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Milkvilla: बिहार के भाइयों का कमाल, बिना प्लास्टिक और मिलावट के 10 मिनट में घर पहुँचा रहे शुद्ध A2 दूध

आज के समय में जब शहरों में शुद्ध दूध मिलना एक बड़ी चुनौती बन गया है, बिहार के मुजफ्फरपुर से शुरू हुए एक स्टार्टअप ‘Milkvilla’ ने इस समस्या का एक शानदार समाधान निकाला है। आईआईटी (IIT) और मरीन इंजीनियरिंग के बैकग्राउंड वाले भाइयों ने मिलकर एक ऐसी तकनीक तैयार की है, जो न केवल शुद्ध दूध आप तक पहुँचाती है, बल्कि पर्यावरण को भी सुरक्षित रखती है

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कौन हैं इस बदलाव के पीछे? (Founders’ Story)

Milkvilla की नींव मन्नू जी (Mannu Jee) और अमन जी (Aman Jee) ने मिलकर रखी थी। मन्नू जी एक प्रोफेशनल मरीन इंजीनियर रहे हैं और अमन जी आईआईटी पटना (IIT Patna) के पूर्व छात्र हैं । इनके साथ पीयूष चचोंधिया (पूर्व मर्चेंट नेवी ऑफिसर), मयंक पाराशर और अवकाश कुमार (IIT खड़गपुर) जैसे एक्सपर्ट्स की एक मज़बूत टीम जुड़ी हुई है । इन युवाओं ने ग्लोबल कंपनियों की हाई-प्रोफाइल नौकरियां छोड़कर खेती और डेयरी क्षेत्र में कुछ अलग करने की ठानी ।

Milkvilla की खासियत: 12 घंटे का ‘स्प्रिंट’

आमतौर पर बाज़ारों में मिलने वाला पैकेट वाला दूध 7 से 10 दिन पुराना होता है और उसे सुरक्षित रखने के लिए कई तरह के प्रोसेस (जैसे पाश्चुरीकरण) से गुज़ारा जाता है । लेकिन Milkvilla का मॉडल बिल्कुल अलग है। यह ’12-घंटे के स्प्रिंट’ पर काम करता है—यानी गाय के दूध निकालने के 12 घंटे के भीतर वह आपके दरवाज़े पर होता है

इन्होंने ‘Raw Milk’ यानी कच्चा दूध पहुँचाने पर ज़ोर दिया है, क्योंकि इनका मानना है कि दूध को बहुत अधिक उबालने या प्रोसेस करने से उसके प्राकृतिक एंजाइम और पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं

टेक्नोलॉजी और शुद्धता का मेल

Milkvilla सिर्फ दूध बेचने वाली कंपनी नहीं, बल्कि एक ‘टेक-डेयरी’ है। इनके ऑटो-रिक्शा में ब्लूटूथ इनेबल्ड (Bluetooth-enabled) और ऐप-कंट्रोल वाली मशीनें लगी होती हैं ।

  1. डिजिटल डिस्पेंसिंग: ग्राहक अपने ऐप के ज़रिए जितनी मात्रा में दूध चाहिए, उसे कंट्रोल कर सकते हैं। यह सीधा आपकी अपनी बरनी या बर्तन में आता है ।
  2. IOT मॉनिटरिंग: दूध को 0-4°C के तापमान पर रखा जाता है ताकि वह खराब न हो ।
  3. टैम्पर-प्रूफ सिस्टम: मशीनें डिजिटल रूप से लॉक होती हैं, जिससे रास्ते में मिलावट की कोई गुंजाइश नहीं रहती ।
  4. 10 मिनट डिलीवरी: अब कंपनी ने बेंगलुरु जैसे शहरों में चुनिंदा इलाकों में 10 मिनट के भीतर दूध पहुँचाने की सुविधा भी शुरू की है ।

बिना प्लास्टिक का वादा (Eco-Friendly Approach)

Milkvilla का सबसे बड़ा प्रभाव पर्यावरण पर पड़ रहा है। इन्होंने अपनी पूरी सप्लाई चेन से प्लास्टिक को खत्म कर दिया है

  • दूध स्टेनलेस स्टील की केन में आता है ।
  • पनीर को केले के पत्तों में लपेटकर दिया जाता है ।
  • मक्खन को नारियल के छिलकों में पैक किया जाता है ।
  • दही मिट्टी के मटकों (Matkas) में दी जाती है । अब तक इन्होंने 20 लाख से ज़्यादा प्लास्टिक के पैकेटों को इस्तेमाल होने से बचाया है ।

Milkvilla प्रोडक्ट्स की लंबी लिस्ट

Milkvilla केवल दूध ही नहीं, बल्कि पारंपरिक तरीके से बने कई डेयरी उत्पाद बेचता है :

  • Desi A2 Raw Cow Milk: बिना किसी मिलावट और प्रोसेसिंग के।
  • Bilona Ghee: पारंपरिक ‘बिलोना’ विधि से हाथ से मथा हुआ शुद्ध घी ।
  • A2 Paneer & Curd: ताज़ा और जैविक तरीके से तैयार।
  • मिठाइयाँ: इनके A2 दूध से बने ‘किंग साइज’ रसगुल्ले और पेड़े काफी लोकप्रिय हैं ।

विस्तार और भविष्य

मुजफ्फरपुर से शुरू हुआ यह सफर आज पटना और बेंगलुरु तक पहुँच चुका है | कंपनी अब चंडीगढ़ और मुरादाबाद जैसे शहरों में भी अपनी पहुँच बढ़ा रही है । बिहार सरकार और भारत सरकार ने इनके काम को सराहा है और लगभग ₹40 लाख का अनुदान (Grant) भी दिया है । वर्तमान में इनका मासिक राजस्व ₹1 करोड़ से अधिक है ।

Milkvilla ने साबित कर दिया है कि अगर आधुनिक तकनीक को परंपरा के साथ जोड़ा जाए, तो गाँव के किसान और शहर के उपभोक्ता—दोनों का फायदा हो सकता है। यह स्टार्टअप ‘बिहार से बेंगलुरु’ तक शुद्धता और स्वास्थ्य का संदेश पहुँचा रहा है |

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