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भागलपुर सृजन घोटाला: समाज सेवा की आड़ में रची गई ₹2400 करोड़ की लूट की पूरी कहानी

बिहार की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में जब भी भ्रष्टाचार की बात होती है, तो ‘भागलपुर सृजन घोटाला’ का जिक्र जरूर आता है। यह घोटाला केवल सरकारी पैसे की चोरी नहीं था, बल्कि एक ऐसी व्यवस्था का निर्माण था जिसने सालों तक राज्य की नाक के नीचे एक समानांतर बैंकिंग प्रणाली चलाई।

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क्या है भागलपुर सृजन घोटाला घोटाला?

सृजन घोटाला सरकारी धन के अवैध हस्तांतरण का मामला है। इसमें भागलपुर जिले के विभिन्न सरकारी विभागों (जैसे भू-अर्जन कार्यालय, जिला कल्याण विभाग) का पैसा सीधे सरकारी खातों में जाने के बजाय ‘सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड’ (SMVSSL) नाम के एक एनजीओ के खातों में डाल दिया गया । अनुमान है कि यह घोटाला ₹1,000 करोड़ से लेकर ₹2,400 करोड़ के बीच का है

NGO से ‘समानांतर बैंक’ तक का सफर

इसकी शुरुआत 1990 के दशक में मनोरमा देवी ने की थी । शुरू में इसका मकसद महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना था, लेकिन धीरे-धीरे यह सत्ता के करीब पहुंच गया। 2004 में इसे सरकारी भवन में जगह मिली और फिर शुरू हुआ सरकारी धन को अपनी तिजोरी में भरने का खेल । मनोरमा देवी की मृत्यु फरवरी 2017 में हुई और उनकी मौत के कुछ महीनों बाद ही इस घोटाले की परतें खुलनी शुरू हुईं ।

कैसे होता था खेल?

सृजन के काम करने का तरीका किसी फिल्म की पटकथा जैसा था:

  1. चेक का खेल: एनजीओ के लोग बैंकों से मिलकर सरकारी अधिकारियों की चेकबुक हासिल कर लेते थे ।
  2. जाली हस्ताक्षर: सरकारी राशि के चेक पर जिलाधिकारी (DM) या अन्य अधिकारियों के जाली हस्ताक्षर किए जाते और पैसा सृजन के खातों में जमा हो जाता ।
  3. ब्लैंक एंडोर्समेंट: कुछ मामलों में आईएएस अधिकारियों ने खुद चेक के पीछे ‘ब्लैंक एंडोर्समेंट’ (हस्ताक्षर) किए, जिससे बैंक प्रबंधकों को पैसा सृजन के खाते में डालने का रास्ता मिल गया ।
  4. मुनाफाखोरी: सरकारी पैसे को रियल एस्टेट और निजी निवेश में लगाया जाता और उससे मिलने वाले भारी ब्याज को आरोपी आपस में बांट लेते थे ।

भागलपुर सृजन घोटाला: मुख्य किरदार और रसूखदार नाम

इस घोटाले में ‘त्रिकोणीय सांठगांठ’ थी—नौकरशाह, बैंक अधिकारी और रसूखदार नेता।

  • मनोरमा देवी: मुख्य मास्टरमाइंड (मृत)।
  • अमित कुमार और रजनी प्रिया: मनोरमा देवी के बेटे और बहू, जो लंबे समय तक फरार रहे । रजनी प्रिया को अगस्त 2023 में गिरफ्तार किया गया था ।
  • प्रशासनिक अधिकारी: 1986 बैच के आईएएस के.पी. रमैया और 2004 बैच के आईएएस वीरेन्द्र यादव का नाम मुख्य आरोपियों में शामिल है।
  • सतीश कुमार झा: एनजीओ का ऑडिटर और मनोरमा देवी का करीबी सहयोगी ।

2024-2025: कानूनी कार्यवाही का ताजा हाल

सृजन घोटाले की जांच सीबीआई (CBI) और ईडी (ED) कर रही है। पिछले कुछ महीनों में इसमें कई महत्वपूर्ण मोड़ आए हैं:

  • वीरेन्द्र यादव पर आरोप तय: अगस्त 2025 में पटना की विशेष सीबीआई अदालत ने पूर्व डीएम वीरेन्द्र प्रसाद यादव के खिलाफ जालसाजी और भ्रष्टाचार के तहत आरोप (Charges) तय किए हैं।
  • सतीश कुमार झा की गिरफ्तारी: दिसंबर 2024 में सीबीआई ने मुख्य आरोपी सतीश कुमार झा को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया और उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया ।
  • रजनी प्रिया को जमानत: पटना हाईकोर्ट ने सितंबर 2024 में मुख्य आरोपी रजनी प्रिया को नियमित जमानत दे दी ।
  • सीबीआई को फटकार: मई 2025 में हाईकोर्ट ने जांच में देरी और हलफनामा दाखिल न करने पर सीबीआई को कड़ी चेतावनी दी थी।

भागलपुर सृजन घोटाला : CFMS का उदय

इस घोटाले ने बिहार सरकार को हिलाकर रख दिया था। भविष्य में ऐसी लूट को रोकने के लिए सरकार ने 2019 में CFMS (Comprehensive Financial Management System) लागू किया । अब सरकारी लेनदेन डिजिटल सिग्नेचर के बिना संभव नहीं है और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की जाती है

सृजन घोटाला केवल पैसों की हेराफेरी नहीं, बल्कि आम जनता के उस विश्वास का कत्ल था जो वह सिस्टम पर करती है। गरीबों के कल्याण के लिए आए करोड़ों रुपये कुछ लोगों की ऐयाशी और निवेश का जरिया बन गए। हालांकि कानून का शिकंजा कस रहा है, लेकिन जनता को अब भी उस दिन का इंतजार है जब लूटी गई पूरी पाई वापस सरकारी खजाने में आएगी।

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