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Nomad Shubham: मुंगेर के सरकारी स्कूल से 165 देशों के सफर तक, मिथिला के इस लाल ने दुनिया को झुकने पर मजबूर किया

बिहार की मिट्टी में कुछ ऐसा है जो नामुमकिन को मुमकिन बना देता है। मुंगेर जिले के एक छोटे से गाँव से निकला एक लड़का, जिसके पास न तो बहुत पैसे थे और न ही कोई रसूख, आज दुनिया के लिए ‘चरम अन्वेषण’ (Extreme Exploration) की मिसाल बन चुका है। हम बात कर रहे हैं शुभम कुमार की, जिन्हें डिजिटल दुनिया ‘नोमैड शुभम’ के नाम से जानती है। जनवरी 2026 तक 165 देशों की सफल यात्रा पूरी कर चुके शुभम ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे फौलादी हों, तो सात समंदर पार करना भी मुश्किल नहीं है ।

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कोटा की तंग गलियों से निकला विश्व यात्री : Nomad Shubham

शुभम का जन्म 2 दिसंबर 2002 को एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता एक शिक्षक हैं और माँ गृहिणी । शुभम की शुरुआती पढ़ाई मुंगेर के ही एक सरकारी नगर निगम स्कूल में हुई। साल 2017 में उन्हें इंजीनियरिंग (IIT-JEE) की तैयारी के लिए कोटा भेजा गया था। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। कोटा के बंद कमरों में शुभम का मन नहीं लगा। उसी दौरान उन्होंने एक टेड टॉक (TED Talk) देखा, जिसने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी। वह टॉक थी “बिना पैसे के दुनिया कैसे घूमें”।

शुभम ने एक बड़ा फैसला लिया। उन्होंने अपनी कोचिंग की फीस से मिले ₹40,000-₹50,000 के रिफंड को अपनी पहली विदेश यात्रा का आधार बनाया

घर वालों से ‘झूठ’ और ‘IAS’ की कवर स्टोरी

शुभम की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा उनका संघर्ष है। उनके माता-पिता को लगता था कि वह दिल्ली में रहकर आईएएस (IAS) की तैयारी कर रहे हैं। वे उन्हें हर महीने ₹10,000 खर्च के लिए भेजते थे, लेकिन शुभम उन पैसों को अपनी यात्राओं में लगा रहे थे । उन्होंने लंबे समय तक यह बात छिपाए रखी कि वह दिल्ली में नहीं, बल्कि कभी रूस की बर्फीली सड़कों पर हिचहाइकिंग कर रहे हैं तो कभी मध्य एशिया के रेगिस्तानों में रात बिता रहे हैं ।

165 देश और भारतीय पासपोर्ट का गौरव

भारतीय पासपोर्ट पर दुनिया घूमना आसान नहीं है, लेकिन शुभम ने इसे एक चुनौती की तरह लिया। जनवरी 2026 तक वे 165 देशों का दौरा कर चुके हैं । उनकी यात्राओं में साइबेरिया का ‘ओयमायाकोन’ (Oymyakon) गाँव सबसे यादगार रहा, जहाँ का तापमान -71.2°C तक गिर जाता है । उन्होंने केवल लग्जरी देशों की यात्रा नहीं की, बल्कि अफगानिस्तान, वेनेजुएला और अफ्रीका के उन दुर्गम इलाकों में भी गए जहाँ जाना बड़े-बड़े यात्रियों के बस की बात नहीं होती ।

यात्रा के प्रमुख आंकड़े (जनवरी 2026)विवरण
कुल देश165
यूट्यूब सब्सक्राइबर्स3.19 मिलियन
कुल वीडियो व्यूज877 मिलियन से अधिक
प्रमुख आय स्रोतयूट्यूब विज्ञापन और ‘वीसाफू’ (VisaFu)

वित्तीय सफलता: ‘वीसाफू’ और डिजिटल उद्यमिता

शुरुआत में शुभम ने ट्यूशन पढ़ाकर और होटलों में स्वयंसेवा (Volunteering) करके खर्च निकाला । लेकिन आज वे एक सफल उद्यमी भी हैं। उन्होंने VisaFu नाम से एक वीसा कंसल्टेंसी फर्म शुरू की है, जो भारतीयों के लिए ई-वीसा की प्रक्रिया को आसान बनाती है । इसके अलावा, उनके यूट्यूब चैनल से होने वाली आय उन्हें दुनिया के कोने-कोने तक पहुँचने में मदद करती है।

Nomad shubham: मिथिला का गौरव और सामाजिक प्रभाव

शुभम अपनी हर वीडियो में अपनी जड़ों को नहीं भूलते। अक्सर वे अपनी मैथिली भाषा और बिहारी संस्कृति का प्रचार वैश्विक मंचों पर करते दिखते हैं । आज वे केवल एक ट्रैवलर नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं के प्रेरणास्रोत हैं। उन्हें कई मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है और उनकी लोकप्रियता का आलम यह है कि देश के उच्च पदों पर बैठे लोग भी उनके काम की सराहना करते हैं ।

अगला लक्ष्य: संयुक्त राष्ट्र के सभी देश

शुभम का मिशन अभी खत्म नहीं हुआ है। उनका लक्ष्य संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 देशों की यात्रा करने वाला सबसे युवा भारतीय बनना है । वे वर्तमान में दक्षिण अमेरिका और ओशिनिया के देशों को कवर करने की योजना बना रहे हैं ।

नोमैड शुभम की कहानी हमें सिखाती है कि सपने देखने के लिए बैंक बैलेंस की नहीं, बल्कि एक अटूट विश्वास की जरूरत होती है। मुंगेर का यह लड़का आज पूरी दुनिया के लिए भारत का ‘एम्बेसडर’ बन चुका है।

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