Mobile Only Menu
  • Home
  • संस्कृति
  • नरक निवारण चतुर्दशी 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त और राजा श्वेत की पौराणिक कथा
Image

नरक निवारण चतुर्दशी 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त और राजा श्वेत की पौराणिक कथा

हिंदू धर्म में चतुर्दशी तिथि का बहुत महत्व है, लेकिन माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी बेहद खास मानी जाती है। इसे ‘नरक निवारण चतुर्दशी’ के नाम से जाना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव की उपासना करने से मनुष्य को नर्क की यातनाओं से मुक्ति मिलती है और जीवन के सभी पाप कट जाते हैं ।

वर्ष 2026 में यह पर्व कई मायनों में ऐतिहासिक होने वाला है, क्योंकि इसी दिन बिहार के पूर्वी चंपारण में विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना भी की जाएगी । आइए जानते हैं इस महापर्व की तिथि, शुभ मुहूर्त और इसके पीछे की रोचक कथा।


नरक निवारण चतुर्दशी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

साल 2026 में नरक निवारण चतुर्दशी 17 जनवरी, शनिवार को मनाई जाएगी । पंचांग के अनुसार, इस दिन चतुर्दशी तिथि का संयोग मासिक शिवरात्रि के साथ हो रहा है, जो इसकी महिमा को और बढ़ा देता है।

चतुर्दशी तिथि प्रारंभ: 16 जनवरी 2026 को रात्रि 10:22 बजे ।

चतुर्दशी तिथि समाप्त: 18 जनवरी 2026 को प्रातः 12:04 बजे ।

निशीथ काल पूजा मुहूर्त: 18 जनवरी की मध्यरात्रि 12:04 AM से 12:58 AM तक (यह समय पूजा और मंत्र सिद्धि के लिए अत्यंत शुभ है) ।

क्यों मनाई जाती है नरक निवारण चतुर्दशी?

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माघ मास की इसी चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव पहली बार शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे । इसके ठीक एक महीने बाद फाल्गुन मास की चतुर्दशी को उनका माता पार्वती के साथ विवाह संपन्न हुआ था, जिसे हम महाशिवरात्रि के रूप में मनाते हैं । इसलिए, माघ की इस चतुर्दशी को शिव पूजा के लिए महाशिवरात्रि के समान ही फलदायी माना जाता है

राजा श्वेत की कथा: नर्क से मुक्ति का रहस्य

नरक निवारण चतुर्दशी की सबसे प्रचलित कथा राजा श्वेत से जुड़ी है। प्राचीन काल में राजा श्वेत भगवान शिव के परम भक्त थे, लेकिन उनसे अनजाने में एक भूल हो गई थी। उन्होंने जीवन भर दान-पुण्य तो किया, लेकिन एक बार उनके द्वार से एक भूखा ब्राह्मण खाली हाथ लौट गया था ।

जब राजा की मृत्यु का समय आया, तो यमदूत उन्हें नर्क ले जाने लगे। राजा ने आश्चर्य से पूछा कि उन्होंने तो सदैव धर्म का पालन किया, फिर नर्क क्यों? तब यमदूतों ने उन्हें उस ब्राह्मण वाली घटना याद दिलाई। राजा के अनुरोध पर उन्हें एक वर्ष का अतिरिक्त जीवन मिला। उन्होंने ऋषियों से इसका उपाय पूछा, तो ऋषियों ने उन्हें माघ कृष्ण चतुर्दशी का व्रत करने और भगवान शिव को बेर अर्पित करने की सलाह दी । राजा ने विधि-विधान से यह व्रत किया और अंततः उन्हें शिवलोक की प्राप्ति हुई। तभी से यह दिन ‘नरक निवारण’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ ।

विशेष संयोग: विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना

17 जनवरी 2026 का दिन भारत के धार्मिक इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। इस दिन बिहार के कैथवलिया (पूर्वी चंपारण) स्थित विराट रामायण मंदिर में दुनिया के सबसे बड़े शिवलिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की जाएगी । यह शिवलिंग 33 फीट ऊंचा और 210 टन वजनी है, जिसे तमिलनाडु के महाबलीपुरम में तराशा गया है । शास्त्रों के अनुसार, इस पवित्र तिथि पर शिवलिंग की स्थापना भक्तों को सहस्त्र गुना फल प्रदान करेगी।

पूजा विधि और बेर का महत्व

इस व्रत में ‘बेर’ (Jujube) का विशेष महत्व है, खासकर बिहार और मिथिलांचल के क्षेत्रों में ।

1. ब्रह्म मुहूर्त में स्नान: सूर्योदय से पूर्व उठकर जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें ।

2. शिव पूजन: शिवलिंग का गंगाजल और दूध से अभिषेक करें। उन्हें बेलपत्र, धतूरा और विशेष रूप से बेर अर्पित करें ।

3. मंत्र जाप: ‘ॐ नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना इस दिन अत्यंत लाभकारी होता है ।

4. व्रत पारण: इस व्रत में पूरे दिन निराहार रहने का विधान है। शाम को पूजा के बाद ‘बेर’ और ‘तिल’ खाकर ही व्रत खोला जाता है ।

Releated Posts

मुंगेर सीताकुंड माघी मेला 2026: 31 जनवरी से शुरू, राजकीय दर्जा और पूरी जानकारी

बिहार के मुंगेर जिले में स्थित ऐतिहासिक और पौराणिक सीताकुंड परिसर एक बार फिर लाखों श्रद्धालुओं के स्वागत…

ByByManvinder Mishra Jan 30, 2026

गणेश जयंती 2026: तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि | तिलकुण्ड चतुर्थी का महत्व

हिंदू धर्म में भगवान गणेश को ‘विघ्नहर्ता’ और ‘मंगलमूर्ति’ के रूप में पूजा जाता है। वैसे तो हर…

ByByPrachi Singh Jan 18, 2026

बिहार शिवलिंग स्थापना : विराट रामायण मंदिर में रचा गया नया इतिहास

17 जनवरी 2026 का दिन बिहार के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। बिहार के…

ByByManvinder Mishra Jan 17, 2026

वसंत पंचमी 2026: सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त, तारीख और पूरी पूजा विधि

सर्दियों की विदाई और गुनगुनी धूप के साथ जब सरसों के खेत पीले रंगों से लद जाते हैं,…

ByByPrachi Singh Jan 14, 2026

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top