सहरसा ग्लास ब्रिज बिहार के कोसी क्षेत्र को अक्सर बाढ़ और पिछड़ेपन के नजरिए से देखा जाता रहा है, लेकिन सहरसा का मत्स्यगंधा प्रोजेक्ट इस धारणा को पूरी तरह बदलने वाला है। करीब ₹98.65 करोड़ की लागत से बन रहा यह प्रोजेक्ट सिर्फ एक ब्रिज नहीं, बल्कि एक पूरा ‘टूरिज्म हब’ है। 15 सितंबर 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका शिलान्यास किया था, जिसके बाद से ही यहाँ निर्माण कार्य जोरों पर है।
सर्कुलर डिजाइन: पानी पर चलने का अनोखा अहसास
राजगीर का ग्लास ब्रिज जहाँ दो पहाड़ियों के बीच एक ‘स्काईवॉक’ है, वहीं सहरसा का यह ब्रिज अपनी तरह का अनोखा सर्कुलर (गोलाकार) डिजाइन होगा। यह ब्रिज झील के एक ही किनारे से शुरू होकर पानी के ऊपर एक चक्कर लगाएगा और वापस उसी किनारे पर खत्म होगा। यानी आपको झील के आर-पार जाने के बजाय, पानी के ऊपर तैरने और 360-डिग्री व्यू का रोमांचक अहसास मिलेगा।
इस ब्रिज के निर्माण में अत्याधुनिक पारदर्शी ग्लास तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो इसे सुरक्षित और दिखने में भव्य बनाता है।
सहरसा ग्लास ब्रिज सिर्फ ब्रिज नहीं, एक ‘फुल डे एक्सपीरियंस’
सरकार का लक्ष्य यहाँ पर्यटकों को सिर्फ 10 मिनट के रोमांच के लिए बुलाना नहीं है, बल्कि उन्हें एक पूरा दिन बिताने का अनुभव देना है। इस प्रोजेक्ट के मुख्य आकर्षणों में शामिल हैं:
- एक्सपीरियंस सेंटर: यह दो मंजिला केंद्र होगा। इसकी पहली मंजिल पर एक आधुनिक AR-VR (ऑगमेंटेड और वर्चुअल रियलिटी) केबिन होगा, जहाँ आप डिजिटल माध्यम से इतिहास और संस्कृति को देख पाएंगे।
- महाभारत का इतिहास: मत्स्यगंधा झील का नाम पौराणिक पात्र ‘सत्यवती’ (मत्स्यगंधा) से जुड़ा है। यहाँ एक ‘अभिव्यक्ति स्थल’ और संग्रहालय बनाया जा रहा है, जहाँ महाभारत कालीन कहानियों को 3D प्रोजेक्टर के जरिए दिखाया जाएगा।
- म्यूजिकल फाउंटेन और लाइट शो: शाम के वक्त पर्यटकों के लिए शानदार म्यूजिकल फाउंटेन और लाइट-साउंड शो की व्यवस्था होगी।
- अर्बन हाट और फूड कोर्ट: स्थानीय हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए यहाँ 15 स्टाल वाला ‘अर्बन हाट’ और स्वादिष्ट व्यंजनों के लिए एक बड़ा फूड कोर्ट भी तैयार किया जा रहा है।
लेटेस्ट अपडेट: जनवरी 2026 की स्थिति
आज 5 जनवरी 2026 को इस प्रोजेक्ट के लिए टेंडर प्रक्रिया के अहम पड़ाव पूरे हो रहे हैं। हाल ही में 3 जनवरी 2026 को सहरसा के जिलाधिकारी (DM) दीपेश कुमार ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने पाया कि काम की रफ्तार थोड़ी धीमी है, जिसे देखते हुए उन्होंने जून 2026 तक हर हाल में काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
वर्तमान में ब्रिज के मुख्य ढांचे के लिए तकनीकी बोलियां (Technical Bids) फाइनल की जा रही हैं, जिसके बाद वित्तीय निविदा (Financial Bid) खोलकर निर्माण की अंतिम बाधाएं दूर कर ली जाएंगी। झील के दक्षिणी किनारे पर घाट बनाने का काम और एक्सपीरियंस सेंटर का ढांचा पहले से ही प्रगति पर है।
राजगीर बनाम सहरसा ग्लास ब्रिज बनाम रोहतस: भ्रम दूर करें
सोशल मीडिया पर अक्सर भ्रम होता है कि दूसरा ग्लास ब्रिज रोहतास में बन रहा है। वास्तविकता यह है कि रोहतास के तुतला भवानी में एक ‘स्विंग ब्रिज’ (झूला पुल) और बटरफ्लाई पार्क विकसित किया गया है, लेकिन बिहार का आधिकारिक दूसरा ग्लास-बॉटम ब्रिज सहरसा में ही बन रहा है।
सहरसा ग्लास ब्रिज स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था की नई उड़ान
इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा भावनात्मक और आर्थिक पहलू रोजगार है। अनुमान है कि इस टूरिज्म सर्किट के विकसित होने से सहरसा और आसपास के जिलों में होटल, ट्रांसपोर्ट और हस्तशिल्प के क्षेत्र में हजारों नए अवसर पैदा होंगे। कोसी के युवाओं को अब रोजगार के लिए बाहर जाने के बजाय अपने ही घर में पर्यटन उद्योग से जुड़ने का मौका मिलेगा।
सहरसा का मत्स्यगंधा ग्लास ब्रिज बिहार के पर्यटन इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। यह कोसी की पहचान को बाढ़ से बदलकर ‘भविष्य के विकास’ की ओर ले जाएगा। अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो जून 2026 के बाद आप भी इस कांच के पुल पर चलकर पानी के ऊपर सैर करने का रोमांच ले पाएंगे।

















