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ईशान किशन का दर्द : बिहार की विरासत का शिकार?

जब प्रतिभा राजनीति के आगे पिछड़ जाती है

देश भर में हजारों क्रिकेटर अपने सपने पूरे करने के लिए जद्दोजहद करते हैं। लेकिन ईशान किशन का सफर सिर्फ खेल की बात नहीं है – यह एक पूरे राज्य की नाकामयाबी की कहानी है। जहां संजू सैमसन, जितेश शर्मा और ऋषभ पंत को बार-बार मौके मिल रहे हैं, वहीं ईशान को भारतीय टीम में जगह न मिलना सिर्फ खेल से जुड़ा सवाल नहीं है।

बिहार क्रिकेट बोर्ड की खस्ताहाली: ईशान और सैकड़ों खिलाड़ियों का दर्द

बिहार क्रिकेट एसोसिएशन (बीसीए) का नाम लेते ही भ्रष्टाचार, गैर-पारदर्शिता और खिलाड़ियों की अनदेखी याद आ जाती है। 2004 से 2017 तक बिहार को रणजी ट्रॉफी जैसी महत्वपूर्ण प्रतियोगिताओं से बाहर रखा गया था। चौदह साल! बिहार की पूरी एक पीढ़ी खेल नहीं पा सकी क्योंकि कुछ ताकतवर प्रशासक अपने पसंदीदा लोगों को आगे करने में लगे थे। प्रतिभाशाली युवा क्रिकेटर बिना अपनी गलती के अपनी जिंदगी के सबसे महत्वपूर्ण साल खो गए।

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भ्रष्टाचार की गंदी नदी

2020 में जब बिहार के खिलाड़ियों की आर्थिक स्थिति की बात सामने आई, तो एक भयानक सच्चाई उजागर हुई। बीसीए को बीसीसीआई की ओर से 11 करोड़ रुपये दिए गए, लेकिन खिलाड़ियों को न तो मैच की फीस मिली और न ही यात्रा भत्ता। एक वरिष्ठ खिलाड़ी को सीजन भर में सिर्फ 75,000 रुपये की टीए/डीए मिलनी चाहिए थी। लेकिन वह भी नहीं मिल रही थी। अंडर-16 के खिलाड़ियों तक ने अपना पैसा नहीं देखा। बीसीए के अधिकारी तो अपनी सैलरी ले रहे थे, लेकिन जिन नौजवानों के दम पर यह सब चल रहा था, वे ट्रेनिंग के लिए पैसे का इंतजार कर रहे थे।

2015 में जब देलॉइट ने बीसीसीआई के सभी एफिलिएट्स का ऑडिट किया, तो बिहार के बारे में जो रिपोर्ट आई वह झकझोर देने वाली थी – क्रिकेट उपकरणों का कोई रिकॉर्ड नहीं, इनकम टैक्स रिटर्न कभी दाखिल नहीं किए गए, कोई इंटरनल ऑडिटर नियुक्त नहीं। लेकिन क्या हुआ? कुछ भी नहीं। किसी को कोई सजा नहीं हुई।

बीसीसीआई ने 2023 में अकेले बिहार को 12.46 करोड़ रुपये दिए और 2019 से 2022 के बीच 20.21 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। लेकिन इस पैसे का कोई ऑडिट नहीं, कोई जवाबदेही नहीं। किसी को भी बीसीसीआई से ऑडिटेड एकाउंट्स नहीं मिल सके।

ईशान और दूसरे खिलाड़ियों में क्या फर्क है?

ईशान किशन (अब झारखंड), संजू सैमसन (केरल), जितेश शर्मा (विदर्भ) और ऋषभ पंत (दिल्ली) – सभी विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं, लेकिन चुनाव में एक भारी अंतर आता है।

संजू सैमसन – राजस्थान रॉयल्स के कप्तान, पिछले साल तीन शतक बनाए, 200 से ऊपर स्ट्राइक रेट। एक इंटरनेशनल ब्रांड, एक मजबूत राज्य क्रिकेट बोर्ड का समर्थन, कोई प्रशासनिक गड़बड़ी नहीं।

