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A wide, high-quality 4-lane national highway in Bihar, India (NH-22) with lush green fruit-bearing trees on both sides. A scenic 'Dada Ka Dalan' traditional rest stop with modern amenities. Clear blue sky, high-speed cars moving smoothly, and local farmers tending to roadside plantations. Professional architectural photography style, daylight, vibrant greenery."

मुजफ्फरपुर मेगा फूड पार्क (मोतीपुर): बिहार की औद्योगिक क्रांति और रोजगार

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले का मोतीपुर ब्लॉक आज एक बड़ी औद्योगिक क्रांति की दहलीज पर खड़ा है। यहाँ बन रहा मुजफ्फरपुर मेगा फूड पार्क (मोतीपुर) न केवल उत्तर बिहार की अर्थव्यवस्था को बदलने वाला है, बल्कि यह किसानों और युवाओं के लिए सुनहरे अवसरों का नया द्वार भी खोल रहा है ।

यहाँ इस मेगा फूड पार्क से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी आसान भाषा में दी गई है:

मुजफ्फरपुर मेगा फूड पार्क मोतीपुर
AI Image

मुजफ्फरपुर मेगा फूड पार्क मोतीपुर

मुजफ्फरपुर का यह मेगा फूड पार्क केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना’ (PMKSY) के तहत मंजूर किया गया है । खगड़िया के बाद यह बिहार का दूसरा बड़ा फूड पार्क है । इसे बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकार (BIADA) द्वारा मोतीपुर के दामोदरपुर में लगभग 78 एकड़ जमीन पर विकसित किया जा रहा है ।

इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग ₹403 करोड़ का निवेश होने का अनुमान है । इसमें से ₹103 करोड़ बुनियादी ढांचे (जैसे सड़क, बिजली, पानी और स्टोरेज) पर खर्च किए जा रहे हैं, जबकि बाकी ₹300 करोड़ विभिन्न कंपनियों द्वारा अपनी यूनिट लगाने में निवेश किए जाएंगे।

प्रमुख कंपनियाँ और निवेश: मुजफ्फरपुर मेगा फूड पार्क मोतीपुर

मोतीपुर मेगा फूड पार्क ने देश की बड़ी कंपनियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यहाँ कई इकाइयां काम शुरू कर चुकी हैं और कई कतार में हैं:

  1. राकेश मसाला (Rakesh Masala): लगभग ₹94 करोड़ के निवेश के साथ यह यहाँ की प्रमुख इकाइयों में से एक है ।
  2. नीरामय फूड्स (Patanjali Biscuits): पतंजलि समूह से जुड़ी इस कंपनी ने यहाँ बिस्कुट उत्पादन शुरू कर दिया है। हाल ही में डीएम सुब्रत कुमार सेन ने इस फैक्ट्री का निरीक्षण भी किया था।
  3. अनमोल फीड्स (Anmol Feeds): कंपनी ने करीब ₹300 करोड़ के निवेश से ब्रायलर ब्रीडर और फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने का प्रस्ताव दिया है।
  4. अदाणी, पारले और हल्दीराम: अदाणी समूह, ब्रिटेनिका, पारले-जी और हल्दीराम जैसी दिग्गज कंपनियों ने भी यहाँ अपनी यूनिट लगाने में गहरी दिलचस्पी दिखाई है।
  5. इथेनॉल प्लांट: मोतीपुर अब इथेनॉल उत्पादन का भी बड़ा केंद्र बन रहा है, जहाँ मक्का आधारित कई प्लांट चालू हो रहे हैं।

आधुनिक सुविधाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर

इस पार्क को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यहाँ किसानों की फसल बर्बाद न हो और व्यापारियों को हर सुविधा मिले :

  • कोल्ड स्टोरेज: आलू, प्याज और फलों के लिए विशाल कोल्ड स्टोरेज बनाए गए हैं।
  • लीची और केला के लिए खास सुविधा: मुजफ्फरपुर की शाही लीची के लिए ‘पैक हाउस’ और केलों को पकाने के लिए आधुनिक ‘राइपनिंग चैंबर’ तैयार किए गए हैं।
  • प्लग एंड प्ले शेड्स: छोटे उद्यमियों के लिए रेडी-टू-यूज शेड्स बनाए गए हैं, जहाँ वे तुरंत मशीन लगाकर काम शुरू कर सकते हैं।
  • बिजली और वेस्ट मैनेजमेंट: निर्बाध बिजली के लिए एचटी ग्रिड लाइन और प्रदूषण रोकने के लिए आधुनिक कचरा उपचार प्लांट (ETP) की व्यवस्था है ।

बिहार की नई औद्योगिक नीति (BIIPP-2025) का लाभ

बिहार सरकार ने अगस्त 2025 में बिहार इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पैकेज‘ (BIIPP-2025) लॉन्च किया है, जो निवेशकों के लिए किसी लॉटरी से कम नहीं है । इसके तहत:

  • अगर कोई कंपनी ₹100 करोड़ का निवेश करती है और 1,000 लोगों को रोजगार देती है, तो उसे मुफ्त जमीन (₹1 के टोकन पर) दी जा रही है ।
  • निवेशकों को 30% तक की कैपिटल सब्सिडी या 14 वर्षों तक भारी जीएसटी (SGST) रिइम्बर्समेंट का विकल्प मिलता है।
  • स्थानीय कामगारों को रोजगार देने पर सरकार ₹5,000 प्रति माह तक की सहायता भी दे रही है ।

किसानों और युवाओं को क्या मिलेगा?

इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा फायदा स्थानीय लोगों को होगा:

  • रोजगार: माना जा रहा है कि इस पार्क से लगभग 5,000 लोगों को सीधा रोजगार और हजारों लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।
  • किसानों की आय: लगभग 25,000 से 30,000 किसान इस नेटवर्क से जुड़ेंगे । उन्हें अपनी फसल (खासकर मक्का और लीची) के बेहतर दाम मिलेंगे क्योंकि उन्हें बिचौलियों के बजाय सीधे कंपनियों को बेचने का मौका मिलेगा ।
  • पलायन पर रोक: मुजफ्फरपुर के युवाओं को अब काम की तलाश में दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा ।

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