बिहार अब सिर्फ खेती के लिए नहीं, बल्कि बड़े उद्योगों के लिए भी जाना जाएगा। जमुई जिले के चकाई ब्लॉक के अंतर्गत उर्वा गाँव में कुछ ऐसा हो रहा है, जो न केवल बिहार बल्कि पूरे भारत के लिए गौरव की बात है। यहाँ एशिया का सबसे बड़ा अनाज आधारित (Grain-based) इथेनॉल प्लांट स्थापित किया जा रहा है।
अंकुर बायोकेम प्राइवेट लिमिटेड द्वारा बनाया जा रहा यह प्लांट जमुई की तस्वीर बदलने वाला है। आइए जानते हैं कि यह प्रोजेक्ट क्या है और इससे आम आदमी को क्या फायदे होंगे।

क्या है जमुई इथेनॉल प्लांट की खासियत?
यह प्लांट कोई साधारण फैक्ट्री नहीं है। लगभग 105 एकड़ जमीन पर फैले इस प्रोजेक्ट की कुल लागत करीब 905 करोड़ रुपये है। इसकी उत्पादन क्षमता 750 KLPD (किलो लीटर प्रति दिन) है, जिसका मतलब है कि यहाँ हर रोज 7.5 लाख लीटर इथेनॉल बनेगा ।
इतनी बड़ी मात्रा में उत्पादन के लिए यहाँ हर दिन लगभग 30,000 क्विंटल अनाज (मुख्य रूप से मक्का और टूटा चावल) की जरूरत होगी। इसके साथ ही, इस प्लांट में बिजली के लिए अपना 20 MW का पावर प्लांट भी लगाया गया है, जिससे यह ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर रहेगा।
किसानों की चांदी: मक्के और चावल के मिलेंगे बेहतर दाम
बिहार को भारत का ‘मक्का बेल्ट’ कहा जाता है। जमुई और आसपास के जिलों के किसान अब तक अपनी फसल बेचने के लिए बिचौलियों या बाहरी मंडियों पर निर्भर थे। लेकिन इस प्लांट के शुरू होने से:
- स्थानीय खरीद: प्लांट प्रबंधन ने साफ किया है कि अनाज की खरीद में जमुई के किसानों को पहली प्राथमिकता दी जाएगी ।
- कीमतों में उछाल: मक्के की भारी मांग के कारण इसकी कीमतों में 40-50% तक की वृद्धि होने की उम्मीद है ।
- बेकार अनाज का सही मोल: टूटे हुए चावल और खराब अनाज, जो बाजार में सस्ते बिकते थे, उन्हें अब इथेनॉल बनाने के लिए अच्छे दाम पर खरीदा जाएगा ।
युवाओं के लिए रोजगार और पलायन पर रोक
जमुई के युवाओं को काम की तलाश में दिल्ली, मुंबई या गुजरात जाना पड़ता था। इस प्लांट ने रोजगार की नई उम्मीदें जगाई हैं। फिलहाल प्लांट के निर्माण में 300 से ज्यादा लोग लगे हैं, लेकिन जब यह पूरी तरह शुरू होगा, तब हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से काम मिलेगा ।
प्लाइंट के मैनेजर के अनुसार, मार्च-अप्रैल 2026 के आसपास बड़े पैमाने पर भर्तियाँ शुरू हो सकती हैं, जिसमें स्थानीय युवाओं को तवज्जो दी जाएगी । इससे न केवल सीधे तौर पर नौकरी मिलेगी, बल्कि ट्रांसपोर्ट, लोडिंग-अनलोडिंग और छोटी दुकानों के जरिए हजारों परिवारों का गुजारा होगा।
जमुई इथेनॉल प्लांट : जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD)
जमुई का यह इथेनॉल प्लांट पूरी तरह से ‘इको-फ्रेंडली’ तकनीक पर आधारित है। यहाँ ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ (ZLD) सिस्टम का इस्तेमाल किया गया है, जिसका मतलब है कि फैक्ट्री से निकलने वाला गंदा पानी बाहर नहीं फेंका जाएगा, बल्कि उसे रिसाइकिल करके फिर से उपयोग किया जाएगा । इससे आसपास के खेतों और जल स्रोतों को कोई नुकसान नहीं पहुँचेगा। इसके अलावा, इथेनॉल का इस्तेमाल पेट्रोल में मिलाकर किया जाता है, जिससे गाड़ियों से होने वाला प्रदूषण भी कम होता है ।
बिहार सरकार की नीति का बड़ा असर
यह सब मुमकिन हुआ है बिहार की ‘इथेनॉल उत्पादन प्रोत्साहन नीति’ की वजह से। राज्य सरकार इस तरह के प्लांट लगाने वालों को 15% तक की सब्सिडी और टैक्स में भारी छूट दे रही है । मुख्यमंत्री और राज्य सरकार का लक्ष्य बिहार को देश का ‘इथेनॉल हब’ बनाना है, और जमुई का यह प्लांट उसी दिशा में सबसे बड़ा कदम है ।
















