Mobile Only Menu
  • Home
  • ब्लॉग
  • मैथिली ठाकुर मराठी पुस्तक: बिहार की बेटी की मराठी जीवनी और राजनीति में ऐतिहासिक जीत
मैथिली ठाकुर मराठी पुस्तक (Maithili Thakur Marathi Book)

मैथिली ठाकुर मराठी पुस्तक: बिहार की बेटी की मराठी जीवनी और राजनीति में ऐतिहासिक जीत

बिहार की गलियों से निकलकर पूरे देश के दिलों पर राज करने वाली मैथिली ठाकुर आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बिहार की इस बेटी का रिश्ता महाराष्ट्र से इतना गहरा हो गया है कि अब उन पर मराठी भाषा में एक पूरी किताब लिखी जा चुकी है? जी हां, हाल ही में पुणे में मैथिली ठाकुर की पहली मराठी जीवनी ‘लोकप्रिय युवा गायिका मैथिली ठाकुर’ का विमोचन हुआ है।

यह लेख मैथिली ठाकुर के उस सफर के बारे में है, जो मधुबनी के एक छोटे से गांव से शुरू होकर दिल्ली के संघर्षों, सोशल मीडिया की सफलता और अब राजनीति के गलियारों तक जा पहुंचा है।

मैथिली ठाकुर मराठी पुस्तक (Maithili Thakur Marathi Book)

बचपन और संगीत का कड़ा अनुशासन

मैथिली ठाकुर का जन्म 25 जुलाई 2000 को बिहार के मधुबनी जिले के बेनीपट्टी में हुआ था। संगीत उनके खून में था। उनके पिता रमेश ठाकुर खुद एक संगीत शिक्षक हैं और दादा भी शास्त्रीय संगीत के ज्ञाता थे। मैथिली ने मात्र 4 साल की उम्र से ही संगीत सीखना शुरू कर दिया था।

बेहतर भविष्य की तलाश में उनका परिवार दिल्ली आ गया। वहां का शुरुआती दौर बहुत मुश्किल था। संगीत के रियाज के कारण पड़ोसियों को परेशानी न हो, इसलिए उनके परिवार ने 20 साल में करीब 17 बार अपना घर बदला। लेकिन मैथिली के पिता ने हार नहीं मानी और अपनी बेटी के साथ-साथ उनके दोनों भाइयों, ऋषभ (जो तबला बजाते हैं) और अयाची (जो गायक और तालवाद्य विशेषज्ञ हैं) को भी संगीत में पारंगत किया।

रियलिटी शो से लेकर सोशल मीडिया स्टार बनने तक

मैथिली ठाकुर ने टीवी के कई बड़े रियलिटी शो जैसे ‘लिटिल चैंप्स’ और ‘इंडियन आइडल जूनियर’ में हिस्सा लिया, लेकिन उन्हें कई बार शुरुआती दौर में ही रिजेक्शन का सामना करना पड़ा। असल पहचान उन्हें 2017 में ‘राइजिंग स्टार’ से मिली, जहां वे रनर-अप रहीं।

हालांकि, उनकी असली जीत सोशल मीडिया पर हुई। अपने भाइयों के साथ मिलकर उन्होंने लोक संगीत और भजनों को एक नए अंदाज में पेश किया। आज फेसबुक पर उनके 14 मिलियन और इंस्टाग्राम पर 6 मिलियन से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। उनका ‘मानसपथ’ अभियान, जिसमें वे रामचरितमानस का पाठ करती हैं, दुनियाभर में मशहूर है।

बिहार की सबसे युवा विधायक (MLA) का गौरव

मैथिली का सफर सिर्फ संगीत तक सीमित नहीं रहा। 2025 में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और भारतीय जनता पार्टी (BJP) की टिकट पर दरभंगा के अलीनगर से चुनाव लड़ा। मात्र 25 साल की उम्र में उन्होंने एक दिग्गज नेता को हराकर जीत हासिल की और बिहार विधानसभा की सबसे युवा विधायक बन गईं। उन्होंने सुषमा स्वराज के उस रिकॉर्ड की बराबरी की, जो 1977 में बना था।

