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Karbigahiya Thermal Power Plant in Patna ,करबिगहिया थर्मल पावर प्लांट

पटना का करबिगहिया थर्मल पावर प्लांट(Karbigahiya Thermal Power Plant)

पटना (Patna) के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है. शहर के बीचों-बीच, रेलवे स्टेशन के ठीक पीछे स्थित करबिगहिया थर्मल पावर प्लांट (Karbigahiya Thermal Power Plant), जो दशकों से वीरान पड़ा था, अब जल्द ही देश के पहले और दुनिया के चौथे ऊर्जा संग्रहालय (Energy Museum) के रूप में अपनी नई पहचान बनाने वाला है.

करीब 200 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह प्रोजेक्ट न केवल बिहार के गौरवशाली इतिहास को सहेजेगा, बल्कि विज्ञान और तकनीक में रुचि रखने वालों के लिए एक अनोखा अनुभव भी होगा.   

आइए जानते हैं इस प्रोजेक्ट की हर वो खास बात, जो इसे एक ‘मस्ट विजिट’ डेस्टिनेशन बनाती है.

Karbigahiya Thermal Power Plant in Patna ,करबिगहिया थर्मल पावर प्लांट
AI Image

क्यों खास है यह प्रोजेक्ट? (World’s 4th Energy Museum)

बिहार सरकार का दावा है कि बनने के बाद यह दुनिया का चौथा ऐसा संग्रहालय होगा. इससे पहले केवल इस्तांबुल (तुर्की), लंदन (यूके) और लिस्बन (पुर्तगाल) में ही पुराने पावर प्लांट्स को इस तरह के संग्रहालयों में बदला गया है.   यह भारत का पहला ऐसा म्यूजियम होगा जो पूरी तरह से ‘ऊर्जा’ (Energy) को समर्पित है. इसे ‘एडेप्टिव रीयूज’ (Adaptive Reuse) तकनीक के तहत बनाया जा रहा है, यानी पुरानी इमारत को तोड़े बिना उसका नया इस्तेमाल करना.

इतिहास के पन्नों में करबिगहिया पावर प्लांट

आज की पीढ़ी शायद यह न जानती हो, लेकिन एक समय था जब पटना के वीआईपी इलाकों की रोशनी इसी प्लांट से आती थी.

  • स्थापना: इसे 1930 में अंग्रेजों के जमाने में बनाया गया था.   
  • किसे मिलती थी बिजली?: राजभवन, पटना हाई कोर्ट और सचिवालय जैसी महत्वपूर्ण इमारतों को रोशन करने की जिम्मेदारी इसी प्लांट पर थी.   
  • कब हुआ बंद?: 1984 में इसे सेवामुक्त (Decommissioned) कर दिया गया. तब से यह करीब 3 एकड़ में फैला परिसर कबाड़ और झाड़ियों में तब्दील हो गया था.   

संग्रहालय में आपको क्या देखने को मिलेगा?

इस म्यूजियम को बोरिंग इतिहास दिखाने के लिए नहीं, बल्कि एक इंटरैक्टिव एक्सपीरियंस देने के लिए डिजाइन किया जा रहा है. बैंगलोर की कंपनी EDC Creative Technology Solutions ने इसका खाका तैयार किया है.   

प्लांट की पुरानी 126 फीट ऊंची चिमनी, जो पटना के स्काईलाइन का हिस्सा रही है, को गिराया नहीं जाएगा. इसे संरक्षित कर संग्रहालय के मुख्य आकर्षण या ‘लाइटहाउस’ के रूप में विकसित किया जाएगा. रात के समय इसमें विशेष लाइटिंग की व्यवस्था हो सकती है.   

संग्रहालय के अंदर पुराने टरबाइन (Turbines) और बॉयलर (Boilers) को उनके मूल रूप में रखा जाएगा. ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) जैसी आधुनिक तकनीक के जरिए आप इन बंद पड़ी मशीनों को अपनी आंखों के सामने “काम करते हुए” देख पाएंगे. यह आपको 1930 के दौर में वापस ले जाएगा.   

अतीत से भविष्य की यात्रा (Thematic Zones)

म्यूजियम को अलग-अलग हिस्सों में बांटा जाएगा जो ऊर्जा की पूरी कहानी सुनाएंगे :   

  • प्राचीन काल: बादलों की गड़गड़ाहट और बिजली को लेकर इंसानों की शुरुआती समझ.
  • विज्ञान: फैराडे और टेस्ला के आविष्कार.
  • स्मार्ट होम्स (Smart Homes): भविष्य के घर कैसे होंगे? कैसे हम बिजली बचा सकते हैं और खुद बिजली बना सकते हैं (Solar Energy), इसे मॉडल्स के जरिए समझाया जाएगा.
  • किड्स ज़ोन: बच्चों के लिए खास जगह जहाँ वे सुरक्षित तरीके से विज्ञान के प्रयोग कर सकेंगे.

पर्यटन और शिक्षा के लिए वरदान

पटना जंक्शन के पास होने के कारण, यह पर्यटकों के लिए एक सुलभ स्थान होगा. बिहार संग्रहालय (Bihar Museum) और पटना संग्रहालय के बाद यह शहर का तीसरा बड़ा सांस्कृतिक केंद्र बनेगा.

  • छात्रों के लिए: इंजीनियरिंग और स्कूल के छात्रों के लिए यह एक ‘लर्निंग सेंटर’ होगा.
  • शोध (Research): यहाँ ऊर्जा संरक्षण पर रिसर्च की सुविधाएं भी होंगी.   

बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड (BSPHCL) इस प्रोजेक्ट को लीड कर रही है. हाल ही में हुई उच्च स्तरीय बैठक में इसके निर्माण और एजेंसी चयन की प्रक्रिया को हरी झंडी मिल चुकी है.   

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