शार्क टैंक इंडिया सीजन 5 का आगाज हो चुका है और इस बार मंच पर ऐसी कहानियाँ आ रही हैं जो न केवल व्यापार की दृष्टि से मजबूत हैं, बल्कि भारत के छोटे शहरों की प्रतिभा को भी वैश्विक पहचान दिला रही हैं. इसी कड़ी में, मुंगेर (बिहार) की पृष्ठभूमि और जलीय कृषि (Aquaculture) के क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्टअप कोरल लाइफकेयर (Corel Lifecare) ने अपनी चमक बिखेरी है. 13 जनवरी 2026 को प्रसारित एपिसोड में इस कंपनी ने अपनी वैज्ञानिक सोच और किसानों के प्रति अपनी संवेदनशीलता से ‘शार्क्स’ का दिल जीत लिया.

क्या है Corel Lifecare?
कोरल लाइफकेयर एक बायोटेक स्टार्टअप है जो मछली और झींगा (Shrimp) पालने वाले किसानों के लिए उन्नत जैव-सूत्रीकरण (Bio-formulations) और सप्लीमेंट्स बनाता है. अक्सर देखा जाता है कि इस क्षेत्र में विदेशी कंपनियां बहुत महंगे दाम पर सप्लीमेंट्स बेचती हैं, जिससे हमारे भारतीय किसानों की लागत बढ़ जाती है. कोरल लाइफकेयर ने इसी समस्या का समाधान निकाला और “किफायती, पारदर्शी और अनुसंधान-आधारित” उत्पाद बाजार में उतारे.
संस्थापकों का संघर्ष और विजन
इस स्टार्टअप की नींव अभिजीत पी. नाओहाटे (Abhijeet P. Naohate) ने रखी थी, जो खुद मत्स्य पालन अर्थशास्त्र (Fisheries Economics) में पोस्ट ग्रेजुएट हैं और उन्हें इस क्षेत्र का 12 साल से अधिक का अनुभव है. उनके साथ टीम में निखिलेश हजारे (COO) और रोहित पटेल (CBO) जैसे अनुभवी दिग्गज शामिल हैं.
अभिजीत बताते हैं कि उन्होंने अपनी आंखों से विदेशी कंपनियों को ₹500 का उत्पाद ₹5000 में बेचते देखा है. इसी शोषण को खत्म करने के लिए उन्होंने कोरल लाइफकेयर की शुरुआत की, ताकि किसानों को वैज्ञानिक तकनीक कम दाम पर मिल सके.
शार्क टैंक की वो ‘धमाकेदार’ पिच
शार्क टैंक के मंच पर संस्थापकों ने ₹1.2 करोड़ (2% इक्विटी के बदले) की मांग रखी थी. उन्होंने बताया कि कैसे उनकी कंपनी ने महज 6 महीनों में अपने राजस्व (Revenue) को ₹26 लाख से बढ़ाकर ₹2.5 करोड़ तक पहुँचा दिया है. वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए उनका लक्ष्य ₹12 करोड़ का राजस्व प्राप्त करना है.
उनकी पिच में सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाली बात उनकी वैज्ञानिक सटीकता (Precision Biosciences) थी. वे केवल उत्पाद नहीं बेचते, बल्कि 120 से अधिक ‘फार्मर कनेक्ट पार्टनर्स’ के जरिए 1,500 से अधिक किसानों को ट्रेनिंग भी देते हैं.
Corel Lifecare :कैसे हुई ₹1.2 करोड़ की बड़ी डील?
पिच के दौरान ‘शार्क्स’ ने कंपनी के बिजनेस मॉडल और भविष्य की संभावनाओं पर कई सवाल किए. अनुपम मित्तल (Anupam Mittal) और कुणाल बहल (Kunal Bahl) इस स्टार्टअप के ‘ब्लू इकोनॉमी’ (Blue Economy) विजन से काफी प्रभावित हुए. अंत में, काफी मोल-भाव के बाद ₹1.2 करोड़ में 8% इक्विटी पर डील फाइनल हुई. यह निवेश कंपनी को राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार करने और नए उत्पाद विकसित करने में मदद करेगा.
मुंगेर और बिहार के लिए क्यों है यह गर्व की बात?
भले ही कोरल लाइफकेयर का मुख्यालय ठाणे (महाराष्ट्र) में है, लेकिन इसकी जड़ें और इसका प्रभाव बिहार जैसे राज्यों के ग्रामीण अंचलों तक फैला हुआ है. मुंगेर और उसके आस-पास के क्षेत्रों में गंगा के किनारे मछली पालन एक बड़ी आजीविका है. कोरल लाइफकेयर जैसे स्टार्टअप्स की सफलता यह दिखाती है कि मुंगेर से जुड़ी प्रतिभाएं अब पूरे भारत की कृषि व्यवस्था को आधुनिक बना रही हैं. बिहार का मत्स्य पालन क्षेत्र इस तरह के वैज्ञानिक समाधानों से और भी समृद्ध होगा.
Corel Lifecare : कंपनी के प्रमुख उत्पाद और नवाचार
कोरल लाइफकेयर के पास 11 से अधिक विशेषज्ञ उत्पाद हैं जो भारतीय वातावरण के अनुकूल डिजाइन किए गए हैं :
- SoilTrust™: तालाब के नीचे की गंदगी और जहरीली गैसों को कम करता है.
- PondTrust®: यह प्रोबायोटिक और एंजाइम का मिश्रण है जो पानी की गुणवत्ता सुधारता है.
- Mintamix™: झींगा के कवच को मजबूत बनाने वाला खास मिनरल सप्लीमेंट.
- Immu-45®: मछली और झींगा की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है.
सिर्फ मछली पालन ही नहीं
कंपनी की योजना अब केवल जलीय कृषि तक सीमित रहने की नहीं है. वे पशु पोषण (Livestock Nutrition) और फसल देखभाल (Crop Care) के क्षेत्र में भी कदम रखने की तैयारी कर रहे हैं. शार्क टैंक से मिला यह निवेश उन्हें भारत के हर उस किसान तक पहुँचने में मदद करेगा जो शोषणकारी कीमतों के खिलाफ लड़ रहा है.
कोरल लाइफकेयर की यह जीत केवल एक निवेश नहीं, बल्कि भारतीय कृषि तकनीक (Agri-tech) के बदलते स्वरूप का प्रतीक है. मुंगेर, बिहार की मिट्टी से निकला उत्साह और वैज्ञानिक दृष्टिकोण आज भारत को ‘नीली अर्थव्यवस्था’ में आत्मनिर्भर बना रहा है.
















