क्या आप जानते हैं कि अब बिहार में नियम तोड़ने पर पुलिस वाले का सामने होना ज़रूरी नहीं है? जी हाँ, बिहार सरकार ने सुरक्षा और यातायात को लेकर एक ऐसा प्लान तैयार किया है, जिसके तहत न केवल शहरों की मुख्य सड़कें, बल्कि आपके गाँव की गलियाँ भी ‘तीसरी आँख’ यानी CCTV की निगरानी में होंगी। और सबसे बड़ी बात, अब “आम आदमी” भी ट्रैफिक पुलिस का काम आसान कर सकेगा।
आइए, इस पूरे प्लान को डिकोड करते हैं और समझते हैं कि इसका आपकी रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर क्या असर पड़ेगा।

1. ‘हर गाँव में कैमरा’ – क्या है यह महायोजना?
अक्सर हम सुनते थे कि स्मार्ट सिटी में कैमरे लगे हैं, लेकिन अब बिहार सरकार इसे ‘स्मार्ट विलेज’ की तरफ ले जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य अपराध पर लगाम लगाना और शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू करना है।
- कितना बड़ा है दायरा? राज्य की सभी 8,046 पंचायतों और लगभग 1.14 लाख वार्डों को इस दायरे में लाया जाएगा। योजना के मुताबिक, हर पंचायत के मुख्य चौराहों, प्रवेश द्वार और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में हाई-डेफिनिशन (HD) सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
- ज़िम्मेदारी किसकी? इस काम की कमान पंचायती राज विभाग ने सीधे ‘मुखिया’ और वार्ड सदस्यों को सौंपी है। 15वें वित्त आयोग से मिलने वाले अनुदान और राज्य सरकार के फंड का इस्तेमाल करके ये कैमरे खरीदे और लगाए जाएंगे।
- मकसद क्या है? गाँवों में अक्सर छोटे-मोटे झगड़े, चोरी या शराब की तस्करी पुलिस की नज़रों से बच जाती थी। अब इन कैमरों की मदद से पुलिस के पास हर घटना का वीडियो सबूत होगा। यह विशेष रूप से महिला सुरक्षा और “शराब माफिया” की गतिविधियों को रोकने के लिए किया जा रहा है।
2. क्या सच में “आम लोग” काट सकेंगे चालान?
यह सवाल आजकल हर किसी की जुबान पर है। सोशल मीडिया पर चर्चा है कि अब आम जनता भी चालान काट सकेगी। यहाँ थोड़ा स्पष्टीकरण ज़रूरी है। आप सीधे चालान नहीं काटेंगे, लेकिन आप चालान कटवा ज़रूर सकते हैं।
बिहार पुलिस ने “सहभागी पुलिसिंग” (Participatory Policing) को बढ़ावा दिया है। इसका मतलब है कि जनता पुलिस की आँख और कान बनेगी।
यह सिस्टम कैसे काम करता है?
