की भौगोलिक बनावट में गंगा नदी हमेशा से एक बड़ी बाधा रही है, जो राज्य को उत्तर…

ByByPrachi Singh Mar 1, 2026

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top