बिहार के मुंगेर जिले में स्थित ऐतिहासिक और पौराणिक सीताकुंड परिसर एक बार फिर लाखों श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए तैयार है। इस साल 31 जनवरी 2026 से विश्व प्रसिद्ध माघी मेला शुरू होने जा रहा है। यह मेला एक महीने तक चलेगा और फाल्गुन पूर्णिमा (3 मार्च 2026) को समाप्त होगा। इस बार के मेले की सबसे बड़ी खासियत यह है कि बिहार सरकार ने इसे ‘राजकीय मेला’ का दर्जा दे दिया है, जिससे यहाँ की व्यवस्थाएं पहले से कहीं ज्यादा हाई-टेक और सुरक्षित होंगी।

1. इस बार क्या है खास? (राजकीय मेले का दर्जा)
मुंगेर वासियों की वर्षों पुरानी मांग पूरी हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इसे राजकीय मेला घोषित किया गया है। सरकार ने सीताकुंड को ‘रामायण सर्किट’ से जोड़ दिया है और इसके सर्वांगीण विकास के लिए 7 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि स्वीकृत की है। राजकीय दर्जा मिलने के बाद अब यहाँ भव्य स्टेज, बेहतर लाइटिंग, और श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए आधुनिक इंतजाम किए जा रहे हैं।
2. पौराणिक मान्यता: माता सीता की अग्नि परीक्षा
सीताकुंड का इतिहास रामायण काल से जुड़ा है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान राम माता सीता को लंका से वापस लाए, तो लोक-मत की संतुष्टि के लिए माता सीता ने यहाँ ‘अग्नि परीक्षा’ दी थी। मान्यता है कि अग्नि से निकलने के बाद उनके शरीर की ऊष्मा (गर्मी) से यहाँ का जल गर्म हो गया, जो आज भी निरंतर गर्म बना रहता है। यहाँ आने वाले श्रद्धालु माता सीता के पैरों के निशान (सीता चरण) की भी पूजा करते हैं।
3. विज्ञान और आस्था का अनूठा संगम
सीताकुंड की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ के गर्म पानी के झरने हैं। जहाँ सीताकुंड का जल साल भर खौलता रहता है, वहीं इसके ठीक पास स्थित रामकुंड, लक्ष्मण कुंड, भरत कुंड और शत्रुघ्न कुंड का पानी बिल्कुल शीतल (ठंडा) रहता है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह ‘डीप सीटेड थर्मोडायनेमिक्स’ और भू-गर्भीय हलचलों का परिणाम है, लेकिन भक्तों के लिए यह माता सीता का चमत्कार है।
4. मुंगेर सीताकुंड माघी मेला 2026 की प्रमुख तिथियां
मेले की शुरुआत 31 जनवरी से हो रही है, लेकिन कुछ दिन यहाँ विशेष महत्व रखते हैं:
- 31 जनवरी 2026: मेले का औपचारिक उद्घाटन।
- 01 फरवरी 2026 (माघी पूर्णिमा): सबसे मुख्य स्नान दिवस। इस दिन लाखों की भीड़ उमड़ती है।
- 15 फरवरी 2026 (महाशिवरात्रि): विशेष पूजा और अनुष्ठान।
- 03 मार्च 2026 (फाल्गुन पूर्णिमा): मेले का समापन।
5. सुरक्षा और सुविधाएं
प्रशासन ने इस बार सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। पूरे मेला परिसर में CCTV कैमरों से निगरानी रखी जाएगी। असामाजिक तत्वों पर नजर रखने के लिए पर्याप्त संख्या में महिला और पुरुष पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा:
- श्रद्धालुओं के लिए शुद्ध पेयजल और लाइटिंग की व्यवस्था।
- सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए भव्य मंच का निर्माण।
- श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए सरकारी स्तर पर रैन बसेरे और शौचालय।
6. खरीदारी और खान-पान
सीताकुंड मेला अपनी खरीदारी के लिए भी बहुत प्रसिद्ध है। यहाँ दूर-दराज से आए कारीगर लकड़ी के बेहतरीन फर्नीचर, जैसे पलंग, सोफा और कुर्सियां लाते हैं। इसके अलावा हस्तशिल्प, मिट्टी के खिलौने और घरेलू उपयोग की चीजों का बड़ा बाजार यहाँ लगता है।
7. मुंगेर सीताकुंड माघी मेला 2026 कैसे पहुँचें?
- रेल मार्ग: सबसे नजदीकी मुख्य स्टेशन जमालपुर जंक्शन (9 किमी) और मुंगेर रेलवे स्टेशन है।
- सड़क मार्ग: मुंगेर शहर से सीताकुंड की दूरी लगभग 6 से 8 किमी है। आप ऑटो या निजी वाहन से आसानी से पहुँच सकते हैं।
- हवाई मार्ग: सबसे नजदीकी हवाई अड्डा पटना (185 किमी) है।
मुंगेर का यह माघी मेला केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। अगर आप शांति, आध्यात्म और परंपरा को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो 31 जनवरी से शुरू हो रहे इस मेले में जरूर पधारें।























