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अमहारा: Amhara Doctors Village

अमहारा: पटना का वो “डॉक्टरों वाला गाँव” जहाँ हर घर में बसती है सफलता | Amhara Doctors Village

बिहार के पटना जिले में एक ऐसा गाँव है जिसने पूरे देश के सामने शिक्षा और सफलता की एक अद्भुत मिसाल पेश की है। बिहटा ब्लॉक का ‘अमहारा’ गाँव आज अपनी किसी पारंपरिक पहचान की वजह से नहीं, बल्कि अपनी बौद्धिक संपदा की वजह से पूरी दुनिया में मशहूर है। इसे गर्व से “डॉक्टरों का गाँव” (Doctors’ Village) कहा जाता है।

यहाँ की मिट्टी से निकले डॉक्टर आज न केवल पटना या दिल्ली में, बल्कि अमेरिका और इंग्लैंड जैसे देशों में भी अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। आइए जानते हैं अमहारा गाँव की इस प्रेरणादायक यात्रा और यहाँ के कुछ अनछुए पहलुओं के बारे में।

अमहारा: Amhara Doctors Village

अमहारा: जहाँ हर घर से डॉक्टर निकलता है

पटना से लगभग 30-40 किलोमीटर दूर स्थित अमहारा गाँव की आबादी लगभग 13,000 है । इस गाँव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ 325 से भी अधिक घर ऐसे हैं, जहाँ कम से कम एक सदस्य डॉक्टर है । इस गाँव में शिक्षा का स्तर इतना ऊँचा है कि यहाँ की साक्षरता दर लगभग 70.68% है, जो बिहार के कई अन्य ग्रामीण इलाकों की तुलना में काफी बेहतर है

गाँव की सड़कों पर चलते हुए आपको बड़े-बड़े आलीशान मकान दिखेंगे, जिनमें से लगभग 70% घरों में एयर कंडीशनर (AC) लगे हुए हैं । यह आर्थिक संपन्नता खेती से नहीं, बल्कि यहाँ के युवाओं की कड़ी मेहनत और डॉक्टरी के पेशे से आई है।

गाँव के चमकते सितारे: दिग्गज डॉक्टरों की सूची

अमहारा गाँव ने चिकित्सा जगत को कई बड़े नाम दिए हैं, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है:

  1. डॉ. शशि रंजन: ये ईएनटी (नाक, कान और गला) विशेषज्ञ के रूप में देश-दुनिया में विख्यात हैं। शुरुआती पढ़ाई इसी गाँव के सीमित संसाधनों में करने के बावजूद, उन्होंने अपनी काबिलियत के दम पर चिकित्सा क्षेत्र में बड़ा मुकाम हासिल किया।
  2. डॉ. सत्यजीत: इन्हें एक ‘सेवाभावी’ डॉक्टर के रूप में जाना जाता है। वे डॉ. द्वारकानाथ कोटनिस और प्रसिद्ध किताब ‘द सिटाडेल’ (The Citadel) से प्रेरित होकर डॉक्टर बने। वे आज भी गाँव लौटकर मुफ्त स्वास्थ्य शिविर लगाते हैं और गरीब मरीजों का इलाज करते हैं।
  3. स्वर्गीय डॉ. उत्पल कांत: बिहार के मशहूर बाल रोग विशेषज्ञों में से एक डॉ. उत्पल कांत इसी गाँव के थे। उनके बेटे सिद्धार्थ विक्रम वर्तमान में राजनीति में सक्रिय हैं।
  4. डॉ. सारिका राय: गाँव की बेटियों ने भी पीछे मुड़कर नहीं देखा। डॉ. सारिका राय पटना की एक प्रतिष्ठित स्त्री रोग और बांझपन विशेषज्ञ (Gynaecologist & Infertility Specialist) हैं।

शिक्षा और संस्थानों का केंद्र

अमहारा गाँव अब केवल डॉक्टर ‘पैदा’ नहीं करता, बल्कि उन्हें ‘तैयार’ भी करता है। गाँव में ‘नेताजी सुभाष मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल’ (NSMCH) स्थित है, जिसकी स्थापना सितवन्तो देवी महिला कल्याण संस्थान द्वारा की गई है । यहाँ 150 एमबीबीएस सीटें हैं और कई पीजी कोर्सेज भी उपलब्ध हैं । इसके अलावा, इसी क्षेत्र में IIT पटना और NIT पटना जैसे बड़े संस्थानों का होना इस गाँव को एक “एजुकेशन हब” बनाता है।

एक कड़वी सच्चाई: “दीपक तले अंधेरा”

इतने सारे डॉक्टर देने वाले इस गाँव की एक विडंबना भी है। जहाँ गाँव के लाल विदेशों में बड़े-बड़े ऑपरेशन्स कर रहे हैं, वहीं गाँव का अपना ‘सरकारी उप-स्वास्थ्य केंद्र’ अक्सर बंद रहता है । रिपोर्टों के अनुसार, सुविधा और स्टाफ की कमी के कारण ग्रामीण आज भी बुनियादी इलाज के लिए झोलाछाप डॉक्टरों या पटना के अस्पतालों पर निर्भर हैं । कभी-कभी तो अस्पताल परिसर का उपयोग मवेशियों को बांधने के लिए भी किया जाता है । यह स्थिति “ब्रेन ड्रेन” और ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की एक बड़ी चुनौती को दर्शाती है।

अमहारा Doctors Village

अमहारा गाँव की कहानी यह साबित करती है कि अगर किसी समाज में शिक्षा को प्राथमिकता दी जाए, तो वह गरीबी और पिछड़ेपन की बेड़ियाँ तोड़ सकता है। यहाँ के युवाओं के लिए डॉक्टर बनना केवल एक करियर नहीं, बल्कि एक पारिवारिक परंपरा बन चुका है। हालांकि, स्थानीय स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार की जरूरत है, फिर भी अमहारा पूरे बिहार के लिए प्रेरणा का एक अटूट स्रोत बना हुआ है।

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