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UPSC Social Media Advisory 2026

UPSC Social Media Advisory 2026: सिविल सेवा उम्मीदवारों के लिए नई गाइडलाइंस और सख्त नियम

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने मार्च 2026 में सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2025 के सफल उम्मीदवारों के लिए एक विस्तृत सोशल मीडिया एडवाइजरी जारी की है। यह एडवाइजरी 16 और 17 मार्च 2026 को जारी की गई, जिसमें 958 अनुशंसित उम्मीदवारों (659 पुरुष और 299 महिलाएं) को भविष्य की प्रशासनिक जिम्मेदारियों के अनुरूप डिजिटल आचरण करने का निर्देश दिया गया है।

UPSC Social Media Advisory 2026
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सोशल मीडिया एडवाइजरी: मुख्य निर्देश और ‘क्या न करें’

UPSC और लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) ने स्पष्ट किया है कि एक लोक सेवक की पहचान उसके काम से होनी चाहिए, न कि सोशल मीडिया की चमक-धमक से। एडवाइजरी के प्रमुख बिंदु नीचे दिए गए हैं:

  • आत्म-प्रचार (Self-Promotion) पर रोक: सफल उम्मीदवारों को सलाह दी गई है कि वे सोशल मीडिया पर अपनी उपलब्धियों का अतिशयोक्तिपूर्ण प्रचार न करें। एडवाइजरी में ‘सेल्फ-एग्रेंडाइजमेंट’ (खुद को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करना) को कड़ाई से हतोत्साहित किया गया है।
  • कोचिंग संस्थानों के विज्ञापनों से दूरी: अक्सर देखा गया है कि परिणाम आने के बाद कोचिंग सेंटर टॉपरों की तस्वीरों का उपयोग मार्केटिंग के लिए करते हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि उम्मीदवार अपनी सफलता को किसी निजी लाभ या व्यावसायिक प्रचार के लिए इस्तेमाल न होने दें।
  • व्यावसायिक एंडोर्समेंट: एक सरकारी अधिकारी के रूप में किसी ब्रांड या उत्पाद का प्रचार करना सेवा नियमों के खिलाफ है। भविष्य के अधिकारियों को किसी भी प्रकार के उपहार, प्रलोभन या मुफ्त पब्लिसिटी से दूर रहने को कहा गया है।
  • ‘सोचें और फिर पोस्ट करें’ (Pause and Reflect): उम्मीदवारों को निर्देश दिया गया है कि किसी भी पोस्ट को साझा करने से पहले उसके प्रभाव पर विचार करें। यदि किसी पोस्ट से गलतफहमी पैदा होने की संभावना हो, तो चुप रहना ही बेहतर है।

2026 की अधिसूचना (Notification) में तकनीकी बदलाव

केवल सोशल मीडिया ही नहीं, बल्कि UPSC ने 2026 की आवेदन प्रक्रिया में भी कई बड़े सुरक्षा बदलाव किए हैं ताकि धांधली रोकी जा सके:

  1. फोर-स्टेज एप्लीकेशन सिस्टम: अब पुराने OTR की जगह चार चरणों वाली अधिक सुरक्षित प्रक्रिया लागू की गई है।
  2. लाइव फोटो कैप्चर (Mandatory Live Photo): उम्मीदवारों को फॉर्म भरते समय वेबकैम या मोबाइल के माध्यम से अपनी ‘लाइव फोटो’ लेनी होगी। यह फोटो अपलोड की गई पासपोर्ट साइज फोटो से मेल खानी चाहिए।
  3. ट्रिपल सिग्नेचर नियम: आवेदन के दौरान उम्मीदवारों को एक सफेद कागज पर तीन बार लंबवत (vertically) हस्ताक्षर करके अपलोड करना होगा।
  4. फेस ऑथेंटिकेशन: परीक्षा केंद्रों पर अब उम्मीदवारों का चेहरा पहचाने (Face Authentication) के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा ताकि फर्जी उम्मीदवारों को पकड़ा जा सके।

कोचिंग इंडस्ट्री और ‘टॉपर कल्चर’ पर प्रहार

UPSC ने पाया है कि सोशल मीडिया पर ‘ऑफिसर-इन्फ्लुएंसर’ बनने की होड़ मची है, जो प्रशासनिक तटस्थता (Neutrality) के लिए खतरा है। दिल्ली के कोचिंग हब और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ‘टॉपर टॉक्स’ और पॉडकास्ट के माध्यम से सफलता का व्यवसायीकरण किया जा रहा है। आयोग का मानना है कि इससे न केवल संस्थान की छवि खराब होती है, बल्कि उम्मीदवारों के बीच भी ‘दिखावे’ की संस्कृति पनपती है।

असम सरकार ने भी इस दिशा में कड़ा कदम उठाते हुए कोचिंग सेंटरों को निर्देश दिया है कि वे सफल उम्मीदवारों की तस्वीरों वाले विज्ञापन एक सप्ताह के भीतर हटा लें।

अनुशासनात्मक चेतावनी और कानूनी पहलू

आयोग ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर की गई कोई भी टिप्पणी या पोस्ट उम्मीदवार के भविष्य के करियर पर भारी पड़ सकती है।

  • मिसाल के तौर पर: पिछले दो वर्षों में UPSC ने कई अधिकारियों के सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक करने के निर्देश दिए हैं और राज्य सरकारों को उनके आचरण के बारे में पत्र लिखे हैं।
  • न्यायिक मिसाल: फरवरी 2026 में दिल्ली हाई कोर्ट ने मदनजीत कुमार बनाम सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड मामले में कहा कि सोशल मीडिया पर विभाग के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाना ‘कदाचार’ (Misconduct) माना जा सकता है। हालांकि, अदालत ने बर्खास्तगी की सजा को अत्यधिक माना, लेकिन कदाचार की पुष्टि की।

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