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रीगा चीनी मिल

रीगा चीनी मिल: 4 साल बाद लौटी रौनक, जानिए बिहार के सीतामढ़ी में आए इस बड़े बदलाव की पूरी कहानी

बिहार के सीतामढ़ी जिले के लिए 26 दिसंबर 2024 का दिन किसी त्यौहार से कम नहीं था। करीब चार साल के लंबे और दर्दनाक इंतजार के बाद, ऐतिहासिक रीगा चीनी मिल (Riga Sugar Mill) की चिमनियों से दोबारा धुआं निकलता देखा गया । यह मिल, जो कभी उत्तर बिहार की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हुआ करती थी, वित्तीय संकट के कारण 2020 में बंद हो गई थी। लेकिन अब, कर्नाटक के प्रसिद्ध निरानी ग्रुप (Nirani Sugars) के हाथों में कमान आने के बाद, यहाँ न सिर्फ चीनी का उत्पादन शुरू हुआ है, बल्कि इसे देश के एक बड़े ‘ऊर्जा हब’ में बदलने की तैयारी भी चल रही है ।   

इस विस्तृत रिपोर्ट में हम आसान भाषा में समझेंगे कि मिल के बंद होने से लेकर दोबारा खुलने तक क्या-क्या हुआ, नए मालिक की क्या योजनाएं हैं, और सबसे अहम—किसानों को इससे क्या फायदा होगा।

रीगा चीनी मिल
AI Image

क्यों बंद हो गई थी रीगा मिल?

रीगा चीनी मिल की स्थापना 1933 में अंग्रेजों के जमाने में हुई थी। दशकों तक यह मिल सीतामढ़ी, शिवहर और मुजफ्फरपुर के करीब 50,000 किसान परिवारों की रोजी-रोटी का जरिया रही । लेकिन 2018-19 के आसपास कहानी बिगड़ने लगी।   

पुराने प्रबंधन (धनुका ग्रुप) के तहत मिल भारी कर्ज में डूब गई। गन्ने की कीमतों का भुगतान न कर पाने और लगातार हो रहे घाटे के कारण 2020-21 के पेराई सत्र में मिल में ताला लटक गया । यह बंदी सिर्फ एक फैक्ट्री का बंद होना नहीं था, बल्कि हजारों किसानों के घरों में आर्थिक अंधेरा छा जाने जैसा था। किसानों का करोड़ों रुपये का बकाया (Arrears) फंस गया और मजदूर बेरोजगार हो गए । मामला एनसीएलटी (NCLT) कोर्ट में गया, जहाँ लंबी कानूनी लड़ाई और कई बार नीलामी फेल होने के बाद आखिरकार समाधान निकला।   

निरानी ग्रुप की एंट्री: ₹86.5 करोड़ में नई शुरुआत

जब मिल को कबाड़ के भाव बेचने (Liquidation) की नौबत आ गई थी, तब कर्नाटक के औद्योगिक दिग्गज एमआरएन (MRN) ग्रुप की कंपनी ‘निरानी शुगर्स लिमिटेड’ ने इसमें दिलचस्पी दिखाई। सितंबर 2024 में हुई नीलामी में निरानी शुगर्स ने ₹86.5 करोड़ की बोली लगाकर इस मिल का अधिग्रहण कर लिया ।   

यह डील बिहार के लिए बहुत बड़ी थी क्योंकि निरानी ग्रुप चीनी उद्योग का एक बड़ा खिलाड़ी है, जिसके पास कर्नाटक और महाराष्ट्र में पहले से ही 9 चीनी मिलें और 19 डिस्टिलरी (शराब/इथेनॉल कारखाने) चलाने का अनुभव है।

सिर्फ चीनी मिल नहीं, अब बनेगा ‘ऊर्जा हब’

निरानी शुगर्स का प्लान सिर्फ पुरानी मिल को चलाना नहीं है, बल्कि इसे पूरी तरह से आधुनिक बनाना है। 26 दिसंबर 2024 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में कंपनी ने अपनी विस्तार योजनाओं (Expansion Plans) का खुलासा किया, जो हैरान करने वाली हैं।

कंपनी के चेयरमैन डॉ. मुरुगेश आर. निरानी के अनुसार, मिल का कायाकल्प इन चार बड़े कदमों से होगा:

  1. पेराई क्षमता दोगुनी होगी: अभी यह मिल एक दिन में 5,000 टन गन्ना पेर सकती है (5,000 TCD)। इसे बढ़ाकर 10,000 टन प्रतिदिन किया जाएगा। इसका सीधा मतलब है कि अब दोगुने किसानों से गन्ना खरीदा जा सकेगा।
  2. विशाल इथेनॉल प्लांट: सबसे बड़ा बदलाव यहाँ होगा। अभी मिल की इथेनॉल क्षमता सिर्फ 45 KLPD है, जिसे बढ़ाकर 545 KLPD किया जाएगा। यानी यहाँ चीनी से ज्यादा फोकस ‘ग्रीन फ्यूल’ बनाने पर होगा।
  3. बिजली उत्पादन: मिल में गन्ने के कचरे (खोई) से बिजली बनाने की क्षमता 11 मेगावाट से बढ़ाकर 50 मेगावाट की जाएगी।
  4. बायोगैस प्लांट: मिल से निकलने वाले कचरे से सीएनजी (CBG) बनाने का भी प्लान है, जो 20 टन प्रतिदिन की क्षमता का होगा।

किसानों के लिए क्या है खास? बकाया और भाव

मिल खुलने की खुशी अपनी जगह है, लेकिन किसानों के मन में सबसे बड़ा सवाल उनके पुराने बकाये (Arrears) को लेकर था। रीगा मिल पर किसानों का करीब ₹51 करोड़ से ज्यादा बकाया था ।   

कानूनी तौर पर, जब कोई कंपनी नीलामी (NCLT) में बिकती है, तो नया मालिक पुराने कर्ज के लिए जिम्मेदार नहीं होता (‘Clean Slate’ नियम)। लेकिन बिहार सरकार और प्रशासन ने किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए रास्ता निकाला।

  • बकाया भुगतान: 2025 के अपडेट्स के अनुसार, बिहार सरकार ने पहल करते हुए किसानों के बकाये भुगतान के लिए राशि मंजूर की। जुलाई 2025 में गन्ना उद्योग मंत्री ने किसानों को चेक बांटकर भुगतान प्रक्रिया की शुरुआत भी की ।   
  • गन्ने का भाव: 2024-25 सत्र के लिए बिहार सरकार ने गन्ने के भाव में ₹20 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की है, जिससे किसानों को अब अपनी फसल का बेहतर दाम मिलेगा ।   

इथेनॉल पॉलिसी: बिहार के लिए गेम चेंजर

रीगा मिल का यह पुनरुद्धार बिहार की इथेनॉल उत्पादन प्रोत्साहन नीति (2021/2025) का एक शानदार उदाहरण है। केंद्र सरकार ने 2025-26 तक पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य रखा है ।   

इस नीति के तहत, चीनी मिलों को अब चीनी बनाने की बाध्यता नहीं है। वे गन्ने के रस या शीरे (Molasses) से सीधे इथेनॉल बना सकते हैं। रीगा मिल में 545 KLPD का विशाल प्लांट लगाने का फैसला इसी नीति का परिणाम है। इससे मिल को साल भर कमाई होगी और वे किसानों को समय पर भुगतान कर पाएंगे। सरकार ने 2025-26 सत्र के लिए इथेनॉल उत्पादन पर लगी सभी रोक भी हटा दी है, जो इस उद्योग के लिए सोने पे सुहागा है ।   

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