जितेश शर्मा – विदर्भ से आता है। आरसीबी के साथ आईपीएल 2025 में शानदार प्रदर्शन किया। डेथ ओवर्स में फिनिशर की भूमिका अदा कर रहा है। विदर्भ क्रिकेट बोर्ड सही ढंग से काम कर रहा है।

ऋषभ पंत – उनका कमबैक स्टोरी ही दूसरी है। कार एक्सिडेंट से बच गए, लगभग दो साल बाद वापसी की। इस तरह की आइकॉनिक कहानी को बीसीसीआई खुद बढ़ावा देता है। उन्हें अनलिमिटेड मौके हैं क्योंकि उनका मार्केट वैल्यू, उनकी कहानी, उनकी क्षमता सब कुछ शीर्ष पर है।

ईशान किशन – 2024 की शुरुआत में बीसीसीआई से सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट हटा दिया गया क्योंकि उन्होंने रणजी ट्रॉफी खेलने से मना कर दिया था। मानसिक थकावट की वजह से। लेकिन 2025-26 में झारखंड के लिए रणजी ट्रॉफी में उन्होंने तमिलनाडु के खिलाफ शतक लगाया। सैमसन, जितेश और पंत को बार-बार मौके मिल रहे हैं, लेकिन ईशान को? सैमसन को बांग्लादेश के खिलाफ 111 का शतक लगने के बाद भी ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर छोड़ दिया गया। लेकिन उन्हें बाद में मौके मिल गए। ईशान को हर बार नजरअंदाज किया जा रहा है।​

बिहार का बोझ झारखंड पर

एक दिलचस्प बात है – ईशान किशन अब झारखंड के लिए खेलता है। झारखंड! वही झारखंड जो 2004 से 2018 तक बिहार से अलग था। और आज झारखंड किस जगह पर है?

झारखंड क्रिकेट एसोसिएशन (जेएससीए) ने एक विश्व-स्तरीय स्टेडियम बनवाया है – जेएससीए इंटरनेशनल स्टेडियम, रांची। यह स्टेडियम इंटरनेशनल मैचों की मेजबानी करता है। इंग्लैंड के साथ टेस्ट सीरीज यहीं खेली गई।

अब बिहार क्या है? बिहार अभी भी राजगीर में एक अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम बनवाने की बात कर रहा है। बिहार की बीसीएच अभी भी कोर्ट केसों में फंसी हुई है। बिहार के खिलाड़ियों का अभी भी कुछ पैसा बकाया हो सकता है। और ईशान? ईशान बिहार से निकलकर झारखंड में चला गया क्योंकि वहां काम बेहतर था।

असली समस्या

असली समस्या यह है कि बीसीसीआई बिहार के क्रिकेट बोर्ड को ठीक करने में नाकाम रहा है। हजारों खिलाड़ी उसी भ्रष्ट व्यवस्था की वजह से दर दर भटक रहे हैं। चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी है। ट्रेनिंग सुविधाएं नहीं हैं। पटना जैसे शहरों में जहां एक क्रिकेटिंग परंपरा है, वहां भी अराजकता है।

जब सैमसन, जितेश और पंत को बार-बार मौके मिल रहे हैं, तब ईशान की अनदेखी सिर्फ खेल से जुड़ा मुद्दा नहीं है। यह एक राज्य की भ्रष्ट व्यवस्था द्वारा अपने खिलाड़ियों को कमजोर करने की कहानी है। यह एक खिलाड़ी की प्रतिभा को व्यवस्था के गंदे खेल में फंसने की कहानी है।

क्या ईशान के पास अब भी मौका है? हां, क्योंकि वह अपना खेल दिखा रहे हैं। लेकिन जब तक बिहार क्रिकेट बोर्ड को ठीक नहीं किया जाता, जब तक भ्रष्टाचार को जड़ से नहीं उखाड़ा जाता, तब तक हजारों ईशान होंगे जो अपनी प्रतिभा को व्यवस्था की भेंट देते रहेंगे।

बिहार एक बड़ा राज्य है। भारत का तीसरा सबसे आबाद राज्य। लेकिन क्रिकेट में बिहार कुछ नहीं है। क्यों? क्योंकि प्रशासकों को अपनी कुर्सी से ज्यादा खिलाड़ियों की चिंता नहीं है।

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