महाराष्ट्र से खास जुड़ाव और मैथिली ठाकुर मराठी पुस्तक

मैथिली ठाकुर का महाराष्ट्र और वहां की संस्कृति से बेहद लगाव रहा है। वे मराठी ‘अभंग’ इतनी शुद्धता के साथ गाती हैं कि महाराष्ट्र के लोग उन्हें अपनी बेटी की तरह प्यार देते हैं। इसी प्यार का नतीजा है कि पुणे के लेखक सुनील पांडे ने उन पर मराठी में एक किताब लिखी है, जिसका शीर्षक है: ‘लोकप्रिय युवा गायिका मैथिली ठाकुर’।

इस किताब का प्रकाशन पुणे के मशहूर बुकगंगा पब्लिकेशन्स ने किया है। दिसंबर 2025 में जब मैथिली पुणे के कोंढवा महोत्सव में शामिल होने आईं, तब उन्हें यह किताब भेंट की गई। इस मौके पर मैथिली भावुक हो गईं और उन्होंने घोषणा की कि महाराष्ट्र से मिले इस प्यार के कारण वे अब पुणे के कोंढवा में अपना घर भी बनाएंगी।

किताब की मुख्य बातें:

  • लेखक: सुनील पांडे
  • प्रकाशक: बुकगंगा पब्लिकेशन्स, पुणे
  • विषय: मैथिली का संगीत सफर, संघर्ष और सांस्कृतिक योगदान।
  • विशेषता: यह किताब दिखाती है कि कैसे एक उत्तर भारतीय कलाकार ने मराठी भाषा और संस्कृति को अपनाकर करोड़ों लोगों का दिल जीता।

सांस्कृतिक राजदूत और सम्मान

मैथिली ठाकुर को संगीत नाटक अकादमी द्वारा ‘उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार’ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ‘सांस्कृतिक राजदूत (Cultural Ambassador of the Year)’ के सम्मान से नवाजा जा चुका है। वे न केवल लोक संगीत को बचा रही हैं, बल्कि मधुबनी कला (Mithila Painting) को भी ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर प्रमोट कर रही हैं।

मैथिली ठाकुर मराठी पुस्तक

मैथिली ठाकुर आज के युवाओं के लिए एक मिसाल हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर आपकी जड़ें मजबूत हों और इरादे नेक, तो आप भाषा और प्रांत की सीमाओं को तोड़कर हर किसी के दिल में जगह बना सकते हैं। बिहार की बेटी पर मराठी में पुस्तक लिखा जाना ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ का सबसे सुंदर उदाहरण है।

Releated Posts

Milkvilla: बिहार के भाइयों का कमाल, बिना प्लास्टिक और मिलावट के 10 मिनट में घर पहुँचा रहे शुद्ध A2 दूध

आज के समय में जब शहरों में शुद्ध दूध मिलना एक बड़ी चुनौती बन गया है, बिहार के…

ByByManvinder Mishra Jan 21, 2026

प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना: पहली नौकरी पर युवाओं को मिलेंगे ₹15,000, जानें आवेदन प्रक्रिया और लाभ

भारत सरकार ने ‘विकसित भारत @2047’ के सपने को साकार करने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाते…

ByByManvinder Mishra Jan 20, 2026

मुंबई में बनेगा 30 मंजिला बिहार भवन: कैंसर मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत, जानें पूरी डिटेल्स

बिहार सरकार ने अपने नागरिकों की सुविधा के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली के ‘बिहार भवन’…

ByBybiharrr123 Jan 20, 2026

अमहारा: पटना का वो “डॉक्टरों वाला गाँव” जहाँ हर घर में बसती है सफलता | Amhara Doctors Village

बिहार के पटना जिले में एक ऐसा गाँव है जिसने पूरे देश के सामने शिक्षा और सफलता की…

ByByHarshvardhan Jan 18, 2026

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top