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बिहार मॉडल स्कूल योजना: गांव के बच्चों का सपना सच करने की कोशिश

सरकारी स्कूलों की बदहाली सुनते ही किसी बिहारी अभिभावक के मन में पहला सवाल यही आता है—अपने बच्चों को कहां पढ़ाऊं? लेकिन इसी सवाल का जवाब बिहार सरकार ने एक बड़े कदम से देने का फैसला किया है। दिसंबर 2025 में शिक्षा मंत्री सुनील कुमार की घोषणा के बाद अब बिहार का हर गांव, हर प्रखंड अपने बच्चों के लिए आधुनिक सरकारी स्कूल पाने का सपना देखने लगा है।

आंकड़ों में बताएं तो बिहार में इसी साल 572 मॉडल स्कूल विकसित किए जाएंगे। ये 572 स्कूल अलग-अलग जगहों पर बंटे हैं—38 जिलों में से हर जिले में एक, और राज्य के सभी 534 प्रखंडों में एक-एक। मतलब, बिहार के लगभग हर कोने में एक मॉडल स्कूल होगा। यह शुधो एक घोषणा नहीं है, यह एक वादा है कि सरकार सच में गांवों की शिक्षा को बदलने के लिए गंभीर है।

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बिहार मॉडल स्कूल योजना :क्या खास होगा इन स्कूलों में?

बिहार की सरकारी स्कूलें जो हालत में हैं, उसमें से निकलकर निजी स्कूलों से बेहतर बनना—यह कोई आसान काम नहीं है। लेकिन सरकार ने ठान लिया है। इन मॉडल स्कूलों में बच्चों को ऐसी सुविधाएं मिलेंगी जो घर के पास ही निजी स्कूल जैसा अनुभव दें।

शुरुआत होगी स्मार्ट क्लासरूम से। डिजिटल बोर्ड, ई-कंटेंट, और ऑनलाइन शिक्षण माध्यम से पढ़ाई ऐसी होगी जो बच्चों को बोरियत न महसूस हो। फिर आएंगे ई-लाइब्रेरी—जहां प्रतियोगी परीक्षाओं (JEE, NEET, UPSC) से जुड़ी किताबें रहेंगी। विज्ञान लैब, कंप्यूटर लैब, और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) सेंटर में बच्चे व्यावहारिक ज्ञान लेंगे। खेल के मैदान, पार्क, और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की व्यवस्था से बच्चों का संपूर्ण विकास सुनिश्चित होगा।

प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी: गांवों के बच्चों के सपने साकार करने का जरिया

असली बात यहां है। ये मॉडल स्कूल सिर्फ पढ़ाई नहीं देंगे, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की विशेष तैयारी भी कराएंगे। एनीसीट, मेडिकल, यूपीएससी, बैंकिंग परीक्षाएं—सब कुछ के लिए छात्रों को बेसिक से एडवांस तक का कोर्स समझाया जाएगा।

बात यहीं खत्म नहीं। समान क्षमता वाले छात्रों के अलग-अलग बैच बनाए जाएंगे। कमजोर बच्चों को अतिरिक्त ध्यान देंगे, तेज बच्चों को आगे की ओर बढ़ाएंगे। ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से पढ़ाई होगी, ताकि हर बच्चे को सुविधा मिले। ये वो स्कूल होंगे जहां से बिहार का अगला टॉपर निकलेगा—किसी शहरी कोचिंग सेंटर से नहीं, बल्कि अपने गांव के सरकारी स्कूल से।

शिक्षक होंगे असली हीरे : बिहार मॉडल स्कूल योजना

कोई भी स्कूल अच्छे शिक्षकों के बिना अधूरा है। इसलिए सरकार ने शिक्षकों की नियुक्ति में भी कोई समझौता नहीं किया। हर विषय के लिए सबसे योग्य और अनुभवी शिक्षकों की प्रतिनियुक्ति की जाएगी। कक्षा 9-10 के स्कूलों में कम से कम 8 शिक्षक, और कक्षा 9-12 के स्कूलों में कम से कम 16 शिक्षक रहेंगे। छात्रों की संख्या बढ़े तो शिक्षक भी बढ़ेंगे।

शिक्षकों को नियमित प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वह आधुनिक शिक्षण पद्धति से अवगत रहें। लाइब्रेरी के लिए एक समर्पित पुस्तकाध्यक्ष भी होगा। मतलब, यहां सब कुछ सुव्यवस्थित होगा।

बजट से लेकर कार्यान्वयन तक

बिहार सरकार शिक्षा के प्रति कितनी गंभीर है, इसका सबूत है 2025-26 के बजट में 70,000 करोड़ रुपये की राशि शिक्षा क्षेत्र के लिए आवंटित करना। यह एक ऐतिहासिक फैसला है। इन पैसों का इस्तेमाल करके नई इमारतें बनाई जाएंगी, पुरानी को दुरुस्त किया जाएगा, और हर स्कूल को आधुनिक संसाधनों से लैस किया जाएगा।

अभी स्कूलों का चयन जनवरी 2026 में पूरा हो जाएगा। स्थलीय जांच के बाद यह पक्का किया जाएगा कि कौन से स्कूलों में पर्याप्त जमीन और बुनियादी ढांचा है। फिर 2026-27 के शैक्षणिक सत्र से ये मॉडल स्कूल अपनी पूरी ताकत से काम करने लगेंगे।

सिर्फ अपने छात्रों के लिए नहीं, पूरे सिस्टम के लिए

इन मॉडल स्कूलों का असली उद्देश्य सिर्फ अपने कुछ बच्चों को आगे बढ़ाना नहीं है। ये अन्य सरकारी स्कूलों के लिए एक रोल मॉडल बनेंगे। यहां की पढ़ाने की शैली, प्रबंधन व्यवस्था, और नवाचारों को धीरे-धीरे अन्य स्कूलों में भी लागू किया जाएगा। दूसरे स्कूलों के शिक्षकों को यहां भ्रमण और प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा।

उम्मीद है कि इससे बिहार की पूरी सरकारी शिक्षा व्यवस्था में एक समान गुणवत्ता आएगी। और यह सच होने लगे तो गांवों के बच्चों को शहर भेजने की जरूरत ही नहीं रह जाएगी।

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