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बिहार सरकारी स्कूल टैबलेट हाजिरी

बिहार के स्कूलों में आया हाई-टेक बदलाव: अब टैबलेट से चेहरा स्कैन करके बनेगी हाजिरी

बिहार के सरकारी स्कूलों में एक बहुत बड़ी क्रांति आने वाली है। जनवरी 2025 से राज्य के लगभग 81,000 सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले तीन करोड़ से अधिक बच्चों की हाजिरी का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। अब कागज के रजिस्टर में नाम काटने वाले दिन खत्म हो जाएंगे। इसकी जगह टैबलेट पर बच्चों का चेहरा स्कैन करके डिजिटल तरीके से हाजिरी दर्ज की जाएगी।

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बिहार सरकारी स्कूल टैबलेट हाजिरी

टैबलेट का बंटवारा और सेटअप

बिहार शिक्षा विभाग पहले से ही इस काम में जुट गया है। प्रत्येक सरकारी स्कूल को बच्चों की संख्या के आधार पर दो से तीन टैबलेट दिए जा रहे हैं। ये टैबलेट कोई आम टैबलेट नहीं हैं – इनमें ई-शिक्षाकोष समेत शिक्षा विभाग के सभी जरूरी ऐप पहले से इंस्टॉल रहते हैं। सबसे अहम बात यह है कि इन डिवाइसों में किसी तरह की छेड़छाड़ की कोई गुंजाइश नहीं रहती।

स्कूल के प्रधानाध्यापक और तकनीकी रुचि रखने वाले एक नोडल शिक्षक को गूगल मीट के माध्यम से विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह प्रशिक्षण 11 दिसंबर तक पूरे राज्य में पूरा किया जाएगा। प्रशिक्षण में उन्हें सिखाया जाता है कि उपस्थिति कैसे दर्ज करें, रिपोर्ट कैसे तैयार करें, और ऐप को कैसे सही तरीके से चलाएं।

चेहरा स्कैन करके हाजिरी – प्रक्रिया क्या है?

असली काम तो जनवरी के पहले सप्ताह से शुरू होगा। हर दिन क्लास टीचर को अपनी कक्षा के सभी बच्चों का एक सामूहिक फोटो खींचना होगा। यह फोटो इस तरीके से लिया जाएगा कि हर बच्चे का चेहरा बिल्कुल साफ नजर आए और पूरी कक्षा की उपस्थिति सही तरीके से दर्ज हो सके। यह फोटो फिर ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाएगा।

दो अलग-अलग टैबलेट का इस्तेमाल होगा – एक टैबलेट से बच्चों की हाजिरी, मिड-डे मील और स्कूल की अन्य गतिविधियों का रिकॉर्ड रहेगा, जबकि दूसरा टैबलेट शिक्षकों की अपनी हाजिरी दर्ज करने के लिए होगा।

फायदे सिर्फ हाजिरी तक नहीं

यह सिस्टम बस हाजिरी लगाने के लिए नहीं आया है। इसके पीछे एक बड़ा मकसद है – सरकारी स्कूलों में होने वाले भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना।

पहली बात तो यह है कि घोस्ट स्टूडेंट्स (fake enrollment) पूरी तरह खत्म हो जाएंगे। पिछले साल बिहार में लगभग 25 लाख ऐसे मामले मिले थे जहां बच्चों को निजी स्कूलों में दर्ज दिखाया जाता था, लेकिन वे सरकारी स्कूलों के फायदे ले रहे थे।

दूसरी बात है मिड-डे मील स्कीम में फर्जीवाड़ा। जब सही हाजिरी नहीं होती तो स्कूल प्रबंधन ज्यादा खाना बनवा लेता है या खर्च को पूरा नहीं कर पाता। अब फोटो के जरिए बिल्कुल सटीक रिकॉर्ड रहेगा कि कितने बच्चे स्कूल में आए और कितनों को खाना मिलना चाहिए।

तीसरा फायदा है पारदर्शिता में बढ़ोतरी। स्कूल प्रबंधक बच्चों की उपस्थिति का रिकॉर्ड छेड़-छाड़ करके छात्रवृत्ति और अन्य लाभ देने में हेराफेरी नहीं कर पाएंगे। बिहार सरकार कक्षा 1-3 के बच्चों को 400 रुपये, कक्षा 4-5 को 500 रुपये, कक्षा 6-8 को 1,200 रुपये और कक्षा 9-12 को 2,500 रुपये सालाना छात्रवृत्ति देती है – बशर्ते वह 75 फीसदी हाजिरी पूरी करें। माता-पिता अब स्कूल प्रबंधन पर दबाव बनाकर नकली हाजिरी नहीं लगवा सकेंगे।

क्या है ई-शिक्षाकोष?

ई-शिक्षाकोष बिहार सरकार का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो शिक्षकों को बेहतर संसाधन और प्रशिक्षण देने के लिए बनाया गया है। इस प्लेटफॉर्म पर सभी जरूरी डेटा एक ही जगह इकट्ठा हो जाता है – चाहे वह बच्चों की जानकारी हो, शिक्षकों की, स्कूल के बुनियादी ढांचे की, या फिर छात्रवृत्ति और अन्य योजनाओं की।

अब यही प्लेटफॉर्म हाजिरी का डिजिटल रिकॉर्ड भी संभालेगा। सभी जिलों के अधिकारी रीयल-टाइम में बता सकते हैं कि कौन से स्कूल में कितने बच्चे आए, कितने शिक्षक हाजिर थे, और स्कूल का प्रबंधन सही तरीके से हो रहा है या नहीं।

इससे पहले केवल शिक्षकों की हाजिरी डिजिटल थी

यह पहली बार नहीं है कि बिहार ने शिक्षा में तकनीक का इस्तेमाल किया है। पहले शिक्षकों की हाजिरी ही डिजिटल करी गई थी। ई-शिक्षाकोष ऐप के जरिए शिक्षकों का चेहरा स्कैन करके उनकी उपस्थिति दर्ज की जा रही है। इसी सफलता के आधार पर अब बच्चों के लिए भी यही सिस्टम शुरू किया जा रहा है।​

संभावना और आशंकाएं

यह बदलाव बिहार की शिक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ा कदम है। तकनीकी नजरिए से देखें तो यह सिस्टम बहुत प्रभावी है – 95 फीसदी तक सटीकता के साथ बच्चों की पहचान कर सकता है।

लेकिन कुछ सवाल भी हैं। दूरदराज के स्कूलों में बिजली और इंटरनेट की समस्या तो रहेगी ही। इसके अलावा ई-शिक्षाकोष ऐप पर भी सवाल उठते रहे हैं कि क्या यह टिकाऊ होगा और लंबे समय तक काम करता रहेगा। लेकिन फिलहाल बिहार सरकार को इस सिस्टम से बहुत उम्मीदें हैं।

बड़े स्तर पर बदलाव

पटना जिले के लगभग 3,400 सरकारी स्कूलों में करीब 9 लाख बच्चों की हाजिरी इसी तरीके से दर्ज होगी। अगर पूरे राज्य के 81,223 स्कूलों की बात करें तो यह एक विशाल कदम है।​

बिहार शिक्षा परियोजना परिषद (Bihar Education Project Council) के द्वारा सभी जिलों को आदेश जारी कर दिया गया है। हर प्रमंडल में 9-9 कर्मचारी नियुक्त किए गए हैं जो इस सिस्टम को सही तरीके से चलाने के लिए जिम्मेदार होंगे।​

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