लद्दाख, जो आज के समय में सामरिक और आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से भारत का सबसे संवेदनशील हिस्सा है, उसे अब एक ऐसा नेतृत्व मिला है जो तकनीक और फील्ड अनुभव का बेजोड़ संगम है। 1996 बैच के आईपीएस अधिकारी मुकेश सिंह ने 2 जनवरी, 2026 को शिव दर्शन सिंह जमवाल की जगह लद्दाख के DGP का पदभार संभाला । जमवाल को अब अरुणाचल प्रदेश की जिम्मेदारी दी गई है ।

बेगूसराय से शुरू हुआ ‘गरजता’ सफर
मुकेश सिंह का जन्म 24 जनवरी 1971 को बिहार के बोकारो (अब झारखंड) में हुआ था, लेकिन उनकी जड़ें बिहार के बेगूसराय जिले के मंझौल गांव में गहराई से जुड़ी हैं । उनके चाचा, अधिवक्ता अजय कुमार बताते हैं कि मुकेश बचपन से ही मेधावी थे । उनकी प्रारंभिक सफलता तब दिखी जब उन्होंने देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान IIT दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग में बी.टेक किया । एक इंजीनियर के रूप में करियर बनाने के बजाय, उन्होंने देश सेवा को चुना और 1996 में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास कर आईपीएस बने ।
अनुभवों की कसौटी पर खरे
मुकेश सिंह का करियर चुनौतियों से भरा रहा है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के सबसे अशांत जिलों जैसे पुलावामा, रियासी, पुंछ और जम्मू में बतौर एसपी (SP) काम किया है । उनकी काबिलियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वे भारत की प्रमुख जांच एजेंसी NIA (राष्ट्रीय जांच एजेंसी) की संस्थापक टीम के सदस्य रहे हैं । लद्दाख आने से पहले वे भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) में अतिरिक्त महानिदेशक (ADG) के पद पर तैनात थे, जो उन्हें इस पहाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक और सामरिक समझ के लिए सबसे उपयुक्त बनाता है ।
लद्दाख के लिए क्यों हैं ‘खास’?
मुकेश सिंह की नियुक्ति एक ऐसे समय में हुई है जब लद्दाख आंतरिक और बाहरी, दोनों मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रहा है।
- LAC पर तनाव: चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जारी तनातनी के बीच, ITBP का उनका अनुभव सेना और पुलिस के बीच तालमेल बिठाने में गेम-चेंजर साबित होगा ।
- आंतरिक आंदोलन: लद्दाख में पिछले कुछ समय से राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर काफी प्रदर्शन हुए हैं । सितंबर 2025 में लेह में हुई हिंसा के बाद जनता और प्रशासन के बीच विश्वास की कमी आई है । मुकेश सिंह की छवि एक ‘प्रक्रिया-उन्मुख’ (Procedural) अधिकारी की रही है, जो कानून के साथ-साथ मानवीय संवेदनाओं को भी महत्व देते हैं ।
बिहार में जश्न का माहौल
जैसे ही मुकेश सिंह की नियुक्ति की खबर बेगूसराय के मंझौल गांव पहुंची, वहां मिठाइयां बांटी जाने लगीं। स्थानीय लोगों के लिए यह सिर्फ एक पदोन्नति नहीं, बल्कि ‘गौरव का क्षण’ है । बिहार की भूमि ने हमेशा से देश को कुशल प्रशासक दिए हैं, और मुकेश सिंह का लद्दाख के शीर्ष पुलिस पद पर पहुंचना इसी कड़ी का अगला हिस्सा है।
भविष्य की राह और रणनीतिक बदलाव
मुकेश सिंह के साथ लद्दाख में प्रशासनिक बदलाव की एक नई लहर भी आई है। उसी दिन केंद्र ने लद्दाख के उपराज्यपाल (LG) के वित्तीय अधिकारों को बढ़ाकर ₹100 करोड़ कर दिया है, जिससे क्षेत्र में विकास कार्यों में तेजी आएगी । नए मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा के साथ मिलकर मुकेश सिंह का लक्ष्य लद्दाख को न केवल सुरक्षित बनाना है, बल्कि वहां के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़कर शांति स्थापित करना भी होगा ।
उनकी नियुक्ति यह साफ संकेत देती है कि सरकार अब लद्दाख में “सॉफ्ट पावर” और “हार्ड सिक्योरिटी” का संतुलन चाहती है। एक तरफ जहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ‘व्हाइट कॉलर’ आतंकवाद के प्रति आगाह किया है, वहीं मुकेश सिंह जैसे अधिकारी से उम्मीद है कि वे कानून की कठोरता और जनता के प्रति विनम्रता का सही मिश्रण पेश करेंगे ।
















