बिहार के भागलपुर जिले का सुल्तानगंज अब केवल श्रावणी मेले के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी आधुनिक और भव्य पहचान के लिए जाना जाएगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में यहाँ बिहार का पहला शिव कॉरिडोर (Shiva Corridor) बनने जा रहा है। यह प्रोजेक्ट वाराणसी के काशी विश्वनाथ और उज्जैन के महाकाल लोक की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है, जो न केवल श्रद्धालुओं के अनुभव को दिव्य बनाएगा बल्कि इलाके की आर्थिक स्थिति को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा |

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क्या है सुल्तानगंज शिव कॉरिडोर प्रोजेक्ट?
अजगैवीनाथ मंदिर (Ajgaibinath Dham) को केंद्र में रखकर बनाए जा रहे इस कॉरिडोर का मुख्य उद्देश्य गंगा घाट से लेकर मंदिर तक श्रद्धालुओं के लिए एक सुगम और सुंदर रास्ता तैयार करना है। वर्तमान में श्रद्धालुओं को संकरी गलियों से होकर गुजरना पड़ता है। नए कॉरिडोर में चौड़े रास्ते, धर्मशालाएं, और भक्तों के लिए विश्वस्तरीय सुविधाएं होंगी |
रेलवे और बिहार सरकार के बीच ‘लैंड एक्सचेंज’
इस कॉरिडोर के निर्माण में सबसे बड़ी बाधा जमीन की थी, क्योंकि मंदिर के पास की जमीन रेलवे की थी। जनवरी 2026 में एक ऐतिहासिक समझौते के तहत बिहार सरकार और रेलवे के बीच जमीन की अदला-बदली (Land Exchange) को मंजूरी दी गई 。
- रेलवे से ली गई जमीन: कॉरिडोर और धर्मशाला के लिए रेलवे ने अपनी 17.47 एकड़ जमीन दी है।
- बदले में दी गई जमीन: बिहार सरकार ने इसके बदले रेलवे को जगदीशपुर हाल्ट (18.98 एकड़), बरारी (0.6 डिसमिल) और सुल्तानपुर में NH के पास (0.7 एकड़) जमीन दी है |
सुल्तानगंज शिव कॉरिडोर :गंगा की धारा को पुराने घाट पर लाने की तैयारी
सुल्तानगंज की पहचान ‘उत्तरवाहिनी गंगा’ से है, लेकिन समय के साथ गंगा की मुख्य धारा घाटों से दूर हो गई थी। जल संसाधन विभाग अब अरबों की लागत से गंगा की धारा को मोड़कर वापस ‘पुरानी सीढ़ी घाट’ (Purani Seedi Ghat) पर लाने का काम कर रहा है | लक्ष्य यह है कि 2026 के श्रावणी मेले तक कांवड़िये सीधे पुराने घाट पर स्नान कर जल भर सकें
कनेक्टिविटी का ‘ट्रिपल बूस्टर’: रोड, रेल और हवाई सफर
सुल्तानगंज को एक वर्ल्ड-क्लास टूरिस्ट हब बनाने के लिए सरकार तीन स्तरों पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रही है:
- ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट (Sultanganj Airport): भागलपुर जिले के सुल्तानगंज ब्लॉक में देश का 22वां ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा बनने जा रहा है। इसके लिए करीब 931 एकड़ जमीन अधिग्रहित की जा रही है और सरकार ने 472 करोड़ रुपये की राशि जारी कर दी है
- अगुवानी-सुल्तानगंज गंगा पुल: खगड़िया और सुल्तानगंज को जोड़ने वाला यह 3,160 मीटर लंबा पुल मार्च 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। इसकी लागत लगभग 1,710 करोड़ रुपये है
- गंगा पथ (Road Corridor): मुंगेर से सुल्तानगंज और सुल्तानगंज से भागलपुर तक के लिए ₹10,000 करोड़ से अधिक के दो बड़े सड़क प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। यह रास्ता गंगा के समानांतर चलेगा और यात्रा के समय को बहुत कम कर देगा
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
अजगैवीनाथ धाम का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा है। माना जाता है कि यहाँ जह्नु मुनि का आश्रम था और भगवान शिव ने अपना ‘अजगव’ धनुष यहीं प्राप्त किया था । कॉरिडोर के बनने से यहाँ के पत्थर की नक्काशी और प्राचीन शिलालेखों को भी संरक्षित किया जाएगा, जो गुप्त और पाल वंश के समय के माने जाते हैं | साथ ही, सुल्तानगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर अब ‘अजगैवीनाथ धाम’ करने का प्रस्ताव भी पारित हो चुका है
सुल्तानगंज शिव कॉरिडोर केवल पत्थरों का निर्माण नहीं है, बल्कि यह बिहार की ‘विकास भी, विरासत भी’ वाली सोच का प्रतीक है। जब 2026 में यहाँ गंगा की धारा वापस आएगी, श्रद्धालु कॉरिडोर से सीधे बाबा के दर्शन करेंगे और हवाई जहाज से यहाँ पहुँचेंगे, तब सुल्तानगंज वास्तव में पूर्वी भारत का प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र बन चुका होगा।

