अगर आप सड़क पर किसी को ट्रैफिक नियम तोड़ते हुए देखते हैं (जैसे- बिना हेलमेट बाइक चलाना, ट्रिपल राइडिंग, रॉन्ग साइड ड्राइविंग, या रेड लाइट जंप करना), तो आपको बस यह करना है:
- फोटो या वीडियो लें: अपने स्मार्टफोन से उल्लंघन की साफ़ तस्वीर या वीडियो लें जिसमें गाड़ी का नंबर (Number Plate) साफ़ दिखे।
- व्हाट्सएप या सोशल मीडिया पर भेजें:
- पटना ट्रैफिक पुलिस ने एक व्हाट्सएप नंबर (9234600501) जारी किया है जहाँ आप ये सबूत भेज सकते हैं।
- इसके अलावा, आप ट्विटर (X) या फेसबुक पर @Bihar_Police या स्थानीय ट्रैफिक पुलिस को टैग करके फोटो पोस्ट कर सकते हैं।
- कार्रवाई: ट्रैफिक पुलिस की IT सेल आपके भेजे गए सबूत की जाँच करेगी। अगर उल्लंघन सही पाया गया, तो गाड़ी मालिक के घर ई-चालान (E-Challan) भेज दिया जाएगा।
तो तकनीकी रूप से, आप चालान रसीद नहीं फाड़ रहे, लेकिन आपकी एक फोटो नियम तोड़ने वाले की जेब ज़रूर ढीली करवा सकती है। इसे ही बोलचाल में “आम आदमी द्वारा चालान” कहा जा रहा है।
3. बिहार पब्लिक सेफ्टी एक्ट 2024: अब दुकानों पर कैमरा ज़रूरी
सरकार ने सुरक्षा को लेकर एक नया कानून भी बनाया है—बिहार सार्वजनिक सुरक्षा (उपाय) प्रवर्तन अधिनियम, 2024।
इस कानून के तहत, अब निजी प्रतिष्ठानों जैसे दुकानें, मॉल, अस्पताल, बैंक, और बड़े रिहायशी अपार्टमेंट्स के लिए CCTV कैमरा लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
- दुकानदारों को अपनी लागत पर अच्छी क्वालिटी के कैमरे लगाने होंगे।
- कम से कम 30 दिनों का वीडियो फुटेज स्टोर करके रखना होगा।
- अगर पुलिस किसी अपराध की जाँच के लिए फुटेज मांगती है, तो उन्हें देना अनिवार्य होगा। ऐसा न करने पर जुर्माने का प्रावधान है।
यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि पुलिस को केवल सरकारी कैमरों पर निर्भर न रहना पड़े। पूरा शहर और बाज़ार निगरानी के एक जाल (Network) में आ जाएगा।
4. जेलों की सुरक्षा भी होगी हाई-टेक
सड़कों और गाँवों के साथ-साथ, बिहार की जेलों को भी अपग्रेड किया जा रहा है। गृह विभाग ने राज्य की 53 जेलों में लगभग 9,000 से अधिक नए सीसीटीवी कैमरे लगाने की मंज़ूरी दी है। इसमें लगभग 155 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
इन कैमरों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल होगा जो जेल के अंदर किसी भी संदिग्ध गतिविधि (जैसे भीड़ इकट्ठा होना या लड़ाई-झगड़ा) को तुरंत पकड़ लेगा। इसका सीधा कंट्रोल पटना मुख्यालय से होगा।
5. ई-चालान और भारी जुर्माना: ज़रा बचके!
इन कैमरों के लगने का सबसे बड़ा असर आपकी जेब पर पड़ सकता है। बिहार में अब ई-चालान सिस्टम पूरी तरह एक्टिव है। अगर आप सोच रहे हैं कि पुलिस नहीं देख रही है, तो हो सकता है कि कोई कैमरा या कोई जागरूक नागरिक आपको देख रहा हो।
प्रमुख जुर्माने (एक नज़र में):
- बिना हेलमेट: ₹1,000
- सीटबेल्ट नहीं: ₹1,000
- ट्रिपल राइडिंग: ₹1,000
- ओवर स्पीडिंग: ₹2,000 से शुरू
- गाड़ी चलाते हुए मोबाइल का उपयोग: ₹5,000
बिहार सरकार का यह “पूरा प्लान” स्पष्ट है—तकनीक के ज़रिए कानून व्यवस्था को सुधारना। जहाँ एक तरफ गाँवों में कैमरे लगने से सुरक्षा का भाव बढ़ेगा, वहीं दूसरी तरफ ट्रैफिक नियमों को लेकर आम लोगों की भागीदारी सड़क हादसों को कम करने में मदद करेगी।
अब यह सिर्फ पुलिस का काम नहीं है, एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर आप भी अपने शहर और गाँव को सुरक्षित बनाने में ‘कैमरा मैन’ की भूमिका निभा सकते हैं। बस ध्यान रहे, गाड़ी चलाते वक़्त नियम न तोड़ें, क्योंकि अब ‘तीसरी आँख’ हर जगह है!
















