सड़क पर दौड़ती जिंदगी जब अचानक किसी हादसे का शिकार हो जाती है, तो वह पल केवल उस व्यक्ति के लिए ही नहीं, बल्कि उसके पूरे परिवार के लिए संकट का समय होता है। अक्सर लोग डर के कारण घायलों की मदद करने से कतराते थे, लेकिन बिहार में अब तस्वीर बदल रही है। केंद्र और राज्य सरकार की साझा पहल ‘राहवीर योजना’ (जिसे गुड सेमेरिटन स्कीम भी कहा जाता है) ने मानवता को एक नया हौसला दिया है।

क्या है राहवीर योजना ?
राहवीर योजना का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं के दौरान होने वाली मौतों के आंकड़ों को कम करना है। इस योजना के तहत, जो नागरिक किसी घायल व्यक्ति को ‘गोल्डन ऑवर’ (हादसे के ठीक एक घंटे के भीतर) में अस्पताल पहुंचाते हैं, उन्हें सरकार की ओर से नकद इनाम और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाता है। योजना का नाम ‘राह-वीर’ (Road Braveheart) इसलिए रखा गया है क्योंकि यह उन बहादुर लोगों को पहचान देती है जो दूसरों की जान बचाने के लिए निस्वार्थ भाव से आगे आते हैं।
इनाम की राशि और सम्मान
पहले इस नेक काम के लिए प्रोत्साहन राशि केवल ₹5,000 थी, जिसे सरकार ने जनवरी 2025 में बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया है। बिहार परिवहन विभाग ने इस योजना को राज्य स्तर पर काफी प्राथमिकता दी है। परिवहन मंत्री शीला कुमारी के अनुसार, राज्य में हर जान की कीमत है और ‘राहवीर’ बनने वाले नागरिकों को उचित सम्मान देना हमारी प्राथमिकता है।
सिर्फ इतना ही नहीं, हर साल राष्ट्रीय स्तर पर 10 सर्वश्रेष्ठ राहवीरों को ₹1,00,000 का विशेष पुरस्कार, प्रमाण पत्र और भव्य सम्मान समारोह में शामिल होने का अवसर भी मिलता है।
बिहार की बड़ी उपलब्धि
राहवीर योजना के क्रियान्वयन में बिहार देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। हाल ही में आई एक रिपोर्ट के अनुसार, देश भर में पुरस्कृत किए गए 217 ‘गुड सेमेरिटन्स’ में से सबसे अधिक 95 लोग बिहार से हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि बिहार के लोग न केवल जागरूक हैं, बल्कि संकट के समय एक-दूसरे का साथ देने में भी सबसे आगे हैं।
‘गोल्डन ऑवर’ का महत्व
डॉक्टरों और विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क दुर्घटना के बाद का पहला एक घंटा ‘गोल्डन ऑवर’ होता है। यदि इस समय में घायल को प्राथमिक उपचार या अस्पताल की मदद मिल जाए, तो बचने की संभावना 80% तक बढ़ जाती है। राहवीर योजना इसी महत्वपूर्ण समय का लाभ उठाने के लिए लोगों को प्रेरित करती है।
कानूनी सुरक्षा और अधिकार : राहवीर योजना
हादसे में मदद करने वालों को पहले अक्सर पुलिसिया कार्यवाही और अदालती चक्करों का डर रहता था। अब मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 के तहत ऐसे मददगारों को पूरी कानूनी सुरक्षा दी गई है। राहवीरों से न तो कोई जबरन पहचान पूछ सकता है और न ही उन्हें गवाही के लिए मजबूर किया जा सकता है। अस्पतालों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे मदद करने वाले व्यक्ति से इलाज का खर्च न मांगें।
आवेदन और चयन की प्रक्रिया
जब कोई व्यक्ति किसी घायल को अस्पताल पहुंचाता है, तो अस्पताल या पुलिस संबंधित व्यक्ति का विवरण (यदि वह देना चाहे) दर्ज करती है। इसके बाद एक जिला स्तरीय कमेटी इन नामों की समीक्षा करती है और उनकी बहादुरी के आधार पर पुरस्कार के लिए अनुशंसा करती है। परिवहन विभाग इस राशि को सीधे लाभार्थी के खाते में ट्रांसफर करता है।
एक जागरूक समाज की ओर कदम
राहवीर योजना केवल एक पुरस्कार योजना नहीं है, बल्कि यह एक संदेश है कि संकट में फंसे व्यक्ति की मदद करना सबसे बड़ा धर्म है। बिहार सरकार ने इसे स्कूलों और जागरूकता अभियानों का हिस्सा बनाया है ताकि भविष्य की पीढ़ी सड़क सुरक्षा और मानवीय मूल्यों को समझ सके।
आज हम सबको संकल्प लेना चाहिए कि हम सड़क पर किसी को अकेला नहीं छोड़ेंगे। आपकी थोड़ी सी हिम्मत किसी के घर का चिराग बुझने से बचा सकती है और आपको बना सकती है एक सच्चा ‘राहवीर’।
नोट: यह योजना फिलहाल 31 मार्च, 2026 तक के लिए विस्तारित की गई है। अधिक जानकारी के लिए अपने नजदीकी परिवहन कार्यालय या टोल-फ्री नंबर 1800 123 1121 पर संपर्क कर सकते हैं।
















