बिहार सरकार की तरफ से आई खुशखबरी लोगों के स्वास्थ्य सेवाओं में एक बड़ा बदलाव लाने वाली है। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने आधुनिक चिकित्सा का मार्ग प्रशस्त करते हुए सात जिलों में 50 बेड वाले एकीकृत आयुष अस्पताल खुलवाने की घोषणा की है। यह परियोजना आने वाले वर्ष 2025-26 में अमल में आएगी और राज्य भर में हजारों लोगों को पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति से इलाज पाने का सुनहरा अवसर देगी।

आयुष अस्पताल कहां-कहां खुलेंगे?
यह सात आधुनिक अस्पताल बिहार के प्रमुख जिलों में स्थापित किए जाएंगे। गोपालगंज, सीवान, मधुबनी, दरभंगा, बेगूसराय, गया और मोतिहारी – ये सभी जिले इन आयुष अस्पतालों से लाभान्वित होंगे। इस परियोजना का उद्देश्य राज्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समान रूप से स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना है। हर अस्पताल में 50 बेड होंगे, जिससे एक बार में काफी संख्या में मरीजों का इलाज संभव हो सकेगा।
| जिले का नाम | क्षेत्र | सुविधा |
|---|---|---|
| गोपालगंज | दक्षिण-पश्चिम बिहार | 50 बेड आयुष अस्पताल |
| सीवान | दक्षिण-पश्चिम बिहार | 50 बेड आयुष अस्पताल |
| मधुबनी | उत्तर बिहार | 50 बेड आयुष अस्पताल |
| दरभंगा | उत्तर बिहार | 50 बेड आयुष अस्पताल |
| बेगूसराय | पूर्वी बिहार | 50 बेड आयुष अस्पताल |
| गया | दक्षिण बिहार | 50 बेड आयुष अस्पताल |
| मोतिहारी | पूर्व-दक्षिण बिहार | 50 बेड आयुष अस्पताल |
क्या होगा इन अस्पतालों में खास?
ये आयुष अस्पताल सिर्फ एक चिकित्सा पद्धति तक सीमित नहीं रहेंगे। ये “एकीकृत अस्पताल” होंगे, यानी एक ही छत के नीचे आपको कई तरह की पारंपरिक भारतीय चिकित्सा प्रणालियों का फायदा मिलेगा। आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी – यह सब सेवाएं एक साथ उपलब्ध होंगी। यानी आपको अपनी बीमारी और शरीर की प्रकृति के अनुसार सबसे उपयुक्त चिकित्सा पद्धति चुनने की सुविधा मिलेगी।
आयुष चिकित्सा पद्धति के फायदे
आयुष का मतलब आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी है। ये भारत की प्राचीन और परीक्षित चिकित्सा प्रणालियां हैं। इन पद्धतियों में रोग से बचाव को उतना ही महत्व दिया जाता है जितना कि रोग के इलाज को। इसका मतलब यह है कि ये अस्पताल सिर्फ बीमार लोगों का ही नहीं, बल्कि स्वस्थ लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में भी मदद करेंगे।
आयुष अस्पतालों में आपको निम्नलिखित सेवाएं मिलेंगी:
- गर्भावस्था और प्रसव देखभाल – गर्भवती महिलाओं और नवजात बच्चों के लिए विशेष सेवाएं
- बाल स्वास्थ्य – बचपन और किशोरावस्था में व्यापक देखभाल
- पुरानी बीमारियों का इलाज – मधुमेह, उच्च रक्तचाप, गठिया जैसी समस्याएं
- मानसिक स्वास्थ्य सेवा – मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक समस्याओं का इलाज
- वृद्ध लोगों के लिए विशेष देखभाल – सेवानिवृत्त और बुजुर्ग रोगियों के लिए पैलिएटिव केयर
- पाचन संबंधी समस्याएं – आयुर्वेदिक तरीके से जठरांत्र विकारों का समाधान
- हड्डी और जोड़ों के रोग – गठिया, स्पॉन्डिलाइटिस, ऑस्टियोपोरोसिस
- त्वचा संबंधी समस्याएं – एक्जिमा, सोरायसिस और अन्य त्वचा रोग
सरकार का बड़ा निवेश और शिक्षा में सुधार
बिहार सरकार इस स्वास्थ्य क्रांति के लिए काफी गंभीर है। केवल आयुष अस्पतालों के लिए नहीं, बल्कि आयुष शिक्षा को मजबूत करने के लिए भी ₹834 करोड़ का निवेश किया जा रहा है। बेगूसराय आयुर्वेदिक कॉलेज में प्रवेश शुरू हो चुके हैं, जबकि दरभंगा आयुर्वेदिक कॉलेज संचालन के लिए पूरी तरह तैयार है। यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि भविष्य में बिहार में आयुष चिकित्सकों की कोई कमी नहीं होगी, और राज्य के अपने प्रशिक्षित चिकित्सक स्वास्थ्य सेवा में योगदान दे सकेंगे।
निःशुल्क दवाएं और सर्वसुलभ सेवाएं
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन अस्पतालों में मरीजों को निःशुल्क आयुष दवाएं दी जाएंगी। गरीब और निम्न आय वर्गीय लोग, जो महंगी आधुनिक दवाओं का खर्च नहीं उठा सकते, वे अब भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों से लाभ ले सकेंगे। यह सरकार की आयुष्मान भारत योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो सभी के लिए सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करता है।
बिहार में पहले से चल रहीं आयुष सेवाएं
दरअसल, बिहार ने इन नए अस्पतालों के लिए पहले से ही मजबूत नींव तैयार कर ली है। पटना शहर में नवाब मंजिल में 50 बेड वाला एकीकृत आयुष अस्पताल पहले ही पूरा हो चुका है। बिहार के सभी 38 जिलों में संयुक्त आयुष औषधालयें (डिस्पेंसरीज) सफलतापूर्वक काम कर रही हैं। इसके अलावा, 294 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (स्वास्थ्य और कल्याण केंद्र) प्रत्येक गांव तक स्वास्थ्य सेवा पहुंचा रहे हैं।
रोजगार की नई संभावनाएं
इन अस्पतालों के खुलने से न सिर्फ स्वास्थ्य सेवा बेहतर होगी, बल्कि हजारों लोगों को रोजगार का अवसर भी मिलेगा। आयुष चिकित्सक, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन और अन्य तकनीकी कर्मचारियों की भर्ती होगी। स्वास्थ्य विभाग में 1,504 आयुष चिकित्सा अधिकारी के पद भरे जाएंगे, जिससे स्थानीय समुदाय को रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
भारतीय चिकित्सा का आधुनिक रूप
बिहार में आयुष अस्पतालों का यह विस्तार न सिर्फ राज्य के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक बड़ा कदम है, बल्कि भारत की प्राचीन और प्रमाणित चिकित्सा पद्धति को आधुनिक समय में स्थापित करने की भी एक महत्वपूर्ण कोशिश है। ये अस्पताल आने वाले समय में लाखों लोगों को रोग मुक्त और स्वस्थ जीवन जीने में मदद देंगे। सरकार की इस पहल से न सिर्फ बिहार का नाम विकास की सूची में आगे बढ़ेगा, बल्कि भारत की वैदिक और आयुर्वेदिक परंपरा को भी नया जीवन मिलेगा।















