भारतीय रेलवे को अक्सर ‘देश की जीवनरेखा’ कहा जाता है। हर दिन करोड़ों लोग अपनी मंजिलों तक पहुँचने के लिए रेल का सहारा लेते हैं। अक्सर सफर की भागदौड़ में हम अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन अब रेलवे इस तस्वीर को बदल रहा है। ‘फिट इंडिया मूवमेंट’ और आधुनिकिकरण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए अब देश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर ‘हेल्थ एटीएम’ (Health ATM) लगाए जा रहे हैं।
यह सुविधा उन यात्रियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो समय की कमी या लैब के महंगे खर्च की वजह से अपनी नियमित जांच नहीं करा पाते। आइए जानते हैं कि यह हेल्थ एटीएम क्या है, इसमें कौन सी जांचें होती हैं और इसका खर्च कितना है।

क्या है हेल्थ एटीएम? (Health ATM क्या है?)
हेल्थ एटीएम एक अत्याधुनिक ‘वॉकिंग मेडिकल कियोस्क’ है। यह दिखने में तो साधारण एटीएम मशीन जैसा ही है, लेकिन इसका काम पैसे निकालना नहीं, बल्कि आपकी सेहत का हिसाब-किताब बताना है। इन मशीनों में कई मेडिकल सेंसर और उपकरण लगे होते हैं, जो मिनटों में आपके शरीर के महत्वपूर्ण मापदंडों (Vitals) की जांच कर लेते हैं। इन कियोस्क पर आपकी मदद के लिए हमेशा दो प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ मौजूद रहते हैं।
मात्र ₹50 में 16 तरह की जांचें
रेलवे के इस नए प्रयास की सबसे बड़ी खूबी इसकी किफायती कीमत है। जहां प्राइवेट लैब में साधारण खून की जांच या बीपी चेक कराने में ही सैकड़ों रुपये खर्च हो जाते हैं, वहीं हेल्थ एटीएम पर सुविधाएं बेहद सस्ती हैं:
- 6 मिनट का चेकअप (₹50): इसमें 16 नॉन-इनवेसिव (बिना सुई लगाए) जांचें शामिल हैं।
- 9 मिनट का चेकअप (₹100): इसमें 18 या उससे अधिक जांचें होती हैं, जिनमें हीमोग्लोबिन और ब्लड शुगर जैसे टेस्ट भी शामिल किए जाते हैं।
मुख्य जांचों की लिस्ट:
- बॉडी मास इंडेक्स (BMI) और वजन
- ब्लड प्रेशर (BP) और पल्स रेट
- शरीर का तापमान और ऑक्सीजन लेवल (SpO2)
- हड्डियों का घनत्व (Bone Mass) और मांसपेशियों की स्थिति
- मेटाबॉलिक उम्र और हाइड्रेशन लेवल
- ब्लड शुगर और हीमोग्लोबिन (विशेष पैकेज में)
कैसे काम करता है यह सिस्टम?
हेल्थ एटीएम का इस्तेमाल करना बहुत आसान है। आपको बस कियोस्क पर जाना है, अपनी बेसिक जानकारी (नाम, उम्र, मोबाइल नंबर) देनी है और पैरामेडिकल स्टाफ की मदद से टेस्ट शुरू करना है। जांच पूरी होते ही रिपोर्ट आपके ईमेल या व्हाट्सएप (WhatsApp) पर तुरंत भेज दी जाती है। आप चाहें तो मौके पर ही रिपोर्ट का प्रिंटआउट भी ले सकते हैं।
सबसे खास बात यह है कि अगर जांच में कोई गंभीर समस्या (जैसे बहुत अधिक बीपी या अनियमित ईसीजी) पाई जाती है, तो इन कियोस्क के जरिए आप वीडियो कॉल पर डॉक्टर से सलाह (Telemedicine) भी ले सकते हैं।
किन स्टेशनों पर मिलेगी यह सुविधा?
रेलवे ने इस योजना को ‘न्यू इनोवेटिव नॉन-फेयर रेवेन्यू आइडियाज स्कीम’ (NINFRIS) के तहत शुरू किया है। इसकी शुरुआत उत्तर प्रदेश के लखनऊ (चारबाग) स्टेशन से हुई थी और अब यह देश के कई हिस्सों में फैल चुका है:
- उत्तर भारत: लखनऊ, गोरखपुर, गोंडा, प्रयागराज, बस्ती और नई दिल्ली के कुछ प्रमुख स्टेशन।
- मुंबई और महाराष्ट्र: ठाणे, कल्याण, लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT), बोरीवली, चर्चगेट और मुंबई सेंट्रल।
- अन्य शहर: नागपुर, भोपाल, सिकंदराबाद, विजयवाड़ा, भागलपुर और आसनसोल।
2026 तक ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत बनने वाले आधुनिक स्टेशनों पर भी इन हेल्थ एटीएम को लगाने की योजना है।
यात्रियों के लिए क्यों है जरूरी?
अक्सर लंबे सफर के दौरान किसी यात्री को अचानक बेचैनी या तेज बुखार महसूस होता है। ऐसे में वह उलझन में रहता है कि सफर जारी रखे या नहीं। हेल्थ एटीएम की मदद से वह तुरंत अपनी स्थिति जान सकता है और समय रहते सही फैसला ले सकता है। इसके अलावा, प्लेटफॉर्म पर ट्रेन का इंतजार करते समय जो समय बर्बाद होता है, उसका उपयोग अपनी सेहत की जांच के लिए करना एक बेहतरीन विचार है।
भारतीय रेलवे का यह कदम तकनीक और संवेदनशीलता का एक अद्भुत संगम है। हेल्थ एटीएम न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को सस्ता बना रहे हैं, बल्कि इन्हें आम आदमी की पहुंच के भीतर भी ला रहे हैं। अगली बार जब आप स्टेशन पर हों, तो अपनी सेहत को 6 मिनट जरूर दें। याद रहे, ‘जान है तो जहान है’।
















