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अनिल अग्रवाल का भावुक प्रण: बेटे की मौत के बाद समाज सेवा के लिए समर्पित किया अपना साम्राज्य

जीवन की सबसे बड़ी त्रासदी एक पिता के लिए अपने जवान बेटे को विदा करना होती है। जनवरी 2026 में, भारत के दिग्गज उद्योगपति और वेदांता रिसोर्सेज के चेयरमैन अनिल अग्रवाल के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उनके 49 वर्षीय बेटे अग्निपेश अग्रवाल का अमेरिका में अचानक निधन हो गया। इस गहरे व्यक्तिगत दुख की घड़ी में अनिल अग्रवाल ने एक ऐसा फैसला लिया जिसने पूरे देश का दिल जीत लिया। उन्होंने अपने बेटे की याद में अपनी 75% संपत्ति समाज सेवा के लिए दान करने का अपना पुराना संकल्प फिर से दोहराया है।

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एक हँसता-खेलता जीवन और अचानक आया मोड़

अग्निपेश अग्रवाल केवल एक सफल बिजनेस लीडर ही नहीं थे, बल्कि वे एक खिलाड़ी और संगीतकार भी थे। 3 जून 1976 को पटना के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे अग्निपेश ने अजमेर के प्रसिद्ध मेयो कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की थी। जनवरी 2026 की शुरुआत में अमेरिका में एक स्कीइंग ट्रिप के दौरान उनके साथ एक दुर्घटना हुई।

शुरुआत में न्यूयॉर्क के माउंट सिनाई अस्पताल में उनका इलाज सफल रहा और डॉक्टर उनकी रिकवरी को लेकर आश्वस्त थे। अनिल अग्रवाल ने खुद बताया कि परिवार को लगा था कि बुरा वक्त बीत चुका है। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। 7 जनवरी 2026 को अचानक कार्डियक अरेस्ट (दिल की धड़कन रुक जाना) के कारण उनका निधन हो गया। अनिल अग्रवाल ने इस दिन को अपने जीवन का “सबसे काला दिन” बताया।

अनिल अग्रवाल 75% संपत्ति दान करने का संकल्प: एक साझा सपना

अनिल अग्रवाल ने सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक पोस्ट साझा की, जिसमें उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने बेटे ‘अग्नि’ (अग्निपेश) से एक वादा किया था। यह वादा था अपनी कमाई का 75% हिस्सा समाज को वापस लौटाने का। अग्निपेश की मृत्यु के बाद उन्होंने इस प्रतिज्ञा को और अधिक मजबूती से निभाने का फैसला किया है।

अग्रवाल ने लिखा, “अग्नि मानता था कि हमारे पास एक राष्ट्र के रूप में किसी चीज की कमी नहीं है। हम पीछे क्यों रहें? हमने मिलकर एक सपना देखा था—कि भारत का कोई बच्चा भूखा न सोए, किसी को शिक्षा से वंचित न रहना पड़े और हर महिला अपने पैरों पर खड़ी हो।”

इस संकल्प के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • कुपोषण मुक्त भारत: देश के 7.5 करोड़ से अधिक गरीब बच्चों को पोषण और स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना।
  • नंद घर पहल: आंगनवाड़ियों को आधुनिक केंद्रों में बदलकर बच्चों और महिलाओं का सशक्तिकरण करना।
  • महिलाओं की आर्थिक आजादी: ग्रामीण महिलाओं को कौशल विकास के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाना।
  • युवाओं को रोजगार: हर युवा भारतीय को सार्थक काम के अवसर मिले, ऐसा ईकोसिस्टम तैयार करना।

पटना की गलियों से वैश्विक साम्राज्य तक का सफर

अनिल अग्रवाल का यह दान का स्वभाव उनकी जड़ों से जुड़ा है। 1954 में पटना में जन्मे अनिल अग्रवाल ने केवल 19 साल की उम्र में एक टिफिन बॉक्स और बिस्तर लेकर मुंबई का रुख किया था। नौ बार व्यापार में असफल होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और दसवीं बार में ‘वेदांता’ की नींव रखी।

उनका मानना है कि धन केवल एक ट्रस्टी के रूप में हमारे पास होता है। उन्होंने 2014 में पहली बार अपनी संपत्ति दान करने की घोषणा की थी और 2021 में वे अपनी बेटी प्रिया अग्रवाल हेब्बार के साथ दुनिया के सबसे बड़े दानवीरों के समूह ‘द गिविंग प्लेज’ (The Giving Pledge) में शामिल हुए थे। अब बेटे की याद में वे एक “सादा जीवन” जीने और अपना पूरा ध्यान परोपकार पर लगाने के लिए तैयार हैं।

अग्निपेश की विरासत और भविष्य

अग्निपेश अग्रवाल ने अपने करियर में फुजैरा गोल्ड (Fujairah Gold) जैसी कंपनी स्थापित की और हिंदुस्तान जिंक के चेयरमैन के रूप में भी सेवा दी। उनके सहकर्मी उन्हें एक विनम्र और जमीन से जुड़े इंसान के रूप में याद करते हैं। अनिल अग्रवाल अब वेदांता के हजारों कर्मचारियों को ही अपना बच्चा मानते हैं और कहते हैं कि अग्निपेश की ज्योति अब इन युवाओं और समाज सेवा के कार्यों के माध्यम से जलती रहेगी।

इस दुखद घटना ने भारतीय कॉर्पोरेट जगत को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सफलता केवल बैंक बैलेंस से नहीं, बल्कि दूसरों के जीवन में लाए गए बदलाव से मापी जाती है। अनिल अग्रवाल का यह संकल्प उनके बेटे के लिए एक ऐसी श्रद्धांजलि है जो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य संवारेगी।

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