बिहार के बारे में अक्सर यह कहा जाता रहा है कि यहाँ प्रतिभा तो है, लेकिन उद्योग नहीं। लेकिन आज वक्त बदल रहा है। ‘बिहार है तैयार’ की गूँज अब देश-विदेश के औद्योगिक गलियारों में सुनाई दे रही है। इस बदलाव का सबसे बड़ा चेहरा बनकर उभरी है EDIF Medical Systems (EDIF Pharma)। दिल्ली से अपनी पहचान बनाने वाले फैज़ अहमद (CEO, EDIF Pharma) ने जब अपने गृह राज्य की ओर रुख किया, तो उद्देश्य सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि अपनी जड़ों को कुछ वापस लौटाने (Paying back to roots) का संकल्प था।

मधुबनी का पंडौल: बिहार का नया ‘फार्मा हब’
मधुबनी जिले का पंडौल औद्योगिक क्षेत्र (Pandaul Industrial Area) आज एक ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बन रहा है। यहाँ के प्लॉट नंबर 101P, 103, 105 और 107P पर EDIF Pharma ने एक अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित की है। यह केवल एक फैक्ट्री नहीं है, बल्कि उत्तर बिहार के लिए उम्मीद की एक किरण है। जहाँ पहले बिहार अपनी 99% दवाइयों की जरूरतों के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर रहता था, अब वहाँ अपनी दवाइयाँ बन रही हैं जो न केवल बिहार, बल्कि सात समंदर पार फ्रांस और दुबई जैसे देशों तक पहुँचेंगी।
प्रोडक्ट पोर्टफोलियो: गंभीर बीमारियों से पोषण तक EDIF Pharma केवल साधारण दवाइयाँ ही नहीं बना रहा, बल्कि इसकी रेंज बेहद आधुनिक और जीवन रक्षक है:
- गर्भावस्था और पोषण (Maternal Care): कंपनी का फ्लैगशिप प्रोडक्ट Vivajest (Bajest) है, जो गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं में कुपोषण से लड़ने में मदद करता है।
- कैंसर का इलाज (Oncology): प्रोस्टेट कैंसर के इलाज के लिए Lipodite Acetate Depot जैसी जटिल दवाइयाँ यहाँ तैयार की जा रही हैं, जो कंपनी की तकनीकी क्षमता को दर्शाती हैं।
- हार्मोनल और फर्टिलिटी: महिलाओं और पुरुषों में फर्टिलिटी संबंधी समस्याओं के लिए Chromifax और Progyny (Progesterone) जैसे प्रोडक्ट्स का निर्माण किया जा रहा है।
- सामान्य दवाइयाँ: इसके अलावा कैल्शियम सिरप, एंटी-मलेरियल दवाइयाँ, टैबलेट्स और कैप्सूल (Hard & Soft Gelatin) का बड़ा उत्पादन शुरू हो चुका है।
EDIF Pharma : ग्लोबल एक्सपोर्ट और व्यापारिक विज़न
EDIF Pharma का लक्ष्य छोटा नहीं है। कंपनी पहले से ही करीब 8 साल से अफ्रीका और यूरोप के देशों (फ्रांस, इटली, पुर्तगाल) में एक्सपोर्ट कर रही है। अब मधुबनी यूनिट के साथ, दिसंबर से सीधे फ्रांस के लिए शिपमेंट भेजने की तैयारी है। इसके बाद दुबई, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों में विस्तार करने का प्लान है।
कंपनी का बिजनेस मॉडल तीन स्तंभों पर टिका है:
- सरकारी आपूर्ति: बिहार के 12 करोड़ लोगों को सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली दवाइयाँ उपलब्ध कराना।
- थर्ड पार्टी मैन्युफैक्चरिंग: दूसरे बड़े ब्रांड्स के लिए उनकी दवाइयाँ बनाना।
- अंतरराष्ट्रीय निर्यात: बिहार को एक ग्लोबल एक्सपोर्ट हब के रूप में पहचान दिलाना।
बिहार सरकार की नीतियां: ‘सोने पर सुहागा’
इस सफलता के पीछे बिहार सरकार की नई ‘बिहार औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नियमावली (BIIPP) 2025′ का बड़ा हाथ है। इस नीति के तहत EDIF Pharma जैसे निवेशकों को कई आकर्षक फायदे मिल रहे हैं:
- कैपिटल सब्सिडी: प्लांट और मशीनरी की लागत पर 30% तक की सब्सिडी।
- ब्याज में राहत: 40 करोड़ रुपये तक का इंटरेस्ट सबवेंशन।
- SGST प्रतिपूर्ति: चुकाए गए SGST का 300% तक रिफंड।
- मुफ्त जमीन और रियायतें: ₹100 करोड़ से अधिक के निवेश और 1000 नौकरियों पर मुफ्त जमीन या BIADA की दरों पर 50% की भारी छूट।
EDIF Pharma : पलायन पर प्रहार
EDIF Pharma के इस कदम का सबसे भावुक पहलू है ‘रोजगार’। सालों से बिहार का युवा काम की तलाश में महाराष्ट्र या गुजरात जाता रहा है। फैज़ अहमद का विज़न है कि बिहार के युवाओं को उनके घर के पास ही सम्मानजनक काम मिले। पंडौल की इस यूनिट में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञों की देखरेख में स्थानीय युवाओं (जैसे सर्विस इंजीनियर ट्रेनी) को प्रशिक्षित और नियुक्त किया जा रहा है। यह पहल ‘ब्रेन ड्रेन’ को रोकने की दिशा में एक बड़ा प्रहार है।
बिहार का ‘फ्लैगशिप’ ब्रांड
WHO-GMP सर्टिफिकेशन की ओर बढ़ती यह कंपनी आने वाले कुछ वर्षों में बिहार की ‘फ्लैगशिप फार्मा कंपनी’ बनने की राह पर है। EDIF Pharma ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे मज़बूत हों और सरकार का साथ मिले, तो बिहार की मिट्टी भी ग्लोबल लीडर्स पैदा कर सकती है। अब दवाइयों के डिब्बों पर जब ‘Made in Bihar’ लिखा होगा, तो यह हर बिहारी के लिए गर्व का क्षण होगा।
















