बिहार की मिट्टी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अगर इरादे बुलंद हों, तो कोई भी बाधा—चाहे वह शारीरिक हो या आर्थिक—सफलता के आड़े नहीं आ सकती। 6 फरवरी 2026 को पटना के ‘संकल्प’ सभागार में एक ऐसा ही ऐतिहासिक पल देखा गया जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बक्सर की बेटी और नेत्रहीन महिला क्रिकेटर अनु कुमारी को 23,43,750 रुपये (लगभग 23.44 लाख) के चेक से सम्मानित किया।

कौन हैं अनु कुमारी? संघर्ष और पहचान की कहानी
अनु कुमारी बिहार के बक्सर जिले के सिमरी प्रखंड के एक छोटे से गांव मुकुंदपुर की रहने वाली हैं। अनु का परिवार एक बहुत ही साधारण पृष्ठभूमि से आता है। उनके पिता, सोहन चौधरी, डुमरांव राज परिवार की गौशाला में मुख्य सेवादार (caretaker) के रूप में काम करते हैं। पांच भाई-बहनों में सबसे बड़ी अनु ने बचपन से ही भारी आर्थिक तंगी देखी है, लेकिन क्रिकेट के प्रति उनके जुनून ने उन्हें कभी रुकने नहीं दिया।
अनु कुमारी B1 कैटेगरी (पूरी तरह से दृष्टिबाधित) की खिलाड़ी हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही स्कूल में हुई, जिसके बाद वह पटना चली गईं और वहां विकलांग कोटे के तहत अपनी 10वीं और 12वीं की परीक्षा पूरी की। उनकी असली खेल प्रतिभा तब निखरी जब वह दिल्ली शिफ्ट हुईं और बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (BCA) की नजर उन पर पड़ी।
2025 नेत्रहीन महिला टी20 वर्ल्ड कप: ऐतिहासिक जीत में योगदान
अनु कुमारी भारतीय उस टीम का हिस्सा थीं जिसने नवंबर 2025 में कोलंबो, श्रीलंका के पी. सारा ओवल मैदान पर खेले गए पहले ‘नेत्रहीन महिला टी20 वर्ल्ड कप’ के फाइनल में नेपाल को 7 विकेट से हराकर खिताब अपने नाम किया था।
इस टूर्नामेंट में अनु की भूमिका एक विशेषज्ञ गेंदबाज के रूप में बेहद महत्वपूर्ण रही। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में न केवल कसी हुई गेंदबाजी की बल्कि फाइनल मैच में नेपाल के टॉप ऑर्डर को ध्वस्त करने में अहम भूमिका निभाई। उनकी इसी उपलब्धि ने उन्हें आज बिहार का सबसे बड़ा खेल सम्मान दिलाया है।
सम्मान समारोह के मुख्य बिंदु
पटना में आयोजित इस सम्मान समारोह में केवल मुख्यमंत्री ही नहीं, बल्कि बिहार के कई बड़े दिग्गज मौजूद थे:
- उपमुख्यमंत्री: सम्राट चौधरी
- खेल मंत्री: श्रेयसी सिंह (जो खुद एक अंतरराष्ट्रीय शूटर और ओलंपियन हैं)
- अन्य मंत्री: विजय कुमार चौधरी (जल संसाधन और संसदीय कार्य)
- अधिकारी: मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार और खेल विभाग के सचिव महेंद्र कुमार।
सम्मान स्वरूप अनु को 23.43 लाख रुपये के चेक के साथ-साथ एक पारंपरिक शॉल और स्मृति चिन्ह भी भेंट किया गया। बदले में, अनु ने मुख्यमंत्री को क्रिकेट बैट और बॉल का एक मोमेंटो उपहार में दिया।
बिहार की नई खेल नीति: ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’
अनु कुमारी को मिला यह बड़ा इनाम बिहार की उस बदलती खेल नीति का हिस्सा है, जिसकी शुरुआत 9 जनवरी 2024 को एक अलग ‘खेल विभाग’ के गठन के साथ हुई थी। राज्य सरकार अब न केवल खिलाड़ियों को वित्तीय पुरस्कार दे रही है, बल्कि उनके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ जैसी क्रांतिकारी योजना भी चला रही है।
इस योजना के तहत अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय पदक विजेताओं को सीधे तौर पर SDM और DSP जैसे प्रथम श्रेणी के पदों पर नियुक्त किया जा रहा है। अब तक 71 खिलाड़ियों को इस योजना के तहत सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं। अनु कुमारी ने भी अपनी इच्छा जाहिर की है कि वह खेल कोटे के तहत सरकारी नौकरी पाकर अपने परिवार और अपनी छोटी बहनों की शिक्षा और शादी की जिम्मेदारी उठाना चाहती हैं।
बिहार में खेल के बुनियादी ढांचे का विकास
अनु कुमारी ने इस अवसर पर कहा कि अब अन्य राज्यों के खिलाड़ी भी बिहार की खेल सुविधाओं की तारीफ कर रहे हैं। बिहार सरकार खेल के क्षेत्र में कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही है:
- राजगीर खेल परिसर: यहां एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का क्रिकेट स्टेडियम और खेल विश्वविद्यालय बनाया गया है।
- पुनपुन स्पोर्ट्स सिटी: पटना के पास 100 एकड़ में स्पोर्ट्स सिटी विकसित करने की योजना है।
- मोइनुल हक स्टेडियम: इस स्टेडियम को BCCI को दीर्घकालिक पट्टे (lease) पर दिया गया है ताकि इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप आधुनिक बनाया जा सके।
- छात्रवृत्ति योजनाएं: सरकार ‘सक्षम’ और ‘उड़ान’ जैसी योजनाओं के माध्यम से खिलाड़ियों को 5 लाख से 20 लाख रुपये तक की वार्षिक सहायता दे रही है।
अनु कुमारी की सफलता केवल एक पदक या पुरस्कार राशि तक सीमित नहीं है। यह बिहार की उन लाखों बेटियों के लिए एक संदेश है जो अभावों में भी बड़े सपने देखती हैं। बक्सर के एक छोटे से गांव से निकलकर विश्व मंच पर तिरंगा लहराने वाली अनु आज बिहार की पहचान बन चुकी हैं। उनके पिता सोहन चौधरी का कहना है कि मुख्यमंत्री के प्रयासों से आज बिहार की बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और उनका परिवार गौरवान्वित महसूस कर रहा है।